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Kanpur News: चंबल अभयारण्य में डेढ़ गुना तक बढ़ेगा घड़ियालों का कुनबा
Mon, 29 Jul 2024 02:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:24 AM IST
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फोटो 03
फोटो 04
फोटो 05
चंबल नदी किनारे प्राकृतिक हैचरी में 2299 अंडों से 2262 बच्चे निकले
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। चंबल अभयारण्य में इस साल घड़ियाल प्रजनन के लिए मौसम अनुकूल रहा है। 15 मई से 20 जून तक उदी से पचनद तक बनी लगभग 20 अस्थायी प्राकृतिक हैचरी में करीब 2299 अंडों से 2262 बच्चे बाहर निकले हैं। प्रजनन के दौरान अच्छी गर्मी के साथ बारिश न होने के कारण रेत में नेस्ट सुरक्षित रहा है।
चंबल में बांधों से जब अचानक पानी छोड़ा जाता है तब नदी में पल रहे चार सेमी के घड़ियालों के बच्चे नष्ट हो जाते हैं। केवल दो प्रतिशत बच्चे ही जिंदा रहते हैं। इस साल नदी में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। यदि बारिश सामान्य रही और बाढ़ का पानी अधिक नहीं छोड़ा गया तो रेंज में घड़ियालों की संख्या में 1000 से 1500 तक की वृद्धि हो सकती है।
दरअसल बच्चे जब 20 सेमी के हो जाते हैं तो वह बाढ़ का सामना करने में सक्षम हो जाते हैं और इन्हें इतना बड़ा होने में करीब डेढ़ से दो महिने का समय लगता है। एक महीने से अधिक समय के बच्चे हो चुके हैं।
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तीन साल से आ रही चंबल नदी में बाढ़
चंबल नदी में पिछले तीन साल घड़ियालों का कुनबा से बाढ़ के कारण घड़ियालों पर संकट मंडरा रहा है। 2022 में घड़ियाल 2176 से बढ़कर 2023 में 2456 तक पहुंच गए हैं। इस साल अभयारण्य में कुल 2299 अंडों से अभी तक बच्चे बाहर निकले हैं। अबकी बार सेंक्चुअरी ने अंडों को उन घाटों से भी एकत्रित किया है, जहां इनकी नेस्ट खराब होने की अधिक संभावना रहती है। वहीं प्राकृतिक हैचरी में उदी से पचनद तक करीब 2262 बच्चों को चंबल में छोड़ा गया है।
एक हैचरी में सहेजे जाते 25 से 30 अंडे
चंबल नदी किनारे प्राकृतिक हैचरी (घड़ियालों की ओर से स्वतः रेत में अंडे दबाकर) बनाई गई थी। एक नेस्ट से करीब 25 से 30 अंडे सहेजे थे। वन्य जीव कार्यकर्ता जीव चौहान ने बताया कि इस साल गर्मी और सर्दी अच्छी रही। जिससे रेत में एक फीट तक दबे घड़ियालों के अंडों से 90 प्रतिशत बच्चे बाहर निकल आए हैं।
संरक्षण के प्रयास से बढ़ी घड़ियालों की संख्या
वर्ष 2007 और 2008 में घड़ियालों की संख्या तेजी से घटने लगी थी तब राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के सेंअचुरी एवं वन विभाग ने इनकी संरक्षण के लिए प्रयास किए थे। अब एक बार फिर से घड़ियाल और मगरमच्छों की संख्या बढ़ने लगी है। बताया गया कि अप्रैल माह में मादा घड़ियाल अंडे देती है और 60 दिन के बाद बच्चे अंडे से निकलते।
वर्जन
घड़ियालों के प्रजनन के लिए इस साल मौसम अच्छा रहा है। इटावा रेंज में 2262 बच्चे जीवित निकले हैं। प्राकृतिक हैचरी गढ़ायता में भी इस बार बड़ी संख्या में बच्चे निकले हैं। फरवरी मार्च में सर्वे कर नदी में कुल घड़ियालों की रिपोर्ट जारी की जाएगी।- कोटेश त्यागी, रेंजर चकरनगर
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चंबल नदी किनारे प्राकृतिक हैचरी में 2299 अंडों से 2262 बच्चे निकले
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। चंबल अभयारण्य में इस साल घड़ियाल प्रजनन के लिए मौसम अनुकूल रहा है। 15 मई से 20 जून तक उदी से पचनद तक बनी लगभग 20 अस्थायी प्राकृतिक हैचरी में करीब 2299 अंडों से 2262 बच्चे बाहर निकले हैं। प्रजनन के दौरान अच्छी गर्मी के साथ बारिश न होने के कारण रेत में नेस्ट सुरक्षित रहा है।
चंबल में बांधों से जब अचानक पानी छोड़ा जाता है तब नदी में पल रहे चार सेमी के घड़ियालों के बच्चे नष्ट हो जाते हैं। केवल दो प्रतिशत बच्चे ही जिंदा रहते हैं। इस साल नदी में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। यदि बारिश सामान्य रही और बाढ़ का पानी अधिक नहीं छोड़ा गया तो रेंज में घड़ियालों की संख्या में 1000 से 1500 तक की वृद्धि हो सकती है।
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दरअसल बच्चे जब 20 सेमी के हो जाते हैं तो वह बाढ़ का सामना करने में सक्षम हो जाते हैं और इन्हें इतना बड़ा होने में करीब डेढ़ से दो महिने का समय लगता है। एक महीने से अधिक समय के बच्चे हो चुके हैं।
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तीन साल से आ रही चंबल नदी में बाढ़
चंबल नदी में पिछले तीन साल घड़ियालों का कुनबा से बाढ़ के कारण घड़ियालों पर संकट मंडरा रहा है। 2022 में घड़ियाल 2176 से बढ़कर 2023 में 2456 तक पहुंच गए हैं। इस साल अभयारण्य में कुल 2299 अंडों से अभी तक बच्चे बाहर निकले हैं। अबकी बार सेंक्चुअरी ने अंडों को उन घाटों से भी एकत्रित किया है, जहां इनकी नेस्ट खराब होने की अधिक संभावना रहती है। वहीं प्राकृतिक हैचरी में उदी से पचनद तक करीब 2262 बच्चों को चंबल में छोड़ा गया है।
एक हैचरी में सहेजे जाते 25 से 30 अंडे
चंबल नदी किनारे प्राकृतिक हैचरी (घड़ियालों की ओर से स्वतः रेत में अंडे दबाकर) बनाई गई थी। एक नेस्ट से करीब 25 से 30 अंडे सहेजे थे। वन्य जीव कार्यकर्ता जीव चौहान ने बताया कि इस साल गर्मी और सर्दी अच्छी रही। जिससे रेत में एक फीट तक दबे घड़ियालों के अंडों से 90 प्रतिशत बच्चे बाहर निकल आए हैं।
संरक्षण के प्रयास से बढ़ी घड़ियालों की संख्या
वर्ष 2007 और 2008 में घड़ियालों की संख्या तेजी से घटने लगी थी तब राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के सेंअचुरी एवं वन विभाग ने इनकी संरक्षण के लिए प्रयास किए थे। अब एक बार फिर से घड़ियाल और मगरमच्छों की संख्या बढ़ने लगी है। बताया गया कि अप्रैल माह में मादा घड़ियाल अंडे देती है और 60 दिन के बाद बच्चे अंडे से निकलते।
वर्जन
घड़ियालों के प्रजनन के लिए इस साल मौसम अच्छा रहा है। इटावा रेंज में 2262 बच्चे जीवित निकले हैं। प्राकृतिक हैचरी गढ़ायता में भी इस बार बड़ी संख्या में बच्चे निकले हैं। फरवरी मार्च में सर्वे कर नदी में कुल घड़ियालों की रिपोर्ट जारी की जाएगी।- कोटेश त्यागी, रेंजर चकरनगर