मनीष गुप्ता हत्याकांड: गवाहों को मिलेगी सुरक्षा, सीबीआई ने कहा- पुलिसकर्मी घूरकर भी डरा सकते हैं
मनीष गुप्ता हत्याकांड मामले के सभी गवाहों को सुरक्षा मिलेगी। इसके लिए सीबीआई कोर्ट ने डीजीपी को आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि गवाही के दौरान पर्दे के पीछे रहेंगे आरोपी पुलिसकर्मी। इससे पहले सीबीआई ने कहा था कि पुलिसकर्मी गवाहों को घूरकर भी डरा सकते हैं।
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कानपुर के मनीष गुप्ता हत्याकांड मामले में पांच पुलिसकर्मियों को जमानत मिलने के बाद सीबीआई कोर्ट ने मंगलवार को हत्याकांड से जुड़े गवाहों को सुरक्षा देने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि इस मामले की गवाही आरोपी पुलिस वालों के सामने नहीं होगी।
बल्कि जिस वक्त कोर्ट में गवाही होगी, उस वक्त आरोपी पर्दे के पीछे होंगे। ताकि, आरोपियों का गवाहों से आमना- सामना न होने पाए। बर्रा निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता की गोरखपुर के रामगढ़ताल स्थित होटल कृष्णा पैलेस में 27 सितंबर 2021 की रात पुलिस की पिटाई से मौत हो गई थी।
इस मामले में मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी ने रामगढ़ताल थाने में तैनात रहे इंस्पेक्टर जगत नारायण, दरोगा अक्षय मिश्र, राहुल दुबे, विजय यादव, कांस्टेबल कमलेश यादव और आरक्षी प्रशांत पर हत्या का केस दर्ज कराया था। 10 जनवरी को ही सीबीआई कोर्ट ने इंस्पेक्टर जगत नारायण को छोड़कर अन्य सभी पुलिस वालों के खिलाफ हत्या की धारा हटा दी थी।
इसके साथ ही पांच पुलिसकर्मियों को जमानत मिल गई थी। आरोपियों के जमानत पर छूटने बाद मनीष की पत्नी मीनाक्षी की ओर से सीबीआई ने गवाहों की सुरक्षा की मांग करते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी, जिसको कोर्ट ने सुन लिया। इस मामले में मुख्य गवाह मीनाक्षी गुप्ता, मनीष का दोस्त हरबीर सिंह और होटल मैनेजर आदर्श तिवारी हैं।
सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि अब इस मामले की छह-सरत फरवरी को गवाही होनी है। ऐसे में कई बार आरोपी कोर्ट परिसर में ही गवाहों को घूरकर या आंखों से भी डरा सकते हैं। इससे केस की गवाही प्रभावित होने की आशंका है। इसलिए सुरक्षा देना आवश्यक है।
अर्जी को स्वीकार करते हुए सीबीआई कोर्ट के स्पेशल जज विजय कुमार झा ने गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश डीजीपी डॉ. डीएस चौहान को दिया है। बता दें कि आरोपी पुलिसकर्मी अभी जमानत पर जेल से बाहर हैं। ऐसे में गवाहों की जान का खतरा है।