साउंड के गुंजने की समस्या खत्म: यूपीटीटीआई के छात्र ने पराली से बनाया साउंड अब्जॉर्ब पैनल, किसानों को भी होगा फायदा
यूपीटीटीआई के पीएचडी छात्र ने पराली और कॉटन फाइबर की मदद से पैनल तैयार किया है। दीवार पर ये पैनल लगाने से साउंड के गूंजने की समस्या खत्म होती है। यही नहीं, यह पैनल पर्यावरण सुरक्षा के लिए अच्छा है। साथ ही, किसानों को पराली की समस्या से निजात मिलेगी और आमदनी भी बढ़ेगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या के रूप में उभर रही पराली का तोड़ उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान (यूपीटीटीआई) के छात्र ने निकाला है। पीएचडी के छात्र कौशल किशोर ने पराली, कॉटन फाइबर की मदद से साउंड अब्जॉर्ब पैनल बनाया है। इस पैनल को दीवार पर लगाने से साउंड इको (आवाज गूंजने) की समस्या नहीं रहेगी। इस पैनल को जयपुर की साउंड अब्जॉर्ब लैब में टेस्ट किया गया है, जहां यह सफल रहा है।
देश में पराली जलाने के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। अभी तक इसके निस्तारण का कोई स्थायी हल नहीं निकला है। इसी को ध्यान में रखते हुए कौशल किशोर ने प्रोफेसर मुकेश कुमार सिंह के निर्देशन में इस रिसर्च को पूरा किया है। 2020 में इस पर रिसर्च वर्क शुरू हुआ था, फिर कोरोना के कारण काफी समय तक काम अटका रहा।
प्रो. मुकेश ने बताया कि काफी रिसर्च के बाद इसे पैनल के रूप में विकसित किया गया है। पूरी तरह से स्वदेशी प्रोडक्ट अन्य के मुकाबले बेहद सस्ता है। इसकी मदद से पर्यावरण की सुरक्षा तो होगी ही, किसानों को भी पराली की समस्या से निजात मिलेगी और आमदनी भी बढ़ेगी।
ऐसे होता है तैयार पैनल
कौशल ने बताया कि पैनल को तैयार करने के लिए पराली के साथ कपड़े बनाने के दौरान वेस्ट होने वाले कॉटन फाइबर और अन्य रसायन को मिलाया जाता है। फाइबर का इस्तेमाल बांडिंग के लिए होता है। इसमें 75 फीसदी पराली और 25 फीसदी कॉटन व अन्य चीजों का इस्तेमाल होता है। पराली को धोकर सुखाने के बाद क्रश करते हैं और फिर उसमें अन्य पदार्थ को मिलाकर पैनल तैयार होता है।
कॉमर्शियल पैनल से अधिक कारगर
मुकेश ने बताया कि मार्केट में मौजूद 10 एमएम के कॉमर्शियल पैनल में साउंड को अब्जॉर्ब करने की क्षमता .29 से .35 एनआरसी (नॉइस रिडक्शन कोइफिशिएंट) होती है, जबकि इसकी क्षमता .34 है। कॉमर्शियल पैनल लगाने में प्रति स्क्वॉयर फीट 100 रुपये से 120 रुपये देने पड़ते हैं, जबकि पराली से तैयार पैनल मात्र 30 रुपये से 40 रुपये प्रति स्क्वॉयर फीट में उपलब्ध हो जाएंगे।
इन जगहों पर होता है पैनल का इस्तेमाल
साउंड अब्जार्ब पैनल का इस्तेमाल म्यूजिक इंडस्ट्री के अलावा स्कूलों के हॉल, म्यूजिक रूम, कॉन्फ्रेंस रूम, ऑडिटोरियम में होता है। यह पैनल साउंड को अब्जार्ब कर इको की समस्या को खत्म करता है। जिन दीवारों पर यह पैनल लगे होते हैं, वहां आवाज इको नहीं करती है।