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Kanpur News: इसरो के वैज्ञानिकों की देखरेख में उड़ान भरेगा पीएसआईटी का राकेट त्रिशूल
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ग्रेटर नोएडा की प्रदर्शनी में पीएसआईटी के छात्र और शिक्षक।
- फोटो : संस्थान
कानपुर। पीएसआईटी के छात्रों ने अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने वाला ऐसा राकेट तैयार किया है जो काम पूरा होने के बाद लौट आएगा। इसको दोबारा उड़ान भरने के लिए तैयार किया जा सकेगा। संस्थान का रॉकेट त्रिशूल अक्तूबर में इसरो के वैज्ञानिकों की देखरेख में कुशीनगर से उड़ान भरेगा।
यह जानकारी पीएसआईटी के ग्रुप निदेशक डॉ. मनमोहन शुक्ला ने दी। रॉकेट संस्थान के स्टार्टअप रमन रिसर्च एंड इनोवेशन ने विकसित किया है। ग्रेटर नोएडा में चल रही तीन दिवसीय भारत शिक्षा एक्सपो में भी त्रिशूल ने लोगों को आकर्षित किया।
एक्सपो के लिए इस स्टार्टअप का चयन डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) इनोवेशन हब की ओर से किया गया। स्टार्टअप इंक्यूबेशन फाउंडेशन के डीन डॉ. रघुराज सिंह ने बताया कि रॉकेट में एक विशेष प्रकार का ब्लैक बॉक्स शामिल किया गया है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में भी रॉकेट के डेटा को सुरक्षित रखेगा।
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किसी कारणवश अगर रॉकेट से संपर्क टूट जाता है तो भी वह मोबाइल पर अपनी जीपीएस लोकेशन भेजेगा। यह रॉकेट इसरो की ओर से विकसित स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम नाविक के माध्यम से संपर्क स्थापित कर अपनी सटीक स्थिति भेजता है।
रॉकेट एक किलो तक के पेलोड को एक से पांच किमी की ऊंचाई तक ले जाने में सक्षम है। संस्थान के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने स्टार्टअप को बधाई दी। कहा, युवा पीढ़ी नवाचार और तकनीक में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।
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यह जानकारी पीएसआईटी के ग्रुप निदेशक डॉ. मनमोहन शुक्ला ने दी। रॉकेट संस्थान के स्टार्टअप रमन रिसर्च एंड इनोवेशन ने विकसित किया है। ग्रेटर नोएडा में चल रही तीन दिवसीय भारत शिक्षा एक्सपो में भी त्रिशूल ने लोगों को आकर्षित किया।
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एक्सपो के लिए इस स्टार्टअप का चयन डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) इनोवेशन हब की ओर से किया गया। स्टार्टअप इंक्यूबेशन फाउंडेशन के डीन डॉ. रघुराज सिंह ने बताया कि रॉकेट में एक विशेष प्रकार का ब्लैक बॉक्स शामिल किया गया है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में भी रॉकेट के डेटा को सुरक्षित रखेगा।
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किसी कारणवश अगर रॉकेट से संपर्क टूट जाता है तो भी वह मोबाइल पर अपनी जीपीएस लोकेशन भेजेगा। यह रॉकेट इसरो की ओर से विकसित स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम नाविक के माध्यम से संपर्क स्थापित कर अपनी सटीक स्थिति भेजता है।
रॉकेट एक किलो तक के पेलोड को एक से पांच किमी की ऊंचाई तक ले जाने में सक्षम है। संस्थान के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने स्टार्टअप को बधाई दी। कहा, युवा पीढ़ी नवाचार और तकनीक में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।