Mukhtar Ansari: 24 साल रहे ‘माननीय’, 15 साल से है जेल में...तब नहीं रहा हौव्वा, अब क्यों है सुरक्षा का शोर
Banda News: पूर्व विधायक बाहुबली मुख्तार अंसारी के बांदा जेल में बंद होने के कारण जेल के कई अधिकारी निलंबित हो चुके हैं। मुख्तार 34 माह से जेल में बंद है, तब उसकी सुरक्षा का इतना हौव्वा नहीं था। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद अब सुरक्षा का शोर बढ़ा है।
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विस्तार
बाहुबली पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के लिए बांदा जेल नई नहीं है। योगी सरकार में ही मुख्तार ने करीब 34 माह बांदा जेल में बिताए थे। हालांकि तब जेल में सुरक्षा का इतना हौव्वा नहीं रहा है, जितना अब है। बिकरू कांड के आरोपी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद माफियाओं ने सुरक्षा का शोर किया।
इसके बाद से सुरक्षा पर खास जोर दिया जाने लगा। भाजपा सरकार बड़े अपराधियों और माफियाओं पर शिकंजा कस रही है। बांदा जेल में 30 मार्च 2017 से 21 जनवरी 2020 तक मुख्तार अंसारी बांदा जेल में रहा। कई बार मुकदमों की पेशियों में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में मुख्तार को ले जाया जाता था।
सुरक्षा के नाम पर पुलिस के वज्र वाहन के साथ मात्र एक छोटे चौपहिया वाहन में पुलिस बल जाता था। गिने-चुने पुलिस कर्मी होते थे। कभी कोई बवाल नहीं हुआ। योगी सरकार में ही मुख्तार अंसारी को पंजाब भेजा गया। दो साल पूर्व इसी सरकार की पैरवी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुख्तार को बांदा वापस लाया गया।
कई जेल अधिकारी हो चुके हैं निलंबित
बांदा जेल में दोबारा लाए जाने के बाद जबरदस्त किला बंदी की गई है। जेल के अंदर से लेकर बाहर तक और आसपास इलाके में जबरदस्त चौकसी और पुलिस का पहरा है। मुख्तार से नजदीकी या मैनुअल का पालन न करने पर अधीक्षक समेत कई जेल अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं।
जेल से छूटने और आने वाले बंदियों की छानबीन
बाहुबली मुख्तार अंसारी को लेकर जेल और जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों समेत बॉडी वार्म कैमरों से मुख्तार पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उधर, पिछले एक माह में जेल से जमानत पर रिहा होने वालों का पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है।
पुलिस जुटा रही है खुफिया जानकारी
एक हफ्ते के अंदर किसी भी मामले में जेल आए बंदियों की भी जांच की जा रही है। खुफिया जानकारी भी जुटाई जा रही है। जेल के आसपास और शहर के कुछ इलाकों में बाहरी आदमियों के किराए पर रहने या बसने की भी जांच हो रही है। मुख्तार अंसारी के समर्थक और गुर्गे पिछली बार यहां किराए के मकानों में रहते रहे हैं।
मुख्तार की बैरिक के पास नहीं फटक सकते दूसरे बंदी
मुख्तार की बैरिक के आसपास कड़ी सुरक्षा है। बैरीकेडिंग लगाई गई है, ताकि अन्य बैरिकों के बंदी मुख्तार की बैरिक के पास फटक न सकें। जेल प्रशासन ने यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से उठाया है। सूत्रों के मुताबिक मुख्तार भी अपनी बैरिक से दूसरे स्थान पर नहीं जाते। दिन-रात बैरिक में ही रहकर बिता रहे हैं।
24 साल रहे ‘माननीय’, 15 साल से जेल में
पिछले 24 वर्षों से मुख्तार को लगातार मिला ‘माननीय’ का तमगा 15 वर्षों से जेल के बंदी में बदला हुआ है। सदन (विधान सभा) से कहीं ज्यादा दिन जेल की बैरिकों में बीत रहे हैं। मुख्तार अंसारी पिछले 24 वर्षों से लगातार मऊ विधान सभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधायक चुने जाते रहे हैं।
पांच बार लगातार रहा है विधायक
पहली बार वह 1996 के चुनाव में बसपा टिकट पर चुनाव जीते। उसके बाद हुए पांच चुनावों में वह लगातार विधायक चुने गए। हालांकि 2022 का चुनाव वह नहीं लड़ सके। लेकिन अपने 24 वर्ष के विधायकी काल में पिछले करीब 15 वर्षों से जेल में ही दिन गुजार रहे हैं।
मुख्तार पर दर्ज हैं 52 मुकदमे
विधान सभा से ज्यादा उनका समय जेल के बैरिकों में बीत रहा है। मुख्तार पर 52 मुकदमें बताए गए हैं। गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी मूलरूप से गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं। उनका पैतृक गांव गाजीपुर का यूसुफपुर मोहम्मदाबाद है। लेकिन चुनाव मऊ से जीतते रहे।