कानपुर में डेंगू से बैंक कैशियर सहित छह और मरीजों की मौत हो गई। शहर के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कैशियर को 43 यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाई गईं, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। सात लाख का बिल भी बन गया।
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डेंगू का कहर
- फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। कई अन्य मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है। महामारी की तरह फैल रहे डेंगू से अब तक 65 मरीजों की मौत हो चुकी है, लेकिन मामले की भयावहता को न समझते हुए मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉक्टर-कर्मचारी रविवार की छुट्टी मनाते रहे। विभाग पर ताला लगा रहा। उधर, उर्सला अस्पताल की पैथोलॉजी में हुई खून की जांच में 11 और मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई।
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शुक्लागंज निवासी यूनियन बैंक के कैशियर प्रेमचंद्र गुप्ता (35) को बुखार की वजह से 31 अक्तूबर को गोविंद नगर स्थित एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां जांच में उन्हें डेंगू होने की पुष्टि हुई थी। डेंगू शॉक सिंड्रोम का इलाज किया जा रहा था। उन्हें 43 यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाई गई थीं, लेकिन रविवार को तड़के उनकी मौत हो गई। इसी तरह अकबरपुर (कानपुर देहात) निवासी पुत्तन के बेटे रमेश (32) की हैलट में उपचार के दौरान मौत हो गई।
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डॉक्टरों ने बताया कि रमेश को डेंगू की वजह से उसे खून की उल्टियां हो रहीं थीं। लिवर में भी तकलीफ थी। हमीरपुर निवासी मुलिया (65) को डेंगू शॉक सिंड्रोम के साथ सेप्टीसीमिया हो गया था। उन्होंने भी दम तोड़ दिया। तिर्वा (कन्नौज) निवासी संतोष कुमार (50), मल्लावां (हरदोई) निवासी लक्ष्मी सिंह (46), हुसैनगंज (फतेहपुर) निवासी कैलाश नाथ (60) की भी हैलट में इलाज के दौरान मौत हो गई। इन्हें डेंगू जैसे लक्षण थे। मौत की वजह भी डेंगू बताई गई है।
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डेंगू के मरीज लगातार बढ़ने के बावजूद रविवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज माइक्रोबायोलॉजी विभाग में ताला लटकता रहा। एसीएमओ डॉ. एसके सिंह ने बताया कि उर्सला में डेंगू जैसे लक्षणों वाले 93 मरीजों के खून के सैंपलों की जांच हुई, इनमें से 11 मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई।