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Kanpur News: मान रहे थे खांसी-जुकाम, जांच में 40 लोगों में टीबी की पुष्टि
Sun, 21 Jun 2026 01:25 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 21 Jun 2026 01:25 AM IST
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कानपुर देहात। सर्दी, खांसी-जुकाम और निमोनिया का इलाज करा रहे 40 ऐसे लोग मिले जिनमें जांच के दौरान टीबी की पुष्टि हुई। क्षय रोग विभाग के टीबी रोगी खोज अभियान के तहत घर-घर जांच के दौरान लोगों में टीबी की पुष्टि हुई है। अब तक 15 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें से 200 से अधिक संदिग्ध मरीज भी पाए गए हैं। जिनकी रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।
शासन स्तर से स्वास्थ्य विभाग को अमरौधा, राजपुर, सरवनखेड़ा ब्लॉक के हाई रिस्क श्रेणी वाले 264 गांवों की सूची भेजी गई थी। इन गांवों में लोगों को टीबी का रोग होने की आशंका थी। इस पर जिला क्षय रोग विभाग ने 100 दिवसीय अभियान चलाकर कार्य शुरू किया। मोबाइल टीम, क्षय रोग विभाग समेत अन्य टीमों ने गांवों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करने की जिम्मेदारी संभाली।
वहां रहने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। जिले को टीबी मुक्त करने के लिए शुरू किए गए 100 दिवसीय अभियान में अब तक 15000 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसमें से टीबी के 40 नये रोगी मिले। इन्हें स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के इलाज के लिए जरूरी दवाई दी है। इसके अलावा करीब 200 मरीज ऐसे चिह्नित हुए हैं जिनमें क्षय रोग की संभावना है। जिले में अब कुल सक्रिय रोगियों की संख्या करीब 2000 हो गई है। जिनका उपचार चल रहा है। संबंधित आशा वर्कर को उन पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
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केस-1
राजपुर के 45 वर्षीय युवक ने टीम को बताया कि उसे कोरोना के बाद से रुक-रुककर खांसी आती थी। मौसम के बदलाव हाेने पर समस्या बढ़ जाती थी। इस पर वह पास के डॉक्टर से खांसी-जुकाम की दवा लेकर खा रहे थे। एक सप्ताह पहले जांच हुई तो क्षय रोग की समस्या होना बताया गया है। अब डॉक्टर की बताई सलाह के अनुसार दवा खा रहे हैं।
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केस-2
खासबरा निवासी 40 वर्षीय एक महिला ने बताया कि वह खेती-किसानी में परिवार का हाथ बंटाती हैं। उन्हें अक्सर खासी आती रहती थी। बीच-बीच में सर्दी जुकाम भी हो जाता था। इस पर एक क्लीनिक से दवा लेकर खा लेते थे तो आराम मिल जाता था। उन्हें कभी और कोई समस्या भी नहीं हुई। जांच कराई तो टीबी की पुष्टि हुई। डॉक्टर ने जो दवा दी है उसे खा रहे हैं।
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क्या है टीबी वायरस
ट्यूबरक्लोसिस, क्रोनिक संक्रामक संक्रमण है जो एयरबॉर्न बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस के कारण होता है। यह आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन कोई भी अंग इससे प्रभावित हो सकता है। ट्यूबरक्लोसिस मुख्य रूप से तब फैलता है जब लोग एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दूषित की गई हवा में सांस लेते हैं जिसे टीबी है।
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ये हैं लक्षण
- 15 दिन से अधिक खांसी और बुखार
- बलगम में खून आना, भूख में कमी
- वजन कम होना, रात में पसीना आना
- गले में गांठ, बांझपन की समस्या
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अमरौधा, राजपुर व सरवनखेड़ा ब्लॉक के करीब 200 गांवों में तीन टीमों ने पहुंचकर करीब 15 हजार लोगों की स्क्रीनिंग और एक्सरे किए गए। जिसमें टीबी के 40 नये रोगी मिलने पर उनका उपचार शुरू कर दिया गया है। अभी कुछ लोगों की रिपोर्ट आना बाकी है। - डॉ. शलभ मोहन,नोडल अधिकारी/ एसीएमओ
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शासन स्तर से स्वास्थ्य विभाग को अमरौधा, राजपुर, सरवनखेड़ा ब्लॉक के हाई रिस्क श्रेणी वाले 264 गांवों की सूची भेजी गई थी। इन गांवों में लोगों को टीबी का रोग होने की आशंका थी। इस पर जिला क्षय रोग विभाग ने 100 दिवसीय अभियान चलाकर कार्य शुरू किया। मोबाइल टीम, क्षय रोग विभाग समेत अन्य टीमों ने गांवों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करने की जिम्मेदारी संभाली।
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वहां रहने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। जिले को टीबी मुक्त करने के लिए शुरू किए गए 100 दिवसीय अभियान में अब तक 15000 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसमें से टीबी के 40 नये रोगी मिले। इन्हें स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के इलाज के लिए जरूरी दवाई दी है। इसके अलावा करीब 200 मरीज ऐसे चिह्नित हुए हैं जिनमें क्षय रोग की संभावना है। जिले में अब कुल सक्रिय रोगियों की संख्या करीब 2000 हो गई है। जिनका उपचार चल रहा है। संबंधित आशा वर्कर को उन पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
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केस-1
राजपुर के 45 वर्षीय युवक ने टीम को बताया कि उसे कोरोना के बाद से रुक-रुककर खांसी आती थी। मौसम के बदलाव हाेने पर समस्या बढ़ जाती थी। इस पर वह पास के डॉक्टर से खांसी-जुकाम की दवा लेकर खा रहे थे। एक सप्ताह पहले जांच हुई तो क्षय रोग की समस्या होना बताया गया है। अब डॉक्टर की बताई सलाह के अनुसार दवा खा रहे हैं।
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केस-2
खासबरा निवासी 40 वर्षीय एक महिला ने बताया कि वह खेती-किसानी में परिवार का हाथ बंटाती हैं। उन्हें अक्सर खासी आती रहती थी। बीच-बीच में सर्दी जुकाम भी हो जाता था। इस पर एक क्लीनिक से दवा लेकर खा लेते थे तो आराम मिल जाता था। उन्हें कभी और कोई समस्या भी नहीं हुई। जांच कराई तो टीबी की पुष्टि हुई। डॉक्टर ने जो दवा दी है उसे खा रहे हैं।
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क्या है टीबी वायरस
ट्यूबरक्लोसिस, क्रोनिक संक्रामक संक्रमण है जो एयरबॉर्न बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस के कारण होता है। यह आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन कोई भी अंग इससे प्रभावित हो सकता है। ट्यूबरक्लोसिस मुख्य रूप से तब फैलता है जब लोग एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दूषित की गई हवा में सांस लेते हैं जिसे टीबी है।
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ये हैं लक्षण
- 15 दिन से अधिक खांसी और बुखार
- बलगम में खून आना, भूख में कमी
- वजन कम होना, रात में पसीना आना
- गले में गांठ, बांझपन की समस्या
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अमरौधा, राजपुर व सरवनखेड़ा ब्लॉक के करीब 200 गांवों में तीन टीमों ने पहुंचकर करीब 15 हजार लोगों की स्क्रीनिंग और एक्सरे किए गए। जिसमें टीबी के 40 नये रोगी मिलने पर उनका उपचार शुरू कर दिया गया है। अभी कुछ लोगों की रिपोर्ट आना बाकी है। - डॉ. शलभ मोहन,नोडल अधिकारी/ एसीएमओ