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घरों में राशन खत्म, आसपड़ोस से मांगकर बन रहा खाना, पार्षद पति से लगाई मदद की गुहार
Mon, 13 Apr 2020 02:06 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 13 Apr 2020 02:06 AM IST
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लॉकडाउन
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर के नौबस्ता क्षेत्र के वार्ड-22 के मोहल्लों सिद्धार्थ नगर, नई बस्ती, गौतम बुध नगर, दीनदयाल नगर, चुंगी आदि के कई घरों में खाद्यान्न संकट पैदा हो गया है। महिलाएं आसपड़ोस से राशन लेकर खाना बनाने को मजबूर हैं। इनमें से ज्यादातर परिवार मेहनत मजदूरी करके या फिर फुटपाथ पर सामान बेचकर परिवार पालने वाले हैं।
एक अप्रैल के आसपास इन परिवारों को कोटे से सस्ता राशन मिला था, जो कि अब खत्म हो चुका है। इससे पहले बीच में राशन खत्म होता था तो ये परिवार अपनी कमाई से किराने की दुकान से राशन खरीद लेते थे। अब चूंकि ना तो किराने की दुकानें खुल रही हैं और न ही इनका काम चल रहा है।
होम डिलीवरी के जरिये राशन मंगाने की इनकी हैसियत है नहीं। इसी समस्या को लेकर रविवार को दर्जनभर से अधिक महिलाएं रिया, अनीता, शोभा, सावित्री, शांति, रेनू आदि ने स्थानीय पार्षद पति अजय पांडेय को अपनी पीड़ा बताई।
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पार्षद ने उन्हें बताया कि राशन की दुकानों में 15 अप्रैल के बाद खाद्यान्न उपलब्ध होगा। यदि 14 अप्रैल को लॉकडाउन बढ़ता है तो 15 अप्रैल से घर-घर इसकी डिलीवरी करवाई जाएगी। अभी दो-तीन दिन उन्हें अपने स्तर पर ही काम चलाना पड़ेगा। पार्षद पति ने खाने का इंतजाम कराने का आश्वासन जरूर दिया। राशन की उम्मीद पूरी न होने पर महिलाएं निराश होकर लौट गईं।
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एक अप्रैल के आसपास इन परिवारों को कोटे से सस्ता राशन मिला था, जो कि अब खत्म हो चुका है। इससे पहले बीच में राशन खत्म होता था तो ये परिवार अपनी कमाई से किराने की दुकान से राशन खरीद लेते थे। अब चूंकि ना तो किराने की दुकानें खुल रही हैं और न ही इनका काम चल रहा है।
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होम डिलीवरी के जरिये राशन मंगाने की इनकी हैसियत है नहीं। इसी समस्या को लेकर रविवार को दर्जनभर से अधिक महिलाएं रिया, अनीता, शोभा, सावित्री, शांति, रेनू आदि ने स्थानीय पार्षद पति अजय पांडेय को अपनी पीड़ा बताई।
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पार्षद ने उन्हें बताया कि राशन की दुकानों में 15 अप्रैल के बाद खाद्यान्न उपलब्ध होगा। यदि 14 अप्रैल को लॉकडाउन बढ़ता है तो 15 अप्रैल से घर-घर इसकी डिलीवरी करवाई जाएगी। अभी दो-तीन दिन उन्हें अपने स्तर पर ही काम चलाना पड़ेगा। पार्षद पति ने खाने का इंतजाम कराने का आश्वासन जरूर दिया। राशन की उम्मीद पूरी न होने पर महिलाएं निराश होकर लौट गईं।