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कंपनी ने छह लाख छात्र-छात्राओं का डाटा बेचा, आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने डीआईजी कानपुर से की शिकायत
Tue, 15 Dec 2020 03:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 15 Dec 2020 03:16 PM IST
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आईजी अमिताभ ठाकुर
- फोटो : amar ujala
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कानपुर की एक कंपनी ने वर्ष 2020 के छह लाख बोर्ड परीक्षार्थियों का डाटा निजी कंपनियों और संस्थानों को बेच दिया है। इस संबंध में गोपनीय दस्तावेज समेत अन्य जानकारियां आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने डीआईजी कानपुर को ई-मेल के जरिये सोमवार को उपलब्ध कराई हैं। डीआईजी के आदेश पर मामले की जांच शुरू हो गई है।
अमिताभ ठाकुर के मुताबिक रायपुरवा इलाके में एक कंपनी के पास बोर्ड परीक्षार्थियों का डाटा उपलब्ध है। इसमें हाईस्कूल के तीन लाख 46 हजार 505 छात्रों का डाटा है जबकि इंटरमीडिएट के दो लाख 27 हजार 984 छात्र-छात्राओं का डाटा है। ये कंपनी अलग-अलग कंपनियों, कोचिंग सेंटरों समेत अन्य कई संस्थानों को छात्रों का डाटा बेच रही है। डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि शिकायत मिली है। जांच कराई जा रही है।
एक छात्र का डाटा 6500 रुपये में बेचा
डीआईजी को सौंपी शिकायत में लिखा गया है कि छात्र-छात्राओं के डाटा में उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल व माता पिता का नाम आदि दिया जा रहा है। एक छात्र का डाटा 6500 रुपये में बेचा गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह डाटा बेचकर करोड़ों रुपयेे इधर से उधर किए जा रहे हैं। डाटा बेचने में खतरा यह है कि नाम, मोबाइल नंबर, एड्रेस आदि की जानकारी दूसरों तक जाने से संबंधित व्यक्ति की तमाम डीटेल दूसरों के पास जा सकती हैं।
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अमिताभ ठाकुर के मुताबिक रायपुरवा इलाके में एक कंपनी के पास बोर्ड परीक्षार्थियों का डाटा उपलब्ध है। इसमें हाईस्कूल के तीन लाख 46 हजार 505 छात्रों का डाटा है जबकि इंटरमीडिएट के दो लाख 27 हजार 984 छात्र-छात्राओं का डाटा है। ये कंपनी अलग-अलग कंपनियों, कोचिंग सेंटरों समेत अन्य कई संस्थानों को छात्रों का डाटा बेच रही है। डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि शिकायत मिली है। जांच कराई जा रही है।
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एक छात्र का डाटा 6500 रुपये में बेचा
डीआईजी को सौंपी शिकायत में लिखा गया है कि छात्र-छात्राओं के डाटा में उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल व माता पिता का नाम आदि दिया जा रहा है। एक छात्र का डाटा 6500 रुपये में बेचा गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह डाटा बेचकर करोड़ों रुपयेे इधर से उधर किए जा रहे हैं। डाटा बेचने में खतरा यह है कि नाम, मोबाइल नंबर, एड्रेस आदि की जानकारी दूसरों तक जाने से संबंधित व्यक्ति की तमाम डीटेल दूसरों के पास जा सकती हैं।
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साइबर अपराधी उठा सकते हैं फायदा
रोजाना ऐसे कई मामले आते हैं जिनमें साइबर अपराधी लोगों को फोन पर संपर्क करते हैं। उनको झांसा देकर रकम पार कर लेते हैं। इसमें से कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जिसमें साइबर ठग फोन करते ही ग्राहक का नाम, पता मोबाइल नंबर आदि फर्राटे से बताने लगता है। इससे लोगों को यकीन हो जाता है कि फोन करने वाला शख्स सही बोल रहा है तभी वो बैंक आदि संबंधी जानकारी उससे साझा कर लेता है। कुछ ही देर बाद ठग रकम पार कर देता है। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि डाटा का इस्तेमाल साइबर अपराधी भी कर सकते हैं जो खतरनाक है।
डाटा बेचने का बड़ा खेल
डाटा चोरी करना और बेचने का बड़ा खेल है। दूसरे देश में भी डाटा बेचा जाता है। साइबर ठग से लेकर शातिर अपराधी, आतंकी तक डाटा का इस्तेमाल करते हैं। डाटा बेचने पर किसी भी शख्स के बारे में पूरी जानकारी दूसरे लोगों को मिल जाती है। किस क्षेत्र से वो जुड़ा है, क्या कर रहा है, क्या रुचि है, क्या विचारधारा है आदि जानकारी मिल जाती है। तमाम निजी कंपनियां इसका इस्तेमाल कर मैसेज, ईमेल के अलावा कॉल भी करती हैं। आजकल तो राजनीतिक दल भी डाटा से लोगों की राजनीतिक रुचि का पता लगाती हैं।
सतर्क रहें, वरना हो सकता है नुकसान
-मॉल, बड़ी दुकानों समेत कई जगहों पर लोग स्कीमों आदि केनाम पर फार्म भरवाते हैं जिसके जरिये वो लोगों के मोबाइल नंबर समेत अन्य जानकारियां इकट्ठा कर लेते हैं। इसमें तमाम लोग गिरोह से भी जुड़े हो सकते हैं जो इस डाटा को भी बेच देते हैं।
- निजी जानकारी साझा करने से सामाजिक-आर्थिक नुकसान हो सकता है
- आपके नाम, पता, पहचान का इस्तेमाल कर किसी आपराधिक घटना में हो सकता है
- ऑनलाइन डाटा लेकर बड़े आपराधिक संगठन लोगों की पहचान भी बदल देते हैं
रोजाना ऐसे कई मामले आते हैं जिनमें साइबर अपराधी लोगों को फोन पर संपर्क करते हैं। उनको झांसा देकर रकम पार कर लेते हैं। इसमें से कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जिसमें साइबर ठग फोन करते ही ग्राहक का नाम, पता मोबाइल नंबर आदि फर्राटे से बताने लगता है। इससे लोगों को यकीन हो जाता है कि फोन करने वाला शख्स सही बोल रहा है तभी वो बैंक आदि संबंधी जानकारी उससे साझा कर लेता है। कुछ ही देर बाद ठग रकम पार कर देता है। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि डाटा का इस्तेमाल साइबर अपराधी भी कर सकते हैं जो खतरनाक है।
डाटा बेचने का बड़ा खेल
डाटा चोरी करना और बेचने का बड़ा खेल है। दूसरे देश में भी डाटा बेचा जाता है। साइबर ठग से लेकर शातिर अपराधी, आतंकी तक डाटा का इस्तेमाल करते हैं। डाटा बेचने पर किसी भी शख्स के बारे में पूरी जानकारी दूसरे लोगों को मिल जाती है। किस क्षेत्र से वो जुड़ा है, क्या कर रहा है, क्या रुचि है, क्या विचारधारा है आदि जानकारी मिल जाती है। तमाम निजी कंपनियां इसका इस्तेमाल कर मैसेज, ईमेल के अलावा कॉल भी करती हैं। आजकल तो राजनीतिक दल भी डाटा से लोगों की राजनीतिक रुचि का पता लगाती हैं।
सतर्क रहें, वरना हो सकता है नुकसान
-मॉल, बड़ी दुकानों समेत कई जगहों पर लोग स्कीमों आदि केनाम पर फार्म भरवाते हैं जिसके जरिये वो लोगों के मोबाइल नंबर समेत अन्य जानकारियां इकट्ठा कर लेते हैं। इसमें तमाम लोग गिरोह से भी जुड़े हो सकते हैं जो इस डाटा को भी बेच देते हैं।
- निजी जानकारी साझा करने से सामाजिक-आर्थिक नुकसान हो सकता है
- आपके नाम, पता, पहचान का इस्तेमाल कर किसी आपराधिक घटना में हो सकता है
- ऑनलाइन डाटा लेकर बड़े आपराधिक संगठन लोगों की पहचान भी बदल देते हैं