डकैतों के सफाए में फिर मुफीद साबित हुआ बरसाती मौसम
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1970 के दशक से पाठा डकैतों की सल्तनत बन गया। यहां का पहला बेताज बादशाह दस्यु ददुआ रहा। तीन दशक तक कहर ढाया। अंतत: जुलाई माह उसके लिए मौत का परवाना लेकर आया। बारिश से चौतरफा हरे-भरे पाठा के झलमल जंगल (मानिकपुर) में 21 जुलाई 2007 को एसटीएफ ने ददुआ को उसके 10 साथियों समेत मार गिराया। ददुआ पर पांच लाख इनाम था। जुलाई माह में ही छह लाख का इनामी डकैत सुदेश पटेल उर्फ बलखड़िया मारा गया। उसे पुलिस ने पिछले वर्ष 7 जुलाई 2016 को मार गिराया।
इसी तरह बारिश के ही महीने अगस्त में भी कई कुख्यात डकैतों का सफाया हुआ। 5 अगस्त 2008 को साढ़े 7 लाख का कुख्यात दस्यु सरगना अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया मारा गया। पाठा का एक और खतरनाक दस्यु सरगना सुंदर पटेल उर्फ रागिया की मौत भी अगस्त माह में हुई। उसे पुलिस ने 12 अगस्त 2012 को मारा। डकैत राजकरन पटेल उर्फ चच्चू 16 अगस्त 2006 और नंगू सिंह उर्फ इंद्रजीत सिंह 8 अगस्त 2006 को मारा गया। अब ताजे मामले में एक लाख का इनामी डकैत गोप्पा को एसटीएफ ने चित्रकूट जनपद के रैपुरा थाना क्षेत्र में जिंदा दबोच लिया।
दूसरी तरफ छह एसटीएफ जवानों की डकैतों द्वारा सामूहिक हत्या भी इसी मौसम में हुई। ठोकिया गिरोह ने 23 जुलाई 2007 को फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन तिराहे पर आधी रात को कांबिंग से लौट रहे एसटीएफ जवानों के वाहन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। छह जवान शहीद हो गए। उनके साथ एक मुखबिर भी मारा गया। पांच अन्य जवान घायल हो गए थे। 17 जुलाई 2003 को ठोकिया ने बगहिया पुरवा (चित्रकूट) में दो बच्चों समेत आधा दर्जन लोगों की हत्या कर पुरवा में आग लगा दी थी। डकैत बलखड़िया और बबुली कोल ने 7 अगस्त 2011 को डोड़ामाफी (चित्रकूट) में पांच लोगों की हत्या की थी।
-इसी मौसम में ददुआ-ठोकिया जैसे डकैतों का भी हुआ सफाया
-जुलाई के शुरू में ही ‘अमर उजाला’ ने याद दिलाई थी यह बात
-डाकू गोप्पा की गिरफ्तारी ने इस बात पर फिर लगाई मुहर