बड़े भाई के साथ था पत्नी के अवैध संबध हाेने का शक, पति ने कुल्हाड़ी से काट डाला
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पत्नी को बार-बार समझा रहा था आशाराम
कुल्हाड़ी से वार कर पत्नी वीरवती की हत्या करने वाले पति आशाराम को अपने किए पर जरा भी पछतावा नहीं है। पुलिस लाकअप में उसने कहा कि वह पत्नी को बार-बार समझा रहा था, लेकिन वह उसकी बात नहीं मान रही थी। वीरवती आशाराम की दूसरी पत्नी थी। इससे पहले उसकी शादी भेड़ी खुर्द के हीरालाल की पुत्री सीता से हुई थी। आशाराम का सीता से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इस पर सीता ने आशाराम के बड़े भाई सीताराम के साथ शादी कर ली। यह शादी आशाराम के रिश्ते के भाई महेश्वरीदीन ने ही कराई थी। इसके बाद महेश्वरीदीन ने करीब 12 साल पहले आशाराम की शादी डाले का पुरवा निवासी बहादुर बसोर की पुत्री वीरवती से करा दी, जिससे उसे एक बेटी व दो बेटे हैं।
शौच के लिए निकली तो आशाराम ने कुल्हाड़ी से काट डाला
कानपुर देहात के भोगनीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पुरैनी निवासी आशाराम रिश्ते में अपने बड़ा भाई लगने वाले जालौन जिले के कदौरा के भेड़ी खुर्द गांव निवासी महेश्वरी दीन कानपुर स्थित एक प्राइवेट फैक्ट्री में काम करता है। दोनों फूलबाग में कमरा लेकर रहते हैं। यहां आशाराम की पत्नी वीरवती भी साथ रहती थी। बुधवार सुबह वीरवती शौच के लिए निकली तो आशाराम कुल्हाड़ी लेकर पीछे से गया और ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी। शव काे घसीट कर झाड़ियों में छुपाने के बाद वह माैके से भाग निकला।शव काे घसीट कर झाड़ियों में छुपाने के बाद वह माैके से भाग निकला। उसने कुल्हाड़ी काे मौके पर ही छोड़ दिया। कुछ देर बाद खून से सनी झाड़ियों देख ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
आशाराम ने कई बार कहा था घर चलने को
वीरवती के भेड़ी खुर्द आते ही पति आशाराम कानपुर से यहां आ गया था। यहां आने को लेकर दोनों में काफी विवाद होता था। वीरवती से उसने कई बार कानपुर चलने की बात कही, लेकिन वह नहीं मानी। उसने कुछ दिन और रुकने की बात कही। इस पर आशाराम ने उसके साथ मारपीट भी की थी।
आशाराम और महेश्वरीदीन में हुआ था झगड़ा
भेड़ी खुर्द में मंगलवार की शाम आशाराम और महेश्वरीदीन में झगड़ा हुआ था। दरअसल महेश्वरीदीन आशाराम को बिना बताए उसकी पत्नी वीरवती और अपनी बेटी को बाजार ले गया था। कई घंटे बाद गांव लौटने पर आशाराम ने वीरवती को डांटा था। इस पर महेश्वरीदीन सफाई देने आया तो दोनों में कहासुनी हो गई। नौबत मारपीट तक आ गई थी। परिवार के लोगों ने बीच बचाव कराकर मामला शांत कराया। दोनों में हुए विवाद में वीरवती ने महेश्वरीदीन का ही पक्ष लिया था और आशाराम को बुरा भला कहा था। तब से आशाराम के सिर पर खून सवार हो गया था।
महेश्वरीदीन को भी मारना चाहता था आशाराम
महेश्वरीदीन और वीरवती के बीच नजदीकियों को देखकर आशाराम कई दिनों से दोनों को मौत के घाट उतारना चाहता था। उसने कई दफा वीरवती को सुधर जाने की चेतावनी दी थी, लेकिन वह नहीं मानी। मंगलवार की रात आशाराम वीरवती को ही नहीं, महेश्वरीदीन को भी मारने वाला था, पर महेश्वरीदीन उसके इरादों को भांप गया था। इस कारण वह रात में ही गांव से भाग गया। आशाराम ने उसकी तलाश भी की, जब वह नहीं मिला तो उसने सुबह वीरवती को मौत के घाट उतार दिया।
शादी के पहले से ही महेश्वरीदीन से थीं नजदीकियां
वीरवती और महेश्वरीदीन के बीच संबंध आशाराम से शादी कराने से पहले से ही थे। महेश्वरीदीन उसे हमेशा पास रखना चाहता था, इसी कारण आशाराम से उसकी शादी कराई थी। 13 साल पहले महेश्वरीदीन की पत्नी की जब मौत हो गई तो इनके बीच नजदीकियां और बढ़ गई। कानपुर में आशाराम के साथ काम करने वह वीरवती के पास रहने के ही इरादे से गया था, जिसे आशाराम समझ गया था। इसी कारण वह दोनों पर नजर रखता था।