Sikh Riots: पूर्व पार्षद समेत चार और आरोपी गिरफ्तार, चार घटनाओं का मुख्य आरोपी है कैलाश पाल
कानपुर में वर्ष 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में शहर में 127 सिखों की हत्या की गई थी। इन दंगों की जांच कर रही एसआईटी ने चार घटनाओं के मुख्य आरोपी पूर्व पार्षद कैलाश पाल को दबोचा है।
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कानपुर सिख विरोधी दंगे की जांच में जुटी एसआईटी ने चार घटनाओं के मुख्य आरोपी पूर्व पार्षद कैलाश पाल समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपियों की पहचान नौबस्ता वाई ब्लॉक केडीए मार्केट निवासी राजन लाल पांडेय (85), धीरेंद्र कुमार तिवारी (70), बर्रा विश्वबैंक निवासी दीपक (70) और चार बार पार्षद रहे बी ब्लॉक दबौली निवासी कैलाश पाल (70) के रूप में हुई है।
एसआईटी सिख विरोधी दंगे में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। 31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में शहर में 127 सिखों की हत्या कर दी गई थी, जिसकी जांच एसआईटी कर रही है। एसआईटी डीआईजी बालेंदु भूषण ने बताया कि एसआईटी ने सोमवार देर रात दबौली, किदवई नगर और नौबस्ता में छापा मारा।
यहां से किदवई नगर में हुए डबल मर्डर के तीन आरोपियों राजन लाल पांडेय, दीपक व धीरेंद्र कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया। इसके बाद एसआईटी ने मंगलवार सुबह चार घटनाओं के मुख्य आरोपी रहे बी ब्लॉक दबौली निवासी पूर्व पार्षद कैलाश पाल (70) को गिरफ्तार किया। मंगलवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एसआईटी ने कुछ दिन पहले ही डबल मर्डर में सिद्ध गोपाल गुप्ता और जितेंद्र कुमार तिवारी को जेल भेजा था।
एसआईटी का दावा एक दर्जन सिखों की हत्या में शामिल था कैलाश
सिख विरोधी दंगे के दौरान दबौली के ब्लॉक नंबर 11 में सात हत्याएं हुईं थीं। ई-ब्लॉक में पांच हत्याएं। दबौली प्रथम में दो हत्याएं। के ब्लॉक किदवई नगर में दो हत्याएं हुईं थीं। मरने वालों में विशाख सिंह, उनकी पत्नी सरनकौर, बेटी गुरवचन, बेटा जागेंद्र सिंह, गुरुचरन सिंह, छत्तरपाल सिंह, गुरुमुख सिंह, तेज सिंह, उनके बेटे टीटू सिंह, भगवान सिंह, जगजीत सिंह और उनके बेटे हरचरन सिंह शामिल हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि इन सभी घटनाओं में कांग्रेसी नेता कैलाश पाल का हाथ था। उसने ही भीड़ जमा की और लोगों को हत्याओं के लिए उकसाया। बाद में कैलाश पाल तीन बार कांग्रेस की टिकट पर दबौली से पार्षद भी बना। मृतकों के बचे परिजनों ने उसका नाम मजिस्ट्रेटी बयान में कोर्ट को बताया था, जिसके बाद एसआईटी ने उसे चारों मामलों में आरोपी बनाया। वहीं बाकी के तीन आरोपी मकान मालिक और सेवादार की हत्या में आरोप हैं।
एसआईटी की जांच में 12 मामलों में 96 आरोपियों को चिह्नित किया गया है, जिनमें 73 की गिरफ्तारी होनी है। इनमें से 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। शेष 54 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही है। - बालेंदु भूषण सिंह, डीआईजी एसआईटी
भीड़ को साथ लेकर घुसा था घर में
डीआईजी बालेंदु भूषण के अनुसार कैलाश ने दंगों के दौरान खुद भीड़ का नेतृत्व किया था। आरोप है कि वह भीड़ लेकर एक घर में घुसा था जहां उसने एक ही परिवार के सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद अलग अलग तीन जगहों पर घटना को अंजाम दिया। डीआईजी के मुताबिक इसका नाम चारों घटनाओं में बचे पीड़ितों ने लिया था, जो कि मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान में भी सामने आया। डीआईजी एसआईटी ने सिख विरोधी दंगे में पूर्व पार्षद कैलाश पाल की गिरफ्तारी करने वाली टीम को दस हजार का इनाम देने की घोषणा की है।
पूर्व पार्षद ने कहा, इस उम्र में जेल भेजेंगे क्या
एसआईटी सूत्रों के मुताबिक मंगलवार सुबह जब कैलाश पाल को गिरफ्तार करने के लिए एसआईटी पहुंची तो वह अपने परिजनों का सहारा लेकर बाहर आया। उसे उम्मीद थी कि उसकी हालत देख एसआईटी उसे छोड़ देगी मगर ऐसा हुआ नहीं। जब एसआईटी सदस्य उसे गिरफ्तार करने लगे। तब कैलाश पाल ने कहा कि इस उम्र में इतने पुराने मामले में जेल भेजोगे उससे क्या हासिल हो जाएगा। देख लो जो मदद हो सकती है वह कर दो।
एसपी सिंह बने थाना प्रभारी
डीआईजी एसआईटी ने सब इंस्पेक्टर सूर्य प्रताप सिंह को एसआईटी थाने का प्रभारी बनाया है। इंस्पेक्टर कैलाश पाल के स्थानांतरण के बाद से यह पद खाली चल रहा था। डीआईजी ने बताया कि एसआईटी ने जिन नौ मामलों में चार्जशीट की तैयारी है, उसमें से पांच मामलों की जांच कर सूर्य प्रताप सिंह ने किया था।