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अब लामबंदी नहीं कर पाएंगे जिलाध्यक्ष पद के दावेदार, भाजपा ने इस बार चुनाव प्रक्रिया में किया बदलाव
Tue, 19 Nov 2019 06:54 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 19 Nov 2019 06:54 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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कानपुर में भाजपा के जिलाध्यक्ष पद के दावेदार अब लामबंदी नहीं कर सकेंगे। पार्टी ने इस बार जिलाध्यक्षों की चुनाव प्रक्रिया में बदलाव किया है। इस बार दावेदारों को प्रस्तावक पार्टी देगी। इससे पूर्व हर दावेदार अपना प्रस्तावक खुद ही तैयार करता था।
अभी तक जो बदलाव किए गए थे, उसमें दावेदार को दो बार का सक्रिय सदस्य होना जरूरी है। साथ ही किसी सरकारी विभाग में ठेकेदार भी नहीं होना चाहिए। बुधवार को नामांकन के दौरान इन सभी बिंदुओं की पदाधिकारियों के माध्यम से जांच की जाएगी। इसके बाद ही नामांकन स्वीकार होगा।
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अभी तक जो बदलाव किए गए थे, उसमें दावेदार को दो बार का सक्रिय सदस्य होना जरूरी है। साथ ही किसी सरकारी विभाग में ठेकेदार भी नहीं होना चाहिए। बुधवार को नामांकन के दौरान इन सभी बिंदुओं की पदाधिकारियों के माध्यम से जांच की जाएगी। इसके बाद ही नामांकन स्वीकार होगा।
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पार्टी की तरफ से प्रस्तावक मिलने की वजह यह बताई जा रही थी कि इससे पहले जितने भी मंडल अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि होते थे, वे किसी ना किसी दावेदार के पक्ष में खुलकर समर्थन करते थे।
ऐसे में पार्टी में आम सहमति बनाने वाली बात झूठी साबित हो जाती थी।
इस बार पार्टी दावेदारों का नामांकन पत्र तो लेगी लेकिन जिलाध्यक्षों का चयन संगठन की तरफ से किया जाएगा। जिससे ऊपर से एक संदेश दिया जा सके कि जिसे भी अध्यक्ष चुना गया है, उसमें सभी की सहमति शामिल है। बुधवार को सिर्फ नामांकन पत्र स्वीकारे जाएंगे। जिलाध्यक्ष की घोषणा किसी अन्य दिन होगी।
ऐसे में पार्टी में आम सहमति बनाने वाली बात झूठी साबित हो जाती थी।
इस बार पार्टी दावेदारों का नामांकन पत्र तो लेगी लेकिन जिलाध्यक्षों का चयन संगठन की तरफ से किया जाएगा। जिससे ऊपर से एक संदेश दिया जा सके कि जिसे भी अध्यक्ष चुना गया है, उसमें सभी की सहमति शामिल है। बुधवार को सिर्फ नामांकन पत्र स्वीकारे जाएंगे। जिलाध्यक्ष की घोषणा किसी अन्य दिन होगी।