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सब्जी विक्रेता ने दी जान: मंडी में चलती है पुलिस की वसूली, दलालों से कराते हैं ये काम; विरोध पर होता ऐसा अंजाम
Wed, 15 May 2024 02:35 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 15 May 2024 02:35 PM IST
सार
कानपुर में चकरपुर मंडी चौकी प्रभारी और सिपाही पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर सब्जी विक्रेता ने खुदकुशी कर ली। आरोप है कि पुलिस वाले बोरे में सब्जी भर ले जाते थे। पैसे भी छीन लेते थे। अब पांच लाख रुपये मांग रहे थे।
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सब्जी विक्रेता ने की खुदकुशी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर की चकरपुर मंडी में पुलिस का वसूली का पूरा रैकेट चलता है। इसमें चकरपुर मंडी ही नहीं थाने के भी कई वर्दी वाले शामिल है। सब्जी वसूली से पैसा वसूली तक का पूरा खेल दलालों और सिपाहियों के जरिए इतनी सफाई से चलता है कि कोई मामला सामने आता है तो पुलिस को साक्ष्य नहीं मिल पाता है।
मंडी के व्यापारियों का कहना है कि पुलिस वाले आए दिन बोरा और झोला लेकर आते हैं और फ्री में सब्जी भरकर ले जाते है। पैसा भी वसूलते हैं। यदि किसी ने विरोध या आनाकानी की, तो दलालों के माध्यम में किसी का किसी से झगड़ा करा देते है और फिर दबाव बनाकर वहीं कराते हैं, जो वह चाहते हैं।
सुनील की मौत की खबर पाकर मंडी के कई फुटकर सब्जी विक्रेता उनके घर पहुंचे। उन लोगों ने बताया कि सुबह पांच बजे से 10 बजे तक चकरपुर मंडी के कछियाना में फुटकर सब्जी मंडी लगती है। यहां दूर से आए किसान अपनी सब्जी बेच जाते है और वहां सुनील और उसके जैसे तमाम लोग सब्जी बेचते है। जो पैसा बचता है उसे अपने पास रखकर किसान की रकम दे दी जाती है।
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इसी बीच पुलिस वाले अपना रैकेट चलाते है। आए दिन पुलिस वाले और उनके जुड़े लोग सब्जी और फल बड़ी मात्रा में इकट्ठा करते हैं। उसके बाद कहां कौन सी बोरी या बोरा भेजना है। इसकी जानकारी चौकी प्रभारी, सिपाही व अन्य पुलिस वालों को ही होती है। इसके बाद सब्जी बोरे और बोरी में भर कर वाहनों से पुलिस वाले और उनके गुर्गे ले जाते हैं, पैसा मांगने पर गाली-गलौज और अंजाम भुगतने की धमकी देते है।
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मंडी के व्यापारियों का कहना है कि पुलिस वाले आए दिन बोरा और झोला लेकर आते हैं और फ्री में सब्जी भरकर ले जाते है। पैसा भी वसूलते हैं। यदि किसी ने विरोध या आनाकानी की, तो दलालों के माध्यम में किसी का किसी से झगड़ा करा देते है और फिर दबाव बनाकर वहीं कराते हैं, जो वह चाहते हैं।
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सुनील की मौत की खबर पाकर मंडी के कई फुटकर सब्जी विक्रेता उनके घर पहुंचे। उन लोगों ने बताया कि सुबह पांच बजे से 10 बजे तक चकरपुर मंडी के कछियाना में फुटकर सब्जी मंडी लगती है। यहां दूर से आए किसान अपनी सब्जी बेच जाते है और वहां सुनील और उसके जैसे तमाम लोग सब्जी बेचते है। जो पैसा बचता है उसे अपने पास रखकर किसान की रकम दे दी जाती है।
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इसी बीच पुलिस वाले अपना रैकेट चलाते है। आए दिन पुलिस वाले और उनके जुड़े लोग सब्जी और फल बड़ी मात्रा में इकट्ठा करते हैं। उसके बाद कहां कौन सी बोरी या बोरा भेजना है। इसकी जानकारी चौकी प्रभारी, सिपाही व अन्य पुलिस वालों को ही होती है। इसके बाद सब्जी बोरे और बोरी में भर कर वाहनों से पुलिस वाले और उनके गुर्गे ले जाते हैं, पैसा मांगने पर गाली-गलौज और अंजाम भुगतने की धमकी देते है।
एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर किसी व्यापारी या दुकानदार ने चौकी प्रभारी व अन्य पुलिस वालों की मर्जी के मुताबिक सामान व रुपये नहीं दिए, तो उनके गुर्गे सक्रिय हो जाते हैं। वह विरोध करने वाले दुकानदार या व्यापारी को किसी दूसरे से भिड़वा देते थे। फिर शिकायती पत्र लेकर कार्रवाई की धमकी देकर वसूली शुरू कर देते हैं।
पीड़ित थाने जाता है, तो अफसर यह कहकर चलता कर देते हैं कि जाओ अपने स्तर से देख लो, ज्यादा पचड़े में मत पड़ो। अब आखिर वे लोग जाएं तो कहां। न्याय की गुहार लगाए तो किससे। मजबूरी में वहीं करते हैं, जैसा चकरपुर मंडी और सचेंडी थाने के पुलिस वाले चाहते है।
काम पर नहीं गए कस्बे के लोग
सुनील क्या पूरे परिवार का कस्बे के लोगों से अच्छे रिश्ते थे। यही वजह थी कि जिसने भी सुना वह सुनील के घर के सामने पहुंच गया। साथ में काम करने वाले, रोज आने-जाने वाले काम पर नहीं गए। पूरे मोहल्ले में देर शाम तक लोगों का हुजूम लगा रहा। वहीं माता पिता बदहवास हो गए। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि कई महीनों से चौकी प्रभारी सत्येंद्र और सिपाही अजय सुनील व उसके परिवार को परेशान कर रहे थे।
सुनील क्या पूरे परिवार का कस्बे के लोगों से अच्छे रिश्ते थे। यही वजह थी कि जिसने भी सुना वह सुनील के घर के सामने पहुंच गया। साथ में काम करने वाले, रोज आने-जाने वाले काम पर नहीं गए। पूरे मोहल्ले में देर शाम तक लोगों का हुजूम लगा रहा। वहीं माता पिता बदहवास हो गए। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि कई महीनों से चौकी प्रभारी सत्येंद्र और सिपाही अजय सुनील व उसके परिवार को परेशान कर रहे थे।
हिस्ट्रीशीटर भाई की निगरानी के बहाने आते थे
सुनील की मां राजेश्वरी ने बताया कि बड़ा बेटा राजकुमार गलत संगत में पड़ गया। उसके खिलाफ हत्या का प्रयास, मारपीट, आबकारी एक्ट समेत कई मामले पुलिस ने दर्ज किए। उसकी हिस्ट्रीशीट भी खोल दी। इसके बाद उसकी निगरानी के बहाने चौकी प्रभारी सत्येंद्र कुमार यादव और सिपाही अजय कुमार यादव उनके घर आते थे। सुनील और परिवार की महिलाओं से गाली गलौज करते थे। इसका विरोध सुनील करता था, तो जेल भेजने की धमकी देते थे।
सुनील की मां राजेश्वरी ने बताया कि बड़ा बेटा राजकुमार गलत संगत में पड़ गया। उसके खिलाफ हत्या का प्रयास, मारपीट, आबकारी एक्ट समेत कई मामले पुलिस ने दर्ज किए। उसकी हिस्ट्रीशीट भी खोल दी। इसके बाद उसकी निगरानी के बहाने चौकी प्रभारी सत्येंद्र कुमार यादव और सिपाही अजय कुमार यादव उनके घर आते थे। सुनील और परिवार की महिलाओं से गाली गलौज करते थे। इसका विरोध सुनील करता था, तो जेल भेजने की धमकी देते थे।
दरोगा व सिपाही को बचाने का तानाबाना बुना गया
विभाग के दारोगा व सिपाही को कार्रवाई से बचाने का ताना बाना भी पुलिस ने बुन लिया है। एक पुलिस अफसर ने बताया कि दारोगा और सिपाही पर पहला आरोप लगा है कि वह सब्जी मुफ्त में लाता था, लेकिन न तो सत्येंद्र यादव का परिवार यहां रहता है और न ही अजय का परिवार। थाने में भी मेस नहीं चलता है जो वह थाने की मेस के लिए सब्जी लाता। वहीं रुपये छीनने या लेने के साक्ष्य अभी तक सामने नहीं आए हैं। दारोगा और सिपाही दोनों के मोबाइल की सीडीआर चेक की जाएगी।
विभाग के दारोगा व सिपाही को कार्रवाई से बचाने का ताना बाना भी पुलिस ने बुन लिया है। एक पुलिस अफसर ने बताया कि दारोगा और सिपाही पर पहला आरोप लगा है कि वह सब्जी मुफ्त में लाता था, लेकिन न तो सत्येंद्र यादव का परिवार यहां रहता है और न ही अजय का परिवार। थाने में भी मेस नहीं चलता है जो वह थाने की मेस के लिए सब्जी लाता। वहीं रुपये छीनने या लेने के साक्ष्य अभी तक सामने नहीं आए हैं। दारोगा और सिपाही दोनों के मोबाइल की सीडीआर चेक की जाएगी।
वहीं वायरल वीडियो के संबंध में बताया है कि वीडियो के दोनों फ्रेम अलग-अलग है, जो भी आरोप परिवार के है। उन सभी की जांच एसीपी पनकी तेज बहादुर सिंह को सौंपी गई है। वहीं चुनाव ड्यूटी के बाद जब सत्येंद्र और अजय को केस दर्ज होने की जानकारी मिली तो दोनों ने फोन बंद कर लिया है। दोनों की निलंबन की रिपोर्ट बनाकर चुनाव आयोग को भेज दी गई है। मान लिया जाए कि एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों निलंबित हो गए हैं।
आखिर क्यों नहीं होती पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी
कानपुर कमिश्नरेट में ये कोई पहला मामला नहीं जिसमें वर्दी पर दाग लगा हो। इससे पहले भी कई बार खाकी दागदार हो चुकी है। एफआईआर भी दर्ज हुई, सीसीटीवी से फुटेज भी मिले, जांच भी शुरू हो गई लेकिन कभी किसी पुलिस कर्मी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
कानपुर कमिश्नरेट में ये कोई पहला मामला नहीं जिसमें वर्दी पर दाग लगा हो। इससे पहले भी कई बार खाकी दागदार हो चुकी है। एफआईआर भी दर्ज हुई, सीसीटीवी से फुटेज भी मिले, जांच भी शुरू हो गई लेकिन कभी किसी पुलिस कर्मी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
कुछ सेवानिवृत पुलिस अधिकारियों की माने तो नौकरी करते समय सबसे पहले हर पुलिस कर्मी यही सीखता है कि अगर उसके खिलाफ कोई केस दर्ज हो जाता है तो उसे खुद को कैसा बचाना है। इसी ट्रेनिंग की वजह से जांच और विवेचना में उलझता हुआ फैसला आखिर ऐसी जगह पहुंच जाता है, जहां जांच और विवेचना खत्म हो जाती है। किसी दूसरे जिले में ट्रांसफर के बाद तैनाती भी मिल जाती है।
इसका ताजा मामला काकादेव और नवाबगंज थाने के थानेदारों के बीच हुआ गांजा तस्कर की गिरफ्तारी को लेकर हुआ विवाद है। मामले में तत्कालीन काकादेव थाना प्रभारी विनय शर्मा ने नवाबगंज थाना प्रभारी रोहित तिवारी पर गांजा तस्कर के अपहरण का आरोप लगाया था। इसका ऑडियों भी वायरल हुआ था। मामले की जांच के आदेश हुए, लेकिन सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया।
कोहना थाने के एक दरोगा ने स्कूटी सवार युवक को गांजा तस्कर होने के शक में मोतीझील से उठाया। थाने में लेकर उसके साथ मारपीट की। छोड़ने के बदले में 50 हजार रुपये लिए। यह मामला खूब सुर्खियों में रहा, लेकिन जांच के नाम पर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। गोविंद नगर में एसओजी सिपाही बनकर कारोबारी का अपहरण करना, क्राइम ब्रांच में तैनाती के दौरान साइबर हैकर्स की मदद करना, नौबस्ता में पूछताछ के बहाने थाने बुलाकर थर्ड डिग्री देने का मामला समेत लंबी फेरहिस्त है। इन सभी में अफसरों ने अभी तक ऐसी कार्रवाई नहीं की, तो नजीर बन सके।