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शहर का होनहार अमेरिका में ‘लीडर’
नीरज दीक्षित, कानपुर
Updated Sun, 03 Jan 2016 01:47 AM IST
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अमेरिका में इलाज इतना हाईटेक है कि वहां हेल्थ केयर कंपनियां अपने मरीजों का पूरा डाटा अपने पास रखती हैं और जब कभी किसी को कोई बीमारी होती है और वह अस्पताल पहुंचता है तो कंपनी के कर्मचारी डॉक्टर को उस व्यक्ति की पूरी कुंडली बता देते हैं।
इससे इलाज आसानी से हो जाता है और फालतू की जांचों का पैसा बचता है। ऐसी ही एक अमेरिकन कंपनी ‘प्लानटर’ के इंचार्ज बर्रा शास्त्री चौक निवासी अपूर्व अग्रवाल हैं।
वहां अपूर्व के नेतृत्व में दुनिया भर से आए 25 कुशल डॉक्टर और टेक्नीशियन काम कर रहे हैं और अपूर्व न सिर्फ उस टीम के हेड हैं, बल्कि टीम में अकेले भारतीय हैं। नया साल मनाने शहर आए अपूर्व ने अपनी सक्सेस स्टोरी ‘अमर उजाला’ से शेयर की।
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डॉक्टर दंपति डॉ एके अग्रवाल और डॉ. मनीषा अग्रवाल के बेटे अपूर्व ने बताया कि वह 2006 में सर पदमपत स्कूल से हाईस्कूल करने के बाद ही सिंगापुर चले गए थे। जहां उन्हें 2008 में मैथ्स ओलंपियाड में सिल्वर मैडल मिला। उसी साल सिंगापुर में ही उन्हें मैनसा का आईक्यू एवार्ड मिला।
उन्होंने 2009 में जनरल कैम्ब्रिज एग्जाम, ए लेबल में जब पूरे सिंगापुर में टॉप किया तो वहां के लोग चकित रह गए, क्योंकि यह सम्मान पाने वाले वे अकेले भारतीय थे। फिर सिंगापुर सरकार ने उन्हें कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप दिलाई।
इसके बाद उन्होंने अमेरिका में कॅरियर की शुरुआत 2013 में की। अपूर्व का कहना है कि यहां के लोगों को भी हेल्थ केयर यूनिट की जरूरत है। वे कुछ समय बाद शहर लौटेंगे तो ऐसी कंपनी या एजेंसी जरूर तैयार करेंगे, जिसके सदस्य यहां के डॉक्टरों को वह टेक्नोलाजी और कम्प्यूटर डाटा उपलब्ध कराएंगे, जिससे उन्हें मरीज के इलाज में आसानी होगी।
क्योंकि कभी-कभी अनुभवी डॉक्टर भी अपने मरीज की किसी छोटी सी समस्या को गंभीरता से नहीं ले पाता और आगे चलकर वही समस्या गंभीर मर्ज का रूप ले लेती है। हम यहां के डॉक्टरों को मरीज की बीमारी का पूरा डाटा देंगे। इसके अलावा अमेरिकी की तर्ज पर एक अत्याधुनिक अस्पताल भी शहर में खोलने का सपना है।
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इससे इलाज आसानी से हो जाता है और फालतू की जांचों का पैसा बचता है। ऐसी ही एक अमेरिकन कंपनी ‘प्लानटर’ के इंचार्ज बर्रा शास्त्री चौक निवासी अपूर्व अग्रवाल हैं।
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वहां अपूर्व के नेतृत्व में दुनिया भर से आए 25 कुशल डॉक्टर और टेक्नीशियन काम कर रहे हैं और अपूर्व न सिर्फ उस टीम के हेड हैं, बल्कि टीम में अकेले भारतीय हैं। नया साल मनाने शहर आए अपूर्व ने अपनी सक्सेस स्टोरी ‘अमर उजाला’ से शेयर की।
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डॉक्टर दंपति डॉ एके अग्रवाल और डॉ. मनीषा अग्रवाल के बेटे अपूर्व ने बताया कि वह 2006 में सर पदमपत स्कूल से हाईस्कूल करने के बाद ही सिंगापुर चले गए थे। जहां उन्हें 2008 में मैथ्स ओलंपियाड में सिल्वर मैडल मिला। उसी साल सिंगापुर में ही उन्हें मैनसा का आईक्यू एवार्ड मिला।
उन्होंने 2009 में जनरल कैम्ब्रिज एग्जाम, ए लेबल में जब पूरे सिंगापुर में टॉप किया तो वहां के लोग चकित रह गए, क्योंकि यह सम्मान पाने वाले वे अकेले भारतीय थे। फिर सिंगापुर सरकार ने उन्हें कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप दिलाई।
इसके बाद उन्होंने अमेरिका में कॅरियर की शुरुआत 2013 में की। अपूर्व का कहना है कि यहां के लोगों को भी हेल्थ केयर यूनिट की जरूरत है। वे कुछ समय बाद शहर लौटेंगे तो ऐसी कंपनी या एजेंसी जरूर तैयार करेंगे, जिसके सदस्य यहां के डॉक्टरों को वह टेक्नोलाजी और कम्प्यूटर डाटा उपलब्ध कराएंगे, जिससे उन्हें मरीज के इलाज में आसानी होगी।
क्योंकि कभी-कभी अनुभवी डॉक्टर भी अपने मरीज की किसी छोटी सी समस्या को गंभीरता से नहीं ले पाता और आगे चलकर वही समस्या गंभीर मर्ज का रूप ले लेती है। हम यहां के डॉक्टरों को मरीज की बीमारी का पूरा डाटा देंगे। इसके अलावा अमेरिकी की तर्ज पर एक अत्याधुनिक अस्पताल भी शहर में खोलने का सपना है।