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डिग्री नहीं रोजगार पाने के लिए करते हैं पढ़ाई, इन विषयों में है छात्रों की ज्यादा रुचि
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 12 Jul 2018 05:00 PM IST
सार
- स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रम की ओर घट रहा विद्यार्थियों का रुझान
- अनुदानित और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में सीटें इस कारण रह गईं खाली
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स्नातक-परास्नातक वर्ग के विषयों को तरजीह न देते हुए अब छात्र-छात्राएं डिप्लोमा कोर्स और रोजगारपरक विषयों की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी से संबद्ध अनुदानित और सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेजों की सीटें अभी तक खाली हैं।
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शिक्षा का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। बीए, बीएएसी करने के बजाय छात्र या तो बीकॉम में दाखिला ले रहे हैं या फिर बीसीए, बीबीए, बीटेक की पढ़ाई में दिलचस्पी ले रहे हैं। एमए, एमएससी का क्रेज तो बिल्कुल खत्म सा हो गया है। यूनिवर्सिटी से संबद्ध करीब 400 अनुदानित और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में दाखिला न होने के कारण स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। करीब 70 फीसदी सीटें खाली पड़ी हैं।
कानपुर विश्वविद्यालय
इस साल दाखिले की तिथि को भी दो बार बढ़ाया जा चुका है। हालांकि जानकारों का मानना है कि प्रवेश तिथि बढ़ाने से संख्या में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। शिक्षाविद् डॉ. एमए नकवी कहते हैं कि पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत है। अब बीए या बीएससी वह करता है जिसे सिविल या बैंक की तैयारी करनी हो। शासन को इस ओर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। बीए, बीएससी तो छोड़िए अब बीटेक की सीटें तक खाली रहने लगी हैं।
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सीटें खाली रहने का मुख्य कारण
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-छात्रों का रोजगारपरक विषयों की ओर झुकाव। बीबीए, बीसीए, डिप्लोमा कोर्स की ओर बढ़ी रुचि।
-शासन की सख्ती के बाद से नकल न होने से काफी संख्या में छात्र-छात्राओं का फेल होना
-परास्नातक वर्ग में प्रवेश के लिए न्यूनतम अर्हता 45 फीसदी होना।
-मूल्यांकन की प्रक्रिया कठिन, दूसरी यूनिवर्सिटी में बेहतर सुविधाएं मिलना।
-सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी।
-शासन की सख्ती के बाद से नकल न होने से काफी संख्या में छात्र-छात्राओं का फेल होना
-परास्नातक वर्ग में प्रवेश के लिए न्यूनतम अर्हता 45 फीसदी होना।
-मूल्यांकन की प्रक्रिया कठिन, दूसरी यूनिवर्सिटी में बेहतर सुविधाएं मिलना।
-सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी।
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यूनिवर्सिटी के कड़े नियमों के चलते छात्र संख्या में गिरावट आई है। नकल न होने से कई छात्र फेल भी हुए हैं। इसकी वजह से भी परास्नातक वर्ग में संख्या कम है।
- डॉ. अनिल कुमार पोरवाल, निदेशक, श्रीराम प्रकाश पोरवाल महाविद्यालय
परास्नातक वर्ग में छात्रों की रुचि कम हुई है। ग्रेजुएट होने के बाद छात्र अब रोजगारपरक विषयों की ओर रुख करते हैं।
-प्रो. बीडी पांडे, प्रवेश प्रभारी पीपीएन
स्टडी ट्रेंड में बड़ा बदलाव आया है। कम फीस अब छात्रों को आकर्षित नहीं करती। प्रवेश लेने के बाद छात्र जानना चाहता है कि उसे कितने का पैकेज मिलेगा। डिप्लोमा कोर्स में छात्रों की रुचि अधिक है।
- राकेश प्रेमी, निदेशक, गौर हरि सिंहानिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट
- डॉ. अनिल कुमार पोरवाल, निदेशक, श्रीराम प्रकाश पोरवाल महाविद्यालय
परास्नातक वर्ग में छात्रों की रुचि कम हुई है। ग्रेजुएट होने के बाद छात्र अब रोजगारपरक विषयों की ओर रुख करते हैं।
-प्रो. बीडी पांडे, प्रवेश प्रभारी पीपीएन
स्टडी ट्रेंड में बड़ा बदलाव आया है। कम फीस अब छात्रों को आकर्षित नहीं करती। प्रवेश लेने के बाद छात्र जानना चाहता है कि उसे कितने का पैकेज मिलेगा। डिप्लोमा कोर्स में छात्रों की रुचि अधिक है।
- राकेश प्रेमी, निदेशक, गौर हरि सिंहानिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट