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कानपुर में बुखार का कहर: कर्जा लेकर निजी अस्पतालों में इलाज कराना मंजूर पर हैलट आना नहीं

Mon, 13 Sep 2021 09:30 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 13 Sep 2021 09:30 AM IST
सार

कानपुर में कुरसौली के ग्रामीणों ने हैलट का बहिष्कार कर दिया है। तन्नू की मौत के बाद से हैलट के प्रति लोगों में गुस्सा है। गांव में अब तक आठ की मौत हाे चुकी है। ढाई-तीन सौ बुखार के रोगी निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे है।

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Taking loan for treatment in private hospitals is acceptable but does not come to hallet hospital
बुखार से मौतें - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर हैलट प्रबंधन की बेरुखी कल्याणपुर ब्लॉक के कुरसौली गांव के लोगों में इस कदर घर कर गई है कि वे जेवर बेचकर और कर्जा लेकर निजी अस्पतालों में अपनों का इलाज करा ले रहे लेकिन हैलट नहीं जा रहे। गांव की तन्नू की मौत के बाद से एक तरह से लोगों ने हैलट का बहिष्कार कर दिया है।
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दरअसल, 20 अगस्त को तबीयत बिगड़ने पर जब तन्नू को यहां लाया गया था तो चार घंटे इंतजार करने के बाद भी भर्ती नहीं हो पाई थी। इसके बाद परिजन उसे लेकर कल्याणपुर के एक निजी अस्पताल भागे और रास्ते में ही तन्नू की मौत हो गई थी। ऐसा पहली बार हुआ है कि जानलेवा रोग के हमले के बाद भी लोग हैलट का रुख नहीं कर रहे।
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गांव की 14 साल की बेटी की मौत और भर्ती में सुस्ती ने ग्रामीणों में रोष भर दिया है। नर्सिंगहोमों के डॉक्टर भी कुरसौली में फैले बुखार को नहीं समझ पा रहे। रोगियों का लक्षण के आधार पर इलाज किया जा रहा है। प्रदेश के नंबर वन राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर यह सवालिया निशान है।

कुरसौली में अब तक आठ मौत हो चुकी हैं और ढाई सौ बुखार के रोगी मिले हैं। सभी का इलाज कल्याणपुर, नौबस्ता, किदवईनगर आदि क्षेत्रों के नर्सिंगहोमों में हुआ है और चल रहा है। कुरसौली के ग्राम प्रधान अमित सिंह का कहना है कि तन्नू को ले जाने में एक घंटा लगा और चार घंटे इंतजार कराया गया।

वहां कौन जाए? गांव के ज्वाला प्रसाद और संजय कुमार का कहना है कि लोग कर्जा लेकर इलाज करा रहे हैं। हैलट नहीं जा रहे। गांव में ढाई-तीन सौ लोग बीमार पड़े हैं, तीन-चार ही वहां इलाज के लिए गए होंगे। 

इमरजेंसी में रोगियों की बहुत संख्या रहती है। इस वजह से मरीज को भर्ती करने में समय लग जाता है। एक-एक रोगी की हिस्ट्री ली जाती है, इसके बाद भर्ती किया जाता है।
डॉ. रिचा गिरि, उप प्राचार्य एवं मेडिसिन विभागाध्यक्ष, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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