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एक समय का खाना खाकर की गुजर बसर, घर जाकर भरपेट खाएंगे खाना
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खबर दिव्यांश सिंह, फोटो धीरेंद्र जी के पास है। एक समय का खाना खाकर की गुजर बसर, घर जाकर भरपेट खाएंगे खाना - जिला प्रशासन ने गैर जनपद निवासी 1100 से ज्यादा छात्र छात्राओं को रोडवेज बसों के माध्यम से भेजा उनके घर - छात्र छात्राओं के चेहरे पर दिखी घर जाने की खुशी, बोले अब कोचिंग पढ़ने नहीं, सीधा एग्जाम देने आएंगे कानपुर संवाद न्यूज एजेंसी कानपुर। राजस्थान के कोटा कोचिंग मंडी के बाद कानपुर की काकादेव कोचिंग मंडी से छात्र छात्राओं को उनके घर भेजने की कवायद तेज हो गई है । लॉकडाउन के दौरान कानपुर में फंसे हुए गैर जनपद निवासी छात्र छात्राओं को सोमवार को जिला प्रशासन ने रोडवेज की बसों से उनके घरों के लिए रवाना किया। शास्त्री नगर सेंट्रल पार्क में सोमवार सुबह सात बजे से छात्र-छात्राओं कि लंबी लंबी लाइनें लगने लगी। स्टूडेंट्स पीठ में बैग हाथ में झोला और चेहरे मुस्कान लिए लाइन में लगे थे । जल्दी से बस का नंबर पता लगे और जाकर अपनी सीट पर बैठ जाएं। जिला प्रशासन ने काकादेव कोचिंग मंडी से तैयार किए गए आंकड़ो, जनसुनवाई पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से छात्र-छात्राओं की लिस्ट बनाकर सेंट्रल पार्क बुलाया था। छात्र छात्राओं ने बातचीत ने बताया हॉस्टल में एक टाइम खाने को मिल रहा था। लॉक डाउन के दिन कैसे गुजारे हैं यह सिर्फ हम जानते हैं। लॉकडाउन खुलने के बाद अब कोचिंग पढ़ने नहीं आएंगे जुलाई में परीक्षा है सीधा परीक्षा देने आएंगे। यह कहना था काकादेव में मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग कर रहे छात्र-छात्राओं का लॉकडाउन में इतनी समस्याएं सह लीं, अब दोबारा कोचिंग पढ़ने आने की हिम्मत नहीं बची है। पार्क के एंट्री पॉइंट पर मेडिकल टीम मौजूद थी। स्टूडेंट्स की थर्मल स्कैनिंग करने के बाद उनको मास्क और सैनिटाइजर दिया जा रहा था। इतनी प्रक्रिया से गुजरने के बाद स्टूडेंट्स को अपने जनपद जाने वाले काउंटर पर जाकर अपना नाम पता नोट कराना था, जिसके बाद उस जिले जाने वाली बस का नंबर पता लगता था और आपको बस में जाकर बैठना था। एसीएम 06 अभिषेक सिंह ने बताया 1100 से ज्यादा छात्र छात्राओं को उनके गृह जनपद भेजा जा रहा है। जनपद वार आठ काउंटर बनाए गए हैं और रोडवेज की 40 जनरथ बसों से छात्र छात्राओं को उनके गृह जनपद भेजा जाएगा। बस के रवाना होते वक्त सभी छात्र छात्राओं को लंच पैकेट और पानी की बोतल रास्ते के लिए दी गई। ऑनलाइन में कुछ ऐसे लोग भी लगे थे जो स्टूडेंट नहीं थे लेकिन वह दूसरे जिले के रहने वाले थे और उनको अपने घर जाना था। ऐसे में जिला प्रशासन ने उनको आश्वासन दिया आने वाले दिनों में जल्द ही उनके लिए भी बसें चलाए जाएंगे उनको भी उनके घर भेजा जाएगा। राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य मुकेश चंद्र आनंद ने बताया उनके संस्थान के कुछ छात्र लोगों में फस गए थे , जिनको बस से उनके घर भेज दिया गया है। सोशल डिस्टेंस इन व्यवस्था हुई धड़ाम हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं की मौजूदगी होगी बात को ध्यान में रखते हुए 4 थानों की फोर्स और सिविल डिफेंस के वालंटियर मौजूद थे। इन सबके बावजूद बस में चढ़ने के दौरान और काउंटर लाइन पर सोशल डिस्टेंस व्यवस्था नाकामयाब होते दिखाई पड़ी। बसों को नहीं किया गया सैनिटाइज शास्त्री नगर सेंट्रल पार्क में खड़ी बसों के चालकों और परिचालकों की अपनी अलग समस्याएं थी। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया बसों को सैनिटाइज नहीं किया गया है। चालक और परिचालक स्वयं ही बस को धोकर ले आए। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कुछ ही परिचालकों और चालकों को मास्क और सैनिटाइजर दिए हैं, सभी को वह भी नहीं मिले। एसी बसों से भेजने को लेकर चर्चा का बाजार रहा गर्म सरकार ने घर और कार के एसी का उपयोग न करने तो बोला है। ऐसे में जनरथ एसी बसों से घर भेजने को लेकर छात्र छात्राओं के बीच चर्चाएं होती रही। विधायक ने बांटा खाने पीने का सामान बसों के रवाना होते वक्त गोविंद नगर विधायक सुरेंद्र मैथानी मौके पर आए । उन्होंने छात्र-छात्राओं और बस के चालक परिचालकों को दालमोट बिस्कुट कोल्ड ड्रिंक आदि चीजों का वितरण किया। इस मौके पर नगर पार्षद दीपक सिंह, शिवांग मिश्रा, अरविंद सिंह और संजय लाल आदि मौजूद रहे। बातचीत आईआईटी की कोचिंग करने कानपुर आई थी। लॉक डाउन के बाद हॉस्टल में केवल पांच लड़कियां रह गई थी। खाने पीने की बहुत समस्या थी कुछ वक्त तो भूखे रहकर काटना पड़ा। अब सीधा एग्जाम देने आऊंगी। स्नेहा गुप्ता, निवासी झांसी कानपुर में मेडिकल प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग करने आया था। लॉकडाउन के बाद हॉस्टल की स्थितियां बहुत बदतर हो गई थी। घर भेजा जा रहा है बहुत खुशी है। एक महीने से भर पेट खाना नहीं खाया है घर जाकर जी भर के खाना खाऊंगा। अनुपम सिंह अनुरागी, निवासी लखीमपुर खीरी नीट मेडिकल परीक्षा की कोचिंग करने कानपुर आई थी । लॉकडाउन के बाद एक टाइम का खाना खा कर गुजर-बसर की है। जनसुनवाई पोर्टल पर घर जाने के लिए आवेदन किया था । आज हम को घर भेजा जा रहा है। अब कोचिंग पढ़ने नहीं आएंगे सीधा पेपर देने आएंगे। नेहा मिश्रा, निवासी अंबेडकर नगर आईआईटी की कोचिंग करने आजमगढ़ से कानपुर आया था। सोचा नहीं था इतना बुरा समय यहां पर देखना पड़ेगा। कभी नाश्ता मिला तो खाना नहीं, खाना मिल गया तो नाश्ता नहीं मिला। घर पहुंच जाएंगे भरपेट खाना तो मिलेगा । जिला प्रशासन को हमारे घर भेज रहा है उसके लिए धन्यवाद। जुलाई में एग्जाम है अब सीधे एग्जाम देने ही आऊंगा। अमन सिंह, निवासी आजमगढ़
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