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हौसले से मना शताब्दी समारोह
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 24 Jan 2015 03:34 AM IST
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द लायर्स एसोसिएशन के शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत शुक्रवार को की गई। समारोह के लिए जीएनके कॉलेज परिसर को सजाया गया। इस दौरान कई प्रस्ताव और अधिवक्ता हित पर विचार रखे जाने थे।
पर, ऐन वक्त पर कुछ लायर्स के विरोध से प्रस्तावित अतिथि नहीं आए और समारोह पर ग्रहण लग गया। ऐसे में आयोजक मंडल ने समारोह को लायर्स एसोसिएशन परिसर में नए सिरे से मनाया।
मंचासीन अतिथियों और अमूमन हर वक्ता के संबोधन में विरोध करने वालों की निंदा के बोल रहे। अंत में मंच से ही अधिवक्ता नत्थू लाल सचान को प्रतिनिधि के तौर सामने कर निंदा प्रस्ताव लाने की मौखिक घोषणा हुई।
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समारोह 24 और 25 जनवरी को भी मनाया जाएगा। इससे पहले मुख्य अतिथि बार कौंसिल के सदस्य एवं पूर्व चेयरमैन योगेंद्र स्वरूप ने दीप जलाकर समारोह का उद्घाटन किया। अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष नदीम रऊफ खान ने की।
संचालन का दायित्व महामंत्री शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने संभाला। युवा अधिवक्ताओं ने बार कौंसिल की परीक्षा देने की नई व्यवस्था पर पुनर्विचार के लिए ज्ञापन सौंपा। वक्ताओं ने एकमत से कहा कि परीक्षा की यह व्यवस्था यदि लागू करनी थी तो तीन साल पहले करनी चाहिए थी।
अब तीन साल में हजारों अधिवक्ता इनरोल्ड हो गए हैं। इन्हें हटाना या वकालतनामा लगाने से रोकना कैसे संभव है। महामंत्री शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने बताया कि द लायर्स एसोसिएशन की स्थापना 1912 में हुई थी।
मंचासीन एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन युद्धवीर सिंह चौहान, एल्डर्स कमेटी के विश्वनाथ कपूर, बार एसोसिएशन कानपुर के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार द्विवेदी, महामंत्री दिनेश कुमार शुक्ल, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कुशवाहा एवं पूर्व मंत्री एवं अधिवक्ता सतीश पाल ने विचार व्यक्त किए।
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पर, ऐन वक्त पर कुछ लायर्स के विरोध से प्रस्तावित अतिथि नहीं आए और समारोह पर ग्रहण लग गया। ऐसे में आयोजक मंडल ने समारोह को लायर्स एसोसिएशन परिसर में नए सिरे से मनाया।
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मंचासीन अतिथियों और अमूमन हर वक्ता के संबोधन में विरोध करने वालों की निंदा के बोल रहे। अंत में मंच से ही अधिवक्ता नत्थू लाल सचान को प्रतिनिधि के तौर सामने कर निंदा प्रस्ताव लाने की मौखिक घोषणा हुई।
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समारोह 24 और 25 जनवरी को भी मनाया जाएगा। इससे पहले मुख्य अतिथि बार कौंसिल के सदस्य एवं पूर्व चेयरमैन योगेंद्र स्वरूप ने दीप जलाकर समारोह का उद्घाटन किया। अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष नदीम रऊफ खान ने की।
संचालन का दायित्व महामंत्री शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने संभाला। युवा अधिवक्ताओं ने बार कौंसिल की परीक्षा देने की नई व्यवस्था पर पुनर्विचार के लिए ज्ञापन सौंपा। वक्ताओं ने एकमत से कहा कि परीक्षा की यह व्यवस्था यदि लागू करनी थी तो तीन साल पहले करनी चाहिए थी।
अब तीन साल में हजारों अधिवक्ता इनरोल्ड हो गए हैं। इन्हें हटाना या वकालतनामा लगाने से रोकना कैसे संभव है। महामंत्री शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने बताया कि द लायर्स एसोसिएशन की स्थापना 1912 में हुई थी।
मंचासीन एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन युद्धवीर सिंह चौहान, एल्डर्स कमेटी के विश्वनाथ कपूर, बार एसोसिएशन कानपुर के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार द्विवेदी, महामंत्री दिनेश कुमार शुक्ल, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कुशवाहा एवं पूर्व मंत्री एवं अधिवक्ता सतीश पाल ने विचार व्यक्त किए।