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Kanpur News: जमीन कब्जे के मामले में गलत विवेचना के आरोप में दो दरोगा निलंबित
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- एक दरोगा के पास था आवास-विकास चौकी का प्रभार, दूसरे दरोगा की थी नौबस्ता थाने में तैनाती
- मछरिया में जमीन कब्जे को लेकर एक पक्ष ने दूसरे पक्ष से मिलीभगत का लगाया था आरोप
- डीसीपी साउथ ने घाटमपुर एसीपी की रिपोर्ट पर की कार्रवाई, जांच में दोनों की भूमिका मिली संदिग्ध
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। नौबस्ता थाने के आवास-विकास चौकी इंचार्ज शैलेंद्र सिंह राघव और थाने के दरोगा अंकित खटाना को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई शुक्रवार देर शाम डीसीपी साउथ दीपेंद्रनाथ चौधरी ने की। दोनों के खिलाफ जमीन कब्जे को लेकर एक पक्ष ने दूसरे पक्ष से मिलीभगत कर गलत विवेचना करने का आरोप लगाया था। एसीपी घाटमपुर से जांच कराई गई। जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध मिली जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई हुई।
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि मछरिया की 200 वर्ग गज जमीन को लेकर एक पक्ष ने चौकी इंचार्ज और दरोगा पर मिलीभगत करने के आरोप लगाया था। पीड़ित ने कहा था कि 20 मई 1987 को यह प्लॉट उन्होंने खरीदा था। प्लाॅट पर छह सात लोगों ने कब्जे का प्रयास किया था। उन्होंने 31 दिसंबर 2025 को नौबस्ता थाने में शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों से शिकायत करने पर सात जनवरी 2026 को एफआईआर हुई। दूसरा पक्ष हाईकोर्ट चला गया। उनकी ओर से दावा किया गया कि यह जमीन 28 वर्षों से उनकी है।
मामले की जांच जिलाधिकारी कार्यालय से कराई गई। एडीएम आपूर्ति के निर्देशन में जांच हुई। लेखपाल की रिपोर्ट में पहले पक्ष की जमीन निकली जबकि दूसरे का प्लाॅट कुछ दूरी पर पाया गया। पहले पक्ष ने पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से दूसरे पक्ष पर कब्जा कर कमरा बनाने की शिकायत की थी। एडीएम आपूर्ति राजेश कुमार ने मामले की जांच की। उनकी अंतरिम रिपोर्ट में आवास विकास चौकी इंचार्ज शैलेंद्र सिंह राघव और दरोगा अंकित खटाना की भूमिका संदिग्ध मिली। निलंबन के बाद दोनों दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
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- मछरिया में जमीन कब्जे को लेकर एक पक्ष ने दूसरे पक्ष से मिलीभगत का लगाया था आरोप
- डीसीपी साउथ ने घाटमपुर एसीपी की रिपोर्ट पर की कार्रवाई, जांच में दोनों की भूमिका मिली संदिग्ध
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। नौबस्ता थाने के आवास-विकास चौकी इंचार्ज शैलेंद्र सिंह राघव और थाने के दरोगा अंकित खटाना को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई शुक्रवार देर शाम डीसीपी साउथ दीपेंद्रनाथ चौधरी ने की। दोनों के खिलाफ जमीन कब्जे को लेकर एक पक्ष ने दूसरे पक्ष से मिलीभगत कर गलत विवेचना करने का आरोप लगाया था। एसीपी घाटमपुर से जांच कराई गई। जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध मिली जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई हुई।
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि मछरिया की 200 वर्ग गज जमीन को लेकर एक पक्ष ने चौकी इंचार्ज और दरोगा पर मिलीभगत करने के आरोप लगाया था। पीड़ित ने कहा था कि 20 मई 1987 को यह प्लॉट उन्होंने खरीदा था। प्लाॅट पर छह सात लोगों ने कब्जे का प्रयास किया था। उन्होंने 31 दिसंबर 2025 को नौबस्ता थाने में शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों से शिकायत करने पर सात जनवरी 2026 को एफआईआर हुई। दूसरा पक्ष हाईकोर्ट चला गया। उनकी ओर से दावा किया गया कि यह जमीन 28 वर्षों से उनकी है।
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मामले की जांच जिलाधिकारी कार्यालय से कराई गई। एडीएम आपूर्ति के निर्देशन में जांच हुई। लेखपाल की रिपोर्ट में पहले पक्ष की जमीन निकली जबकि दूसरे का प्लाॅट कुछ दूरी पर पाया गया। पहले पक्ष ने पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से दूसरे पक्ष पर कब्जा कर कमरा बनाने की शिकायत की थी। एडीएम आपूर्ति राजेश कुमार ने मामले की जांच की। उनकी अंतरिम रिपोर्ट में आवास विकास चौकी इंचार्ज शैलेंद्र सिंह राघव और दरोगा अंकित खटाना की भूमिका संदिग्ध मिली। निलंबन के बाद दोनों दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
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