फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   this person left bsf job for serving poor people

बीएसएफ की नौकरी छोड़ बन गए गरीबों की आवाज

Sun, 26 Nov 2017 02:08 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 26 Nov 2017 02:08 PM IST
विज्ञापन
this person left bsf job for serving poor people
उत्थान
खुद के लिए तो सभी जीतें हैं, क्यों न कुछ लोग दूसरों के लिए भी जीना सीख लें। यह कहना है सोशल एंटरप्रिन्योर और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय का। वह ‘उत्थान... अ स्टार्टअप निर्माण’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शनिवार को पीएसआईटी पहुंचे थे।
विज्ञापन




छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने अपनी सफलता की कहानी बताई।  मूल रूप से वाराणसी के रहने चंद्रप्रकाश पांडेय के पिता चंद्रमा पांडेय शिक्षक और मां संजू पांडेय गृहणी हैं। वर्ष 2000 में उदय प्रताप ऑटोनॉमस कॉलेज से बीएससी करने के बाद वर्ष 2003 में हरीश चंद्र डिग्री कॉलेज, वाराणसी से एलएलबी किया।
विज्ञापन




अगले साल ही उनकी बीएसएफ में बतौर इंस्पेक्टर नौकरी लग गई। चंद्र प्रकाश बताते हैं कि उनके गांव में शिक्षा का स्तर बेहद कम था। आसपास के गांवों में भी छोटे बच्चे स्कूल की बजाय खेतों में काम करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन




ट्रेनिंग के बाद जब वह वापस गांव लौटे तो उन्हें यह नजारा देख दुख हुआ। उसी वक्त उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला ले लिया। चंद्र प्रकाश बताते हैं कि मध्यमवर्गीय परिवार से होने के चलते उन पर काफी जिम्मेदारियां थीं, लेकिन उन्होंने समाज के लिए जीने का फैसला ले लिया और समर्पण सेवा समिति की शुरूआत की।



बतौर अधिवक्ता आज वह  सैकड़ों गरीबों की आवाज बन चुके हैं। गरीबों के लिए हर कानूनी अड़चनों को मुफ्त में निस्तारित करवाने का काम करते हैं। चंद्र प्रकाश बताते हैं कि नौकरी छोड़ने के बाद सबसे पहले उन्होंने किसानों को समझाना शुरू किया कि उनके बच्चों के लिए शिक्षा कितनी जरूरी है।



चंद्रप्रकाश खुद बच्चों को पढ़ाने लगे। कई लोग मान गए और उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया।  नके इस काम को देखते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दर्जनों छात्र उनसे जुड़ गए। एक-एक करके आज करीब 2500 युवाओं की टीम है जो वाराणसी और आसपास के इलाकों में गरीब बच्चों को शिक्षित कर रही है।




चंद्रप्रकाश ने विकलांगों और महिलाओं के हक की लड़ाई के लिए भी खूब संघर्ष किया है। उन्हें पीआईएल दाखिल करने में माहिर माना जाता है। उन्होंने विकलांगों को सरकारी नौकरी में सहूलियत के लिए पीआईएल दाखिल की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा था कि विकलांगों को उनके गृह जनपद में तैनाती दी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed