Kanpur: नए सॉफ्टवेयर से सुसज्जित होगी पीआरवी, AI सिस्टम विकसित करने पर भी हो रहा है काम…पकड़े जाएंगे शातिर
Kanpur News: आईआईटी और कमिश्नरी पुलिस के विशेषज्ञ कई साल के अपराध के डाटा का विश्लेषण करेंगे। इनमें चोरी, लूट, टप्पेबाजी, हत्या, छेड़छाड़ और जाम शामिल है। पुलिस, विभिन्न त्योहार और आयोजनों के समय होने वाले बवाल का डाटा भी अध्ययन कराएगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर कमिश्नरी पुलिस अपने डॉयल 112 वाहनों (पीआरवी) को नए साफ्टवेयर से सुसज्जित करने की तैयारी में है। इनमें कई नए तरीके के सॉफ्टवेयर लगाए जाएंगे। इनकी मदद से संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अपराध होने की संभावना पर गश्त बढाया जाएगा। यह साफ्टवेयर आईआईटी कानपुर की मदद से लगाने की तैयारी है।
इससे पूर्व पुलिस और आईआईटी के विशेषज्ञ पिछले कई वर्षों में हुए अपराधों के आधार पर शोध करेंगे। इनको एआई और मैथमेटिकल माडलिंग के आधार पर विकसित किया जाएगा। यह काम मार्च से शुरू होने की उम्मीद है। दो साल में सिस्टम तैयार करने की योजना है। शहर और ग्रामीणों के विभिन्न स्थानों पर पीआरवी की तैनाती हो रही है।
एआई सिस्टम विकसित करने पर हो रहा है काम
यह हादसा होने, विवाद या जाम की समस्या आने पर भी डॉयल 112 के कर्मचारी जाकर फौरन कर कार्रवाई करते देखे जाते हैं। कई बार अपराधी घटना को अंजाम देकर चले जाते हैं और उनका पता बाद में चलता है। उनको दबोचने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम विकसित करने पर काम किया जा रहा है।
सटीक लोकेशन पर खड़ा करना होगा आसान
यह सिस्टम आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जाएगा। इनके जरिए कभी भी कोई भी पुलिसकर्मी संदिग्ध और संवेदनशील व्यक्तियों के डेटा को खंगालकर तत्काल दबोच सकेगा। इतना ही नहीं यह सिस्टम अपराध होने वाले क्षेत्र की संभावना भी बताएएगा। इससे पीआरवी वाहन को सटीक लोकेशन पर खड़ा करना आसान होगा।
जाम वाली सड़क के पास तैनात की जाएगी पीआरवी
कमिश्नरी पुलिस और आईआईटी के बीच पिछले दिनों एमओयू साइन हुआ है। इसके नोडल अफसर डीसीपी साउथ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि एआई तकनीक की मदद से जाम से निपटने में मदद मिलेगी। पीआरवी को जाम वाली सड़क के पास तैनात किया जाएगा। यदि कहीं जाम लगने की आशंका हुई तो उसको ठीक किया जाएगा।
कई साल के डाटा का होगा विश्लेषण
आईआईटी और कमिश्नरी पुलिस के विशेषज्ञ कई साल के अपराध के डाटा का विश्लेषण करेंगे। इनमें चोरी, लूट, टप्पेबाजी, हत्या, छेड़छाड़ और जाम शामिल है। पुलिस, विभिन्न त्योहार और आयोजनों के समय होने वाले बवाल का डाटा भी अध्ययन कराएगी। इससे अगले कई वर्ष तक उसके होने या न होने की जानकारी मिल जाएगी।