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बगदादी से मिलने की फिराक में थे ये संदिग्ध आतंकी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 22 Mar 2017 08:51 AM IST
सार
- बॉर्डर पार करने के लिए पांच बार कश्मीर गए थे
- सेना की सर्तकता के चलते नहीं हुए थे सफल
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विस्तार
संदिग्ध आतंकी आतिफ और उसके साथी आईएसआईएस के सरगना बगदादी से मिलने की फिराक में थे। बॉर्डर पार कर पाकिस्तान जाने के लिए आतिफ और उसके साथी पांच बार कश्मीर गए थे। सेना की सतर्कता के चलते वे बॉर्डर नहीं पार कर पाए थे। उन्हें लौटना पड़ा था। इसके बाद से ही आतिफ और उनके साथियों ने अपने स्तर पर आतंकी संगठन को मजबूत करना शुरू कर दिया था।
सूत्रों के मुताबिक आतिफ और उसके साथियों से भोपाल और लखनऊ में कई जांच एजेंसियों ने पूछताछ की। एक जांच एजेंसी केसूत्रों के मुताबिक आरोपियों में से दो ने बताया कि आतिफ के साथ वे आईएसआईएस के सरगना बगदादी से मिलने की फिराक में थे। इसके लिए पाकिस्तान के रास्ते बगदाद जाने का प्लान बनाया था। आतिफ ने साथियों संग पाकिस्तान के एक शख्स की मदद से बॉर्डर पार करने का प्रयास किया था। इसके लिए वे लोग पिछले साल एक-दो बार नहीं, पांच बार कश्मीर गए थे।
बॉर्डर पर भारतीय सेना की मुस्तैदी के चलते पाकिस्तानी ने हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद वे लोग कानपुर लौट आए थे। तब से आईएसआईएस के आतिफ ने कानपुर-लखनऊ के खुरासान मॉड्यूल को मजबूत करना शुरू कर दिया था। उसने कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, फतेहपुर, इटावा, एटा, लखनऊ और आसपास के जिलों के युवकों को धर्म के नाम पर गुमराह करने के लिए खुरासान मॉड्यूल से जोड़ लिया था। सूत्रों की मानें तो आईएसआईएस के कानपुर-लखनऊ के खुरासान मॉड्यूल से जुड़े 10-12 और लोगों का पता चला है। इनमें से दो लापता हैं। बाकी से जांच एजेंसियों ने पूछताछ की है। परिजनों से भी युवकों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है।
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एमपी जाकर एटीएस ने पूछताछ की
सूत्रों की मानें तो एटीएस की टीम ने एमपी जाकर आतिफ, उसके साथी दानिश से पूछताछ की है। इनसे महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिन पर एटीएस काम कर रही है। कई संदिग्धों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। एटीएस को यह भी पता चला है कि आतिफ ने आतंकी संगठन का जाल फैलाने के लिए खुद को परिवार से लगभग अलग कर लिया था।
पत्रिका छापने की तैयारी थी
आतिफ ने आईएसआईएस के कानपुर-लखनऊ के खुरासान मॉड्यूल का संदेश ग्रुप के लोगों तक पहुंचाने के लिए पत्रिका छापने की तैयारी की थी। इसका मैटर भी लगभग तैयार हो गया था। जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पत्रिका में संगठन का मकसद और किस तरह देश में तबाही फैलाई जाए, इसे प्रकाशित करना था।
रिटायर्ड प्रिंसिपल की हत्या की वजह तलाश रही एटीएस
24 अक्टूबर को चकेरी में रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश चंद्र शुक्ला की हत्या आतिफ और उसके साथियों ने दहशत फैलाने या इसके पीछे आतंक साजिश थी। इसका पता लगाने में एटीएस जुटी है।
आईएसआईएस के गुर्गों की तलाश में छापेमारी, दो को उठाया
आईएसआईएस के गुर्गों की तलाश में जुटी जांच एजेंसियों और पुलिस ने मंगलवार को भी संयुक्त रूप से शहर के कई स्थानों पर छापेमारी की। दो लोगों को पूछताछ के लिए उठाया है। अफसर छापेमारी की बात से इनकार कर रहे हैं। मंगलवार को बेकनगंज, कल्याणपुर, कोहना, बजरिया, चमनगंज, बाबूपुरवा, नौबस्ता समेत कई इलाकों में भी छापेमारी की गई। इन जगहों पर पूछताछ करके टीमें लौट गईं।
जांच एजेंसियों की एनजीओ पर नजर
रेल हादसों और आईएसआईएस के कानपुर-लखनऊ के खुरासान मॉड्यूल की मदद करने में पोखरपुर लालबंगला के एक एनजीओ पर जांच एजेंसियों की नजर टिक गई हैं। एनजीओ और उससे जुड़े लोगों को रडार पर लिया गया है। एक अफसर ने इस बात की पुष्टि की है।
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सूत्रों के मुताबिक आतिफ और उसके साथियों से भोपाल और लखनऊ में कई जांच एजेंसियों ने पूछताछ की। एक जांच एजेंसी केसूत्रों के मुताबिक आरोपियों में से दो ने बताया कि आतिफ के साथ वे आईएसआईएस के सरगना बगदादी से मिलने की फिराक में थे। इसके लिए पाकिस्तान के रास्ते बगदाद जाने का प्लान बनाया था। आतिफ ने साथियों संग पाकिस्तान के एक शख्स की मदद से बॉर्डर पार करने का प्रयास किया था। इसके लिए वे लोग पिछले साल एक-दो बार नहीं, पांच बार कश्मीर गए थे।
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बॉर्डर पर भारतीय सेना की मुस्तैदी के चलते पाकिस्तानी ने हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद वे लोग कानपुर लौट आए थे। तब से आईएसआईएस के आतिफ ने कानपुर-लखनऊ के खुरासान मॉड्यूल को मजबूत करना शुरू कर दिया था। उसने कानपुर, लखनऊ, उन्नाव, फतेहपुर, इटावा, एटा, लखनऊ और आसपास के जिलों के युवकों को धर्म के नाम पर गुमराह करने के लिए खुरासान मॉड्यूल से जोड़ लिया था। सूत्रों की मानें तो आईएसआईएस के कानपुर-लखनऊ के खुरासान मॉड्यूल से जुड़े 10-12 और लोगों का पता चला है। इनमें से दो लापता हैं। बाकी से जांच एजेंसियों ने पूछताछ की है। परिजनों से भी युवकों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है।
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एमपी जाकर एटीएस ने पूछताछ की
सूत्रों की मानें तो एटीएस की टीम ने एमपी जाकर आतिफ, उसके साथी दानिश से पूछताछ की है। इनसे महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिन पर एटीएस काम कर रही है। कई संदिग्धों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। एटीएस को यह भी पता चला है कि आतिफ ने आतंकी संगठन का जाल फैलाने के लिए खुद को परिवार से लगभग अलग कर लिया था।
पत्रिका छापने की तैयारी थी
आतिफ ने आईएसआईएस के कानपुर-लखनऊ के खुरासान मॉड्यूल का संदेश ग्रुप के लोगों तक पहुंचाने के लिए पत्रिका छापने की तैयारी की थी। इसका मैटर भी लगभग तैयार हो गया था। जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पत्रिका में संगठन का मकसद और किस तरह देश में तबाही फैलाई जाए, इसे प्रकाशित करना था।
रिटायर्ड प्रिंसिपल की हत्या की वजह तलाश रही एटीएस
24 अक्टूबर को चकेरी में रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश चंद्र शुक्ला की हत्या आतिफ और उसके साथियों ने दहशत फैलाने या इसके पीछे आतंक साजिश थी। इसका पता लगाने में एटीएस जुटी है।
आईएसआईएस के गुर्गों की तलाश में छापेमारी, दो को उठाया
आईएसआईएस के गुर्गों की तलाश में जुटी जांच एजेंसियों और पुलिस ने मंगलवार को भी संयुक्त रूप से शहर के कई स्थानों पर छापेमारी की। दो लोगों को पूछताछ के लिए उठाया है। अफसर छापेमारी की बात से इनकार कर रहे हैं। मंगलवार को बेकनगंज, कल्याणपुर, कोहना, बजरिया, चमनगंज, बाबूपुरवा, नौबस्ता समेत कई इलाकों में भी छापेमारी की गई। इन जगहों पर पूछताछ करके टीमें लौट गईं।
जांच एजेंसियों की एनजीओ पर नजर
रेल हादसों और आईएसआईएस के कानपुर-लखनऊ के खुरासान मॉड्यूल की मदद करने में पोखरपुर लालबंगला के एक एनजीओ पर जांच एजेंसियों की नजर टिक गई हैं। एनजीओ और उससे जुड़े लोगों को रडार पर लिया गया है। एक अफसर ने इस बात की पुष्टि की है।