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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Monkeys bitten the girl and made her bleed, attacked while sleeping on the roof, people said there is no solut

Etawah: बंदरों ने युवती को काटकर किया लहुलुहान, छत पर सोते समय हुआ हमला, लोग बोले- अब तक नहीं हुआ है समाधान

Thu, 03 Aug 2023 03:53 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 03 Aug 2023 03:53 PM IST
सार

Etawah News: बसरेहर व्यापार मंडल के अध्यक्ष सोनू मिश्रा ने बताया कि कस्बा बसरेहर में एक ओर बंदरों का आतंक है। दूसरी ओर गोवंश के कारण सड़क और गलियों में निकलना तक दूभर हो रहा है।

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Monkeys bitten the girl and made her bleed, attacked while sleeping on the roof, people said there is no solut
बंदरों का आतंक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इटावा जिले में बसरेहर थाना क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बंदर न जाने कितने लोगों को अब तक काट चुके हैं। ताजा उदाहरण किल्ली रोड स्थित बौद्ध बाजार में देखने को मिला। यहां बंदरों के झुंड ने राजू चक की 18 वर्षीय पुत्री सपना को छत पर सोते समय हमला बोलकर घायल कर दिया।  सपना ने बताया कि नींद से जागने पर बंदरों को भगाने के दौरान एक बंदर ने हाथ पर कई बार काट लिया।

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चीख पुकार सुन परिजन छत पर पहुंचे तब तक वह लहू लुहान हो चुकी थी। परिजन युवती को लेकर बसरेहर सीएचसी पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि बसरेहर में बंदरों का आतंक इस कदर है कि इनके झुंड में कस्बाई बस्ती और बाजार कुछ नहीं बचा है। जब भी इन्हें खाना होता है वह छत या सड़क पर जिसे भी देखते हैं उन पर हमला बोलकर उन्हें लहुलुहान कर देते हैं।
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बंदर इस कदर हमला बोलते हैं कि बचाव करने तक का मौका नहीं मिलता। इनका शिकार ज्यादातर बच्चे, महिलाएं व वृद्धजन ही होते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बंदरों की वजह से घर में महीने में दो से तीन हजार का नुकसान हो जाता है। बसरेहर व्यापार मंडल के अध्यक्ष सोनू मिश्रा ने बताया कि कस्बा बसरेहर में एक ओर बंदरों का आतंक है। दूसरी ओर गोवंश के कारण सड़क और गलियों में निकलना तक दूभर हो रहा है।

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अब तक नहीं हुआ है समाधान
 बताया कि बंदर और गोवंश की समस्या को लेकर अधिकारियों को कई बार अवगत कराए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है। बताया कि कुछ दिन पूर्व ही गोवंश के हमले से समाजसेवी रामदास तिवारी की मृत्यु हो गई थी। जबकि बंदरों के हमले की लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं। बंदरों के बढ़ते आतंक की वजह से कपड़े भी खुले में नहीं सुख पा रहे हैं। पता नहीं कब बंदर इन्हें उतार ले जाएं।

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