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विपश्यना केंद्र से मेडिटेशन को जन-जन तक पहुंचा रहे पद्मश्री अशोक साहू, आ चुके हैं राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री
Tue, 26 Jan 2021 01:58 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 26 Jan 2021 01:58 AM IST
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पद्मश्री पुरस्कार
- फोटो : amar ujala
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों की श्रृंखला में सिविल लाइंस निवासी उद्यमी अशोक साहू को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें मेडिटेशन के क्षेत्र में यह पुरस्कार दिया जा रहा है। वह सलेमपुर में ड्योढ़ी घाट रोड स्थित विपश्यना केंद्र के मुख्य ट्रस्टी हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक साल पहले इस केंद्र में आकर उनके कार्य की सराहना कर चुके हैं। इस केंद्र के माध्यम से वह ध्यान, साधना की वैज्ञानिक विधि ‘विपश्यना’ को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। अशोक साहू अपने चारों भाइयों के साथ व्यवसाय संभालते थे।
उनकी रनिया (कानपुर देहात) में एचएल एग्रो के नाम से स्टार्च बनाने की यूनिट है। अन्य व्यवसाय भी हैं। वह बताते हैं कि सन् 2000 में छोटे भाई अवधेश को सिरदर्द हुआ। इलाज से लाभ न मिलने पर उन्होेंने अपने भाई के साथ लखनऊ में विपश्यना के विशेष जिप्सी कैंप (एक तरह के समर कैंप) में 10 दिन का कोर्स किया।
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इससे न सिर्फ भाई का सिरदर्द गायब हो गया, बल्कि उन्हें भी ध्यान-साधना की इस वैज्ञानिक विधि का ज्ञान प्राप्त हो गया। उसी समय दोनों भाइयों ने इस विद्या को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक साल पहले इस केंद्र में आकर उनके कार्य की सराहना कर चुके हैं। इस केंद्र के माध्यम से वह ध्यान, साधना की वैज्ञानिक विधि ‘विपश्यना’ को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। अशोक साहू अपने चारों भाइयों के साथ व्यवसाय संभालते थे।
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उनकी रनिया (कानपुर देहात) में एचएल एग्रो के नाम से स्टार्च बनाने की यूनिट है। अन्य व्यवसाय भी हैं। वह बताते हैं कि सन् 2000 में छोटे भाई अवधेश को सिरदर्द हुआ। इलाज से लाभ न मिलने पर उन्होेंने अपने भाई के साथ लखनऊ में विपश्यना के विशेष जिप्सी कैंप (एक तरह के समर कैंप) में 10 दिन का कोर्स किया।
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इससे न सिर्फ भाई का सिरदर्द गायब हो गया, बल्कि उन्हें भी ध्यान-साधना की इस वैज्ञानिक विधि का ज्ञान प्राप्त हो गया। उसी समय दोनों भाइयों ने इस विद्या को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।