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आईएएस से मिला और आईएएस बन गया
अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 11 Jul 2015 02:06 AM IST
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‘कर्नाटक बैच के आईएएस राजीव चावला मेरे प्रेरणा स्रोत हैं। आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान कर्नाटक कैडर के आईएएस से मिलने और उनसे बात करने का मौका मिला। उनके विचारों ने ऐसा प्रभावित किया कि आईएएस बनने की जिद पकड़ ली और अब आईएएस बन गया।’
यह कहना है आईएएस में नवीं रैंक पाने वाले शहर के आशीष कुमार का। आईएएस में सेलेक्शन के बाद आशीष शुक्रवार को पहली बार कानपुर आए और अपने पुराने स्कूल वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर किदवईनगर जाकर प्रिंसिपल शर्मिला नंदी सहित तमाम शिक्षकों से आशीर्वाद लिया।
आवास विकास हंसपुरम् निवासी यूपी फाइंनेशियल कार्पोरेशन से रिटायर उमाशंकर उमराव के छोटे बेटे आशीष ने हाईस्कूल में सिटी टॉपर रहे। इंटरमीडिएट में 95 फीसदी मार्क्स लाकर जेईई क्रैक किया और आईआईटी कानपुर में एडमिशन पा गए। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक और एमटेक करने के बाद आशीष ने इंजीनियरिंग सर्विसेज की परीक्षाएं दीं।
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इसमें सेलेक्शन हुआ और वह जबलपुर रेलवे में असिस्टेंट मैटेरियल के पद पर नियुक्त हो गए।
आशीष का कहना है कि इस जॉब से संतुष्टि नहीं मिली और आईएएस में सेलेक्शन का मन बना लिया। मन चाहा विषय इलेक्ट्रिकल छोड़ा और दूसरे सब्जेक्ट से वर्ष 2010 और 2012 में आईएएस का पेपर दिया। इसमें सफलता नहीं मिली, इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और तैयारी में जुटे रहे।
मुख्य परीक्षा से ठीक एक महीने पहले छुट्टी लेकर दिल्ली गए और अच्छी तरह से तैयारी की। अब बेस्ट रिजल्ट और रैंक आपके सामने है। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच आपसी तालमेल नहीं होने का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। पद पर आने के बाद पहली प्राथमिकता विभागों के बीच आपसी तालमेल बनाने पर होगा ताकि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जनता को विभागों के चक्कर न काटने पड़े।
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यह कहना है आईएएस में नवीं रैंक पाने वाले शहर के आशीष कुमार का। आईएएस में सेलेक्शन के बाद आशीष शुक्रवार को पहली बार कानपुर आए और अपने पुराने स्कूल वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर किदवईनगर जाकर प्रिंसिपल शर्मिला नंदी सहित तमाम शिक्षकों से आशीर्वाद लिया।
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आवास विकास हंसपुरम् निवासी यूपी फाइंनेशियल कार्पोरेशन से रिटायर उमाशंकर उमराव के छोटे बेटे आशीष ने हाईस्कूल में सिटी टॉपर रहे। इंटरमीडिएट में 95 फीसदी मार्क्स लाकर जेईई क्रैक किया और आईआईटी कानपुर में एडमिशन पा गए। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक और एमटेक करने के बाद आशीष ने इंजीनियरिंग सर्विसेज की परीक्षाएं दीं।
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इसमें सेलेक्शन हुआ और वह जबलपुर रेलवे में असिस्टेंट मैटेरियल के पद पर नियुक्त हो गए।
आशीष का कहना है कि इस जॉब से संतुष्टि नहीं मिली और आईएएस में सेलेक्शन का मन बना लिया। मन चाहा विषय इलेक्ट्रिकल छोड़ा और दूसरे सब्जेक्ट से वर्ष 2010 और 2012 में आईएएस का पेपर दिया। इसमें सफलता नहीं मिली, इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और तैयारी में जुटे रहे।
मुख्य परीक्षा से ठीक एक महीने पहले छुट्टी लेकर दिल्ली गए और अच्छी तरह से तैयारी की। अब बेस्ट रिजल्ट और रैंक आपके सामने है। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच आपसी तालमेल नहीं होने का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। पद पर आने के बाद पहली प्राथमिकता विभागों के बीच आपसी तालमेल बनाने पर होगा ताकि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जनता को विभागों के चक्कर न काटने पड़े।