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एचबीटीआई में अब कॉमर्स की भी पढ़ाई
अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 14 Jul 2015 02:02 AM IST
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रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी बनने के बाद एचबीटीआई में बीएससी इन बायोटेक्नोलॉजी, बीकॉम, बीटेक-एमटेक डुएल डिग्री प्रोग्राम और बीएससी-एमएससी डुएल डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई शुरू होगी। इंटरमीडिएट पास करने के बाद ही इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन लिया जा सकेगा। नए कोर्स शैक्षिक सत्र 2016-17 से लांच होंगे।
एचबीटीआई को रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी बनाने का अध्यादेश बनकर तैयार है। प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा मोनिका एस गर्ग इसके सभी बिंदुओं का अध्ययन कर रही हैं। जल्द ही अध्यादेश कैबिनेट मीटिंग में लाया जाएगा, फिर इसे पास कराके यूनिवर्सिटी बनाने का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।
इससे पहले ही प्रमुख सचिव ने कोर्स से संबंधित ब्यौरा तलब कर लिया है। प्रमुख सचिव ने कहा है कि रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी में सिर्फ इंजीनियरिंग या फिर साइंस की पढ़ाई कराना ठीक नहीं है। इसका दायरा बढ़ाने की जरूरत है, ताकि सभी तबके के स्टूडेंटों को अच्छी और गुणवत्ता परक शिक्षा का लाभ मिल सके।
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इसी का नतीजा है कि बोर्ड ऑफ स्टडीज (बीओएस) ने इंजीनियरिंग के साथ ही साइंस और कॉमर्स के कोर्स चलाने का खाका तैयार कर लिया है। एचबीटीआई को जैसे ही यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलेगा, वैसे ही बीएससी, बीकॉम की पढ़ाई शुरू करा दी जाएगी। एचबीटीआई के निदेशक प्रो. एके नागपाल का कहना है कि पहले संबद्धता देने वाली यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव बना था, पर विरोध के बाद इसे रेजीडेंशियल कर दिया गया है।
रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी को सरकार से ज्यादा बजट नहीं मिलता है, ऐसे में आय के स्रोत बढ़ाने पड़ते हैं। इसे लेकर एक कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने बीएससी बायोटेक सहित तमाम कोर्सों की पढ़ाई की संस्तुति की है। अब इसका प्रजेंटेशन प्रमुख सचिव को दिखाया जाएगा। प्रमुख सचिव की अनुमति मिलने के बाद ही नए कोर्स लांच किए जाएंगे। हां, इतना जरूर है कि रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग के साथ ही आर्ट, साइंस और कॉमर्स की पढ़ाई भी कराई जाती है।
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एचबीटीआई को रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी बनाने का अध्यादेश बनकर तैयार है। प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा मोनिका एस गर्ग इसके सभी बिंदुओं का अध्ययन कर रही हैं। जल्द ही अध्यादेश कैबिनेट मीटिंग में लाया जाएगा, फिर इसे पास कराके यूनिवर्सिटी बनाने का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।
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इससे पहले ही प्रमुख सचिव ने कोर्स से संबंधित ब्यौरा तलब कर लिया है। प्रमुख सचिव ने कहा है कि रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी में सिर्फ इंजीनियरिंग या फिर साइंस की पढ़ाई कराना ठीक नहीं है। इसका दायरा बढ़ाने की जरूरत है, ताकि सभी तबके के स्टूडेंटों को अच्छी और गुणवत्ता परक शिक्षा का लाभ मिल सके।
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इसी का नतीजा है कि बोर्ड ऑफ स्टडीज (बीओएस) ने इंजीनियरिंग के साथ ही साइंस और कॉमर्स के कोर्स चलाने का खाका तैयार कर लिया है। एचबीटीआई को जैसे ही यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलेगा, वैसे ही बीएससी, बीकॉम की पढ़ाई शुरू करा दी जाएगी। एचबीटीआई के निदेशक प्रो. एके नागपाल का कहना है कि पहले संबद्धता देने वाली यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव बना था, पर विरोध के बाद इसे रेजीडेंशियल कर दिया गया है।
रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी को सरकार से ज्यादा बजट नहीं मिलता है, ऐसे में आय के स्रोत बढ़ाने पड़ते हैं। इसे लेकर एक कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने बीएससी बायोटेक सहित तमाम कोर्सों की पढ़ाई की संस्तुति की है। अब इसका प्रजेंटेशन प्रमुख सचिव को दिखाया जाएगा। प्रमुख सचिव की अनुमति मिलने के बाद ही नए कोर्स लांच किए जाएंगे। हां, इतना जरूर है कि रेजीडेंशियल यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग के साथ ही आर्ट, साइंस और कॉमर्स की पढ़ाई भी कराई जाती है।