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Kanpur News: ठीक नहीं हो रहे घावों को भरकर अंग को कटने से बचाया

Wed, 05 Nov 2025 02:35 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 05 Nov 2025 02:35 AM IST
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Preventing amputation by healing non-healing wounds
कानपुर। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड पीजीआई के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) विभाग में ठीक न होने वाले घावों को भरकर अंग कटने से बचा लिए गए। विभाग ने छह महीने के अंदर 10 रोगियों का इलाज किया। रोगियों का ब्योरा तैयार किया गया है। इसके पहले रोगियों ने जिन डॉक्टरों को दिखाया था, उन्होंने घावों की सर्जरी ही उपाय बताया था।
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पीएमआर विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष सचदेवा ने बताया कि ये रोगी नॉनहीलिंग अल्सर, सेकेंडरी मेनिंगोमाइले, स्पाइनाबिफिडा सिरिंगोमाइलिया, सेरेब्रल पाल्सी, ट्रॉमेटिक स्पाइनलकॉर्ड इंजरी वाले थे। इनका सफलतापूर्वक इलाज किया गया। रोगियों के अंगों की संवेदना खत्म हो गई थी। इससे घाव भर नहीं रहे थे। उन्होंने बताया कि इस तरह घावों से गैंगरीन हो सकती है जिससे रोगी का अंग काटना पड़ता है। इसमें सामान्य तकनीक अपनाकर घावों की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाई गई।
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रोगी के घावों में दो सप्ताह में सुधार आने लगा और चार सप्ताह में रोगी के घाव भर गए। दवाओं के साथ रोगियों को पैराफिन गेज इम्प्रेग्नेटेड ड्रेसिंग जैसी कुछ चीजें विभाग में ही उपलब्ध कराई गईं। न भरने वाले अल्सर में संक्रमण, अंग-विच्छेदन की स्थिति और कई अन्य जटिलताएं होती हैं। रोगी को उसी स्थान पर बार-बार अल्सर होने लगता है जहां यह पहले ठीक हो चुका होता है। ऐसे रोगियों की मानसिक स्थिति पर भी असर आता है। वे बहुत जल्दी क्रोधित हो जाते हैं और अगर ठीक से ध्यान न दिया जाए तो खुद को या दूसरों को चोट पहुंचा सकते हैं।
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इस तकनीक से किया इलाज

घावों में आमतौर पर सेलाइन सॉल्युशन की पट्टी रखी गई। इसके बाद मोम के पैड का इस्तेमाल किया गया। सिल्वर वाली मलहम लगाई गई। घाव पहले पीला था, इसका बाद पिंक होकर ठीक हुआ। सेलाइन सॉल्युशन से घाव की कोशिकाओं को ऑक्सीजन मिलती है। इससे वे सुधरने लगती है। खराब होने वाली कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। मोम पैड, मलहम से सुधार प्रक्रिया तेज हो जाती है।



-डॉ. आशीष सचदेवा
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