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सरयू में समाए तीन दोस्त: हर्षित के चक्कर में सब गए थे रामलला के दर्शन करने, नहीं थम रहे परिजनों के आंसू
Mon, 11 Mar 2024 11:31 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 11 Mar 2024 11:31 AM IST
सार
सरयू नदी में स्नान के दौरान कानपुर के एक ही मोहल्ले के छह दोस्तों में तीन डूब गए। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
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मृतकों की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर से अयोध्या राम मंदिर दर्शन करने गए छह नाबालिग दोस्तों में से तीन नदी में स्नान के दौरान डूब गए। हादसे की खबर से बर्रा आई ब्लॉक स्थित उनके घरों में कोहराम मच गया। डूबने वालों में बीएससी के छात्र शुभम उर्फ रवि मिश्रा, हर्षित अवस्थी और प्रांशु शामिल हैं।
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शुक्रवार को तीनों अपने मोहल्ले में रहने वाले तीन अन्य साथियों अमन, कृष्ण सहगल और तनिष्क पाल अयोध्या पहुंचे। शनिवार को राम मंदिर के दर्शन करने के बाद रविवार सुबह करीब आठ बजे सभी सरयू नदी में स्नान के लिए पहुंचे। नदी में उतरने से पहले सभी ने एक साथ सेल्फी ली। शुभम व अन्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट भी डाली। तनिष्क ने वीडियो कॉल कर अपनी मां रानी व भाई से बात कर बताया कि नहाने के बाद सभी कानपुर के लिए निकलेंगे। किसी को नहीं पता था कि ये उनकी आखिरी कॉल है।
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हर्षित के चक्कर में सब गए थे रामलला के दर्शन करने
प्रत्यक्षदर्शी तनिष्क पाल ने बताया कि हर्षित अवस्थी को काम के सिलसिले में अयोध्या जाना था। यह बात हर्षित ने दोस्तों को बताई। इसके बाद सभी ने तय किया कि सभी लोग अयोध्या चलें। वहां हर्षित का काम भी हो जाएगा और सभी लोग सरयू नदी में स्नान करने के बाद रामलला के दर्शन भी कर लेंगे। इसलिए हर्षित के साथ पांच दोस्त अयोध्या गए थे।
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होनहार बेटा पिता की करता था मदद
रवि पढ़ाई में तेज था। 18 साल की उम्र में वह बीएससी थर्ड इयर की पढ़ाई कर रहा था। रिश्तेदार राजन ने बताया कि पिता मोहन मिश्रा जब समाचार पत्र वितरण के लिए जाते तो वह उनकी मदद के लिए सुबह उनके साथ जाता था। होनहार बेटा छिन जाने से पिता भी बेसुध हो गए।
रवि पढ़ाई में तेज था। 18 साल की उम्र में वह बीएससी थर्ड इयर की पढ़ाई कर रहा था। रिश्तेदार राजन ने बताया कि पिता मोहन मिश्रा जब समाचार पत्र वितरण के लिए जाते तो वह उनकी मदद के लिए सुबह उनके साथ जाता था। होनहार बेटा छिन जाने से पिता भी बेसुध हो गए।
अकेला चिराग बुझ गया
तीन बहनों के बीच बीच अकेले भाई हर्षित अवस्थी की मौत ने पूरे घर को हिलाकर रख दिया। बहनों की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। स्क्रीन प्रिंटिंग का काम करने वाले पिता ललित नारायण अवस्थी के काम में हाथ बंटाने वाले हर्षित की मां अनीता घर की दहलीज पर पहुंच रहे हर शख्स को देखकर सिसकते हुए अपने बच्चे का चेहरा एक बार दिखाने की गुहार लगाती रही। हर्षित की बहनें ज्योति, आरती व मनसू समझ ही नहीं पा रही थीं कि वह मां को संभालें या अपनी आंखों से बहते आंसुओं को रोके।
तीन बहनों के बीच बीच अकेले भाई हर्षित अवस्थी की मौत ने पूरे घर को हिलाकर रख दिया। बहनों की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। स्क्रीन प्रिंटिंग का काम करने वाले पिता ललित नारायण अवस्थी के काम में हाथ बंटाने वाले हर्षित की मां अनीता घर की दहलीज पर पहुंच रहे हर शख्स को देखकर सिसकते हुए अपने बच्चे का चेहरा एक बार दिखाने की गुहार लगाती रही। हर्षित की बहनें ज्योति, आरती व मनसू समझ ही नहीं पा रही थीं कि वह मां को संभालें या अपनी आंखों से बहते आंसुओं को रोके।
प्रांशु की मां बोली रामजी...ऐसा क्यों किया
प्रांशु के घर पर सन्नाटा छाया हुआ था। घर के बाहर बैठे लोग कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थे। प्रांशु की मां बेसुध बैठी हुई थी। आस पड़ोस की महिलाएं उन्हें समझाने का प्रयास कर रही थीं तो उनके मुंह से यकायक निकला कि रामजी... ऐसा क्यों किया। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाला प्रांशु का छोटा भाई सार्थक सिर्फ लोगों के चेहरे देखता रहा। प्रांशु इंटर में पढ़ाई के साथ पिता का वेल्डिंग के काम में हाथ बंटाता था।
प्रांशु के घर पर सन्नाटा छाया हुआ था। घर के बाहर बैठे लोग कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थे। प्रांशु की मां बेसुध बैठी हुई थी। आस पड़ोस की महिलाएं उन्हें समझाने का प्रयास कर रही थीं तो उनके मुंह से यकायक निकला कि रामजी... ऐसा क्यों किया। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाला प्रांशु का छोटा भाई सार्थक सिर्फ लोगों के चेहरे देखता रहा। प्रांशु इंटर में पढ़ाई के साथ पिता का वेल्डिंग के काम में हाथ बंटाता था।