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Kanpur News: दिल्ली में कृत्रिम बारिश के लिए तकनीकी परीक्षण हुआ सफल, बादलों का इंतजार
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कानपुर। आईआईटी कानपुर की ओर से गुरुवार को दिल्ली के बिधुनी क्षेत्र में कृत्रिम बारिश कराने के लिए सेसना एयरक्राफ्ट का सफल परीक्षण किया गया। हालांकि इस दौरान बादल नहीं होने से बारिश नहीं हो पाई।
परीक्षण में एयरक्राफ्ट के साथ पूरे सिस्टम को चेक किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार ट्रायल में फ्लेयर्स और उपकरणों ने बेहतरीन तरीके से काम किया जिससे यह साबित हुआ कि प्रणाली पूरी तरह तैयार है और बादल बनते ही कृत्रिम वर्षा कराई जा सकेगी।
हर साल दिवाली के बाद दिल्ली की हवा में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। ऐसे में आईआईटी कानपुर की यह तकनीक राजधानी को स्वच्छ हवा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आईआईटी कानपुर लंबे समय से कृत्रिम बारिश की तैयारी कर रहा है।
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इसके लिए गुरुवार दोपहर दो बजे आईआईटी कानपुर की एयरस्ट्रिप से सेसना एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी। इसमें बादलों में नमी बढ़ाने के लिए विशेष रसायन के साथ फ्लेयर्स लगाए गए थे। एयरक्राफ्ट ने दिल्ली के बिधुनी क्षेत्र में कई ऊंचाइयों पर परीक्षण किया और आवश्यक डाटा एकत्र किया। शाम छह बजे यह एयरक्राफ्ट मिशन पूरा कर कानपुर लौट आया।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार को किया गया परीक्षण तकनीकी रूप से सफल रहा लेकिन बादल नहीं होने की वजह से बारिश नहीं हुई। परीक्षण का उद्देश्य फ्लेयर्स की कार्यक्षमता, उपकरणों की सटीकता और पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता की जांच करना था।
सभी उपकरणों ने अपेक्षित प्रदर्शन किया और फ्लेयर्स ने हवा में रासायनिक बिखराव का उत्कृष्ट परिणाम दिखाया। पूर्वाभ्यास सफल होने के बाद अब बादलों की प्रतीक्षा है। इस प्रोजेक्ट को हर स्तर पर सहयोग और अनुमति देने के लिए प्रो. अग्रवाल ने दिल्ली सरकार का आभार व्यक्त किया। विशेषज्ञों ने कहा कि अगले कुछ दिनों में घने बादल होने पर दोबारा परीक्षण किया जाएगा जिससे कृत्रिम बारिश कर प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद मिलेगी।
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परीक्षण में एयरक्राफ्ट के साथ पूरे सिस्टम को चेक किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार ट्रायल में फ्लेयर्स और उपकरणों ने बेहतरीन तरीके से काम किया जिससे यह साबित हुआ कि प्रणाली पूरी तरह तैयार है और बादल बनते ही कृत्रिम वर्षा कराई जा सकेगी।
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हर साल दिवाली के बाद दिल्ली की हवा में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। ऐसे में आईआईटी कानपुर की यह तकनीक राजधानी को स्वच्छ हवा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आईआईटी कानपुर लंबे समय से कृत्रिम बारिश की तैयारी कर रहा है।
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इसके लिए गुरुवार दोपहर दो बजे आईआईटी कानपुर की एयरस्ट्रिप से सेसना एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी। इसमें बादलों में नमी बढ़ाने के लिए विशेष रसायन के साथ फ्लेयर्स लगाए गए थे। एयरक्राफ्ट ने दिल्ली के बिधुनी क्षेत्र में कई ऊंचाइयों पर परीक्षण किया और आवश्यक डाटा एकत्र किया। शाम छह बजे यह एयरक्राफ्ट मिशन पूरा कर कानपुर लौट आया।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार को किया गया परीक्षण तकनीकी रूप से सफल रहा लेकिन बादल नहीं होने की वजह से बारिश नहीं हुई। परीक्षण का उद्देश्य फ्लेयर्स की कार्यक्षमता, उपकरणों की सटीकता और पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता की जांच करना था।
सभी उपकरणों ने अपेक्षित प्रदर्शन किया और फ्लेयर्स ने हवा में रासायनिक बिखराव का उत्कृष्ट परिणाम दिखाया। पूर्वाभ्यास सफल होने के बाद अब बादलों की प्रतीक्षा है। इस प्रोजेक्ट को हर स्तर पर सहयोग और अनुमति देने के लिए प्रो. अग्रवाल ने दिल्ली सरकार का आभार व्यक्त किया। विशेषज्ञों ने कहा कि अगले कुछ दिनों में घने बादल होने पर दोबारा परीक्षण किया जाएगा जिससे कृत्रिम बारिश कर प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद मिलेगी।