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मनमाने तरीके से दिए करोड़ों के लोन
अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 12 Jul 2015 01:55 AM IST
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ब्रह्मावर्त कामर्शियल कोऑपरेटिव बैंक में मनमाने तरीके से करोड़ों रुपये के लोन दिए गए। नगर निगम के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक को लाखों के लोन बांटे गए। बैंक ने करीब सात करोड़ के लोन दिए।
इसमें से आधा रुपया अभी भी फंसा हुआ है। हालांकि प्रबंधतंत्र का दावा है कि दिए गए लोन की रिकवरी लगातार की जा रही है। वहीं शनिवार को बैंक की सभी नौ शाखाओं पर रुपये निकालने वालों की जबरदस्त भीड़ रही।
आरबीआई के सूत्रों ने बताया कि नियमों को दरकिनार कर लोन दिए गए। लोन ऐसे लोगों को दिए गए जो पात्र ही नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक कानपुर नगर निगम के कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर लोन दिया गया। अभी भी साढ़े तीन करोड़ से अधिक का लोन फंसा हुआ है।
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कोऑपरेटिव बैंक के लिए यह बड़ी रकम होती है। सूत्रों ने बताया कि 2005 में नगर निगम कर्मचारियों की सैलरी बैंक में आती थी। यह व्यवस्था 2013 तक चली। इस दौरान ही बड़े पैमाने पर निगम कर्मचारियों के लोन स्वीकृत हुए। बैंक के सीईओ आशुतोष मिश्रा ने बताया कि जो भी लोन स्वीकृत हुए पूरे नियम कानून के साथ स्वीकृत किए गए। सात करोड़ रुपये लोन दिया गया। इसमें से काफी रकम रिकवर हो चुकी है।
करीब दो करोड़ रुपया रिकवर होना है। इसके प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा अक्तूबर 2014 से नगर निगम की सैलरी का काम भी बैंक को वापस मिल गया है। उन्होंने बताया कि बैंक पर प्रतिबंध को लेकर आरबीआई को पूरा ब्यौरा भेजा जा चुका है। आरबीआई के अफसरों से भी संपर्क में हैं।
वहीं बैंक की रतनलाल नगर मुख्यालय शाखा के अलावा यशोदानगर, नयागंज, बर्रा-आठ, लालबंगला, कर्नलगंज, देवनगर, किदवईनगर, काकादेव में रुपये निकालने वालों की जबरदस्त भीड़ रही। इस दौरान धक्का मुक्की भी हुई। इसके चलते पुलिस को आना पड़ा।
शहर के अलावा प्रदेश में कई जगह करोड़ों की प्रापर्टी : सूत्रों ने बताया कि बैंक प्रबंधतंत्र की शहर के अलावा प्रदेश के कई बड़े शहरों में करोड़ों की प्रॉपर्टी है।
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इसमें से आधा रुपया अभी भी फंसा हुआ है। हालांकि प्रबंधतंत्र का दावा है कि दिए गए लोन की रिकवरी लगातार की जा रही है। वहीं शनिवार को बैंक की सभी नौ शाखाओं पर रुपये निकालने वालों की जबरदस्त भीड़ रही।
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आरबीआई के सूत्रों ने बताया कि नियमों को दरकिनार कर लोन दिए गए। लोन ऐसे लोगों को दिए गए जो पात्र ही नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक कानपुर नगर निगम के कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर लोन दिया गया। अभी भी साढ़े तीन करोड़ से अधिक का लोन फंसा हुआ है।
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कोऑपरेटिव बैंक के लिए यह बड़ी रकम होती है। सूत्रों ने बताया कि 2005 में नगर निगम कर्मचारियों की सैलरी बैंक में आती थी। यह व्यवस्था 2013 तक चली। इस दौरान ही बड़े पैमाने पर निगम कर्मचारियों के लोन स्वीकृत हुए। बैंक के सीईओ आशुतोष मिश्रा ने बताया कि जो भी लोन स्वीकृत हुए पूरे नियम कानून के साथ स्वीकृत किए गए। सात करोड़ रुपये लोन दिया गया। इसमें से काफी रकम रिकवर हो चुकी है।
करीब दो करोड़ रुपया रिकवर होना है। इसके प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा अक्तूबर 2014 से नगर निगम की सैलरी का काम भी बैंक को वापस मिल गया है। उन्होंने बताया कि बैंक पर प्रतिबंध को लेकर आरबीआई को पूरा ब्यौरा भेजा जा चुका है। आरबीआई के अफसरों से भी संपर्क में हैं।
वहीं बैंक की रतनलाल नगर मुख्यालय शाखा के अलावा यशोदानगर, नयागंज, बर्रा-आठ, लालबंगला, कर्नलगंज, देवनगर, किदवईनगर, काकादेव में रुपये निकालने वालों की जबरदस्त भीड़ रही। इस दौरान धक्का मुक्की भी हुई। इसके चलते पुलिस को आना पड़ा।
शहर के अलावा प्रदेश में कई जगह करोड़ों की प्रापर्टी : सूत्रों ने बताया कि बैंक प्रबंधतंत्र की शहर के अलावा प्रदेश के कई बड़े शहरों में करोड़ों की प्रॉपर्टी है।