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जब धमाका सुने का नहीं है तो बम पटाखा फोड़त काहे हौ: राजू श्रीवास्तव

Mon, 12 Nov 2018 12:05 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 12 Nov 2018 12:05 PM IST
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Raju Srivastav is saying about Crackers
राजू श्रीवास्तव
इस दीपावली मा कुछ बुद्धिजीवी टाइप के लोग कहत रहैं कि पटाखे ना फोड़ें.. अउर होली मा भी यही लौझड़ टाइप के सियाने लोग कहत रहैं कि रंग ना खेलो पानी बचाओ.. अब बताओ नंगा का नहाए का निचोड़े..  कसम से जी करत रहा कि अइस बोले वाले का कुर्सी मा बांध के ओके नीचे राकेट अउर बम जलाय दई.. अइसेहे हमरे नील वाली गली के मित्र हैं संतोष.. उनसे कोऊ कहिस कि इ बार दिवाली ध्वनिरहित बिना शोरशराबा किये बिगैर आवाज के मनाओ अउर पर्यावरण बचाओ.. तो ऊ टोपा तुरंतै आपन पत्नी का तैयार करवाइस अउर ओका मायके छोड़ आवा.. कहिस ना रही बांस ना बजी बांसुरी..

 
Raju Srivastav is saying about Crackers
राजू श्रीवास्तव
अइसेहे हटिया वाले हमाय गुड्डू दीपावली वाले दिन बइठे दारु पियत रहे तो उनकी पत्नी बिर्झाय गयी.. उनसे कहे लगी तुमका सरम नाही आवत.. त्यौहार वाले दिन बइठे शराब पियत हौ.. तोका पाप लगी पाप.. तो उई बकलोल कहे कि हम तो मजबूरी मा शराब पियत हन.. अरे जब शराब पीके बोतल खाली करब.. तबहीं तो ई बच्चा लोगन का रॉकेट चलाय खातिर खाली बोतल मिली.. इसलिए पियत हन..
Raju Srivastav is saying about Crackers
राजू श्रीवास्तव
अच्छा एक अउर मजेदार किस्सा भवा रहा.. दीपावली वाले दिना हमरे मोहल्ले मा कनौजिया अईस तबियत से कूटे गए कि तबहीं से तीन कलर मा मूत रहे हैं.. हुआ यूँ कि कनौजिया आपन पडोसी रामखिलावन के उप्पर बम फेंक दिहिन.. अउर बम फेंक के कहिन बुरा ना मानौ दिवाली है.. सब पकड़ के उनका मारिन तो कहे लाग कि यहू होली मा हमरे उप्पर रंग फेंक के कहिस रहै कि बुरा न मानौ होली है.. तो खूब थुरे गए.. बताओ अईस अईस बुद्धि च्यवनप्राश घूमि रहे हैं...
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Raju Srivastav is saying about Crackers
राजू श्रीवास्तव
अच्छा मुंबई केर दिवाली बड़ी व्यवस्थित रहत है.. लोग आपन आपन काम धंधा निपटाय के पूजा करि के फिर बाहर इकठ्ठा होत है फिर आतिशबाजी होत है.. उन लोगन का देख के उई दिन पता चलत है कि यहू लोग हमाय साथै यही बिल्डिंग मा रहत हैं.. काहे से बाकी पूरे साल तो कोऊ दिखत नाहीं है.. सब पैसा कमाए मा लगे रहत हैं.. खाली त्यौहार-त्यौहार मिलाई होत है.. अच्छा मुंबई मा आतिशबाजी होत है.. मगर टाइम देख के दस बजे सब आपन आपन घरन मा वापस घुस जात है.. अपने कानपूर मा अईस कुछु नाहीं होत है.. कौनो रोके टोके वाला नाहीं ना.. जी भरि के राकेट छोड़ो.. पटाके छोड़ो.. वइसे हमरी सलाह है कि पटा-के छोड़े का नाही चाही.. अरे पटाये हौ तो साथ निभाओ उस से शादी करौ.. पटा-के छोडो मत.. अउर कुछ लोगन के लिए तो दीपावली का मतलब है जुआ-वली.. ई लोग जम के जुआ खेलत हैं..
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Raju Srivastav is saying about Crackers
राजू श्रीवास्तव
तब चायनीज वाली लड़ी आवत नहीं रहें.. बड़ी बड़ी मनका वाली लाइट केर झालर होत रही.. अइसेहे एक बार दिवाली पे झालर लगवाए खातिर इलेक्ट्रिशियन का ढूँढा जात रहा.. तो उई आय के कहिस कि चच्चा एतना लेट काम बताय रहे हौ.. अभीन हमका विधायक जी का बंगला सजावे का है.. मानिक बाबू केर पूरी बिल्डिंग सजावे का है.. बहुत बयाना है चच्चा ई बार हमसे ना होई..  हम उई झालर का सही करे के चक्कर मा दुई तीन बार बिजली केर झटकौ खाय गयेन.. बचपन मा हम आपन पिताजी के साथ पटाखा लै जात रहे.. डलिया भर भर के पटाखा खरीदा जात रहा.. डोरा वाली रेलगाड़ी.. टिकिया वाला सांप.. सीको अउर ना जाने का का..  जब हम छोट रहन तो हर दीपावली मा हमार पिताजी हमका मेला ले जाय के फोटू खिंचवावत रहे.. काहे से नए नए कपडा मा सबै सुन्दर लगत हैं.. (झूठ काहे बोलि हमहूँ सुन्दर लगत रहेन).. फिर मेला मा चाट पकौड़ी.. झूला मस्ती.. रिश्तेदारन के हिंया लई जात रहें.. बहुत मजा आवत रहा.. 
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