कानपुर के शहीद दीपक पांडेय के परिवार का जीवन काफी मुफलिसी भरा रहा। बदहाली के दौर से गुजरकर जब दीपक इस काबिल हुए कि माता-पिता को दुनिया की खुशियां दे सकें, लेकिन वक्त को यह भी रास नहीं आया।
सपनों को पूरा किए बिना ही वह दुनिया को अलविदा कह गए। यह कहना है कि कल्याणपुर में रहने वाले दीपक के पिता के सहकर्मी और मित्र प्रमथेश पांडेय का। उन्होंने बताया कि वह और दीपक के पिता रामप्रकाश पांडेय हिंदुस्तान कामर्शियल बैंक में चार साल तक (कैजुअल) चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रहे।
वर्ष 1986 में बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में मर्जर हो गया। उनके साथ चार लोगों को नौकरी से बाहर कर दिया, जिसमें दीपक के पिता भी थे। इसके बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया।
बेटे की परवरिश के लिए दीपक की मां रमा ने श्याम नगर की एक अगरबत्ती फैक्ट्री में नौकरी कर ली। रामप्रकाश ने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली, लेकिन इसके बावजूद वह हार नहीं मानें।
उनके कहने पर ही वर्ष 1995 में चार लोगों ने पंजाब नेशनल बैंक के खिलाफ वाद (23617/1995) दाखिल किया, जो आज भी विचाराधीन हैं।