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कानपुर: ठेकेदारों की कुंडली खंगाल रही एसआईटी, फर्जी कागजात और 40-20-40 का कमीशन खेल, नपेगी अधिकारियों की गर्दन

Sat, 05 Sep 2026 09:45 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sat, 05 Sep 2026 09:45 AM IST
सार

Kanpur News: कानपुर नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच कर रही एसआईटी ने ब्लैक लिस्टेड पांच कंपनियों और उनके ठेकेदारों के टेंडर दस्तावेजों की जांच तेज कर दी है। ठेकेदारों के हैसियत, चरित्र, अनुभव प्रमाण पत्र और सिक्योरिटी मनी की पड़ताल की जा रही है।

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Kanpur SIT scrutinizing contractors backgrounds fake documents and the  40 20 40 commission racket exposed
कानपुर नगर निगम - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर नगर निगम के भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए एसआईटी ब्लैक लिस्टेड ठेकेदारों की कंपनियों के टेंडर से संबंधित कागजात खंगाल रही है। इसमें हैसियत, चरित्र और अनुभव प्रमाणपत्र पत्रों को देखा जा रहा है। यदि इन प्रमाणपत्रों में कमी मिली, तो ठेकेदारों के साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों की भी गर्दन नप सकती है। इसी के चलते नगर निगम के अधिकारी भी कागज देने में सहयोग नहीं कर रहे थे।

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इस पर पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त प्रथम अनूप कुमार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। बता दें कि पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रहार शुरू किया था। पहले ही दिन पांच ठेकेदारों की कंपनियां ब्लैक लिस्टेड कर धोखाधड़ी से टेंडर लेने के आरोप में छह प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

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वे कितने सही और कितने गलत हैं
दो ठेकेदारों को जेल भी भेजा गया था। सीपी ने एडीसीपी के नेतृत्व में चार लोगों की एसआईटी गठित की थी। एक सप्ताह भीतर एसआईटी दो-तीन बार नगर निगम निगम जाकर टेंडर प्रक्रिया से संबंधित अभिलेख कब्जे में ले चुकी है। सूत्रों के अनुसार एआईटी जांच कर रही है कि टेंडर लेने के लिए ठेकेदारों ने जिन कागजातों का प्रयोग किया है, वे कितने सही और कितने गलत हैं।

चरित्र प्रमाण पत्र भी देखा जा रहा है
बड़े-बड़े टेंडर पाने के लिए किन-किन कागजों में क्या-क्या गड़बड़ियां की गईं हैं। यदि किसी भी कागज में गड़बड़ी मिलती है तो ठेकेदार के अलावा उन कागजों पर टेंडर स्वीकृत करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इनमें चरित्र प्रमाण पत्र भी देखा जा रहा है। इसके तहत किसी ठेकेदार का क्रिमिनल रिकाॅर्ड तो नहीं है। इसके साथ ही कम अनुभव वाले तो काम नहीं करा रहे थे।

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इन कागजातों की जा रही जांच

  • ठेकेदार का चरित्र प्रमाणपत्र।
  • ठेकेदार का हैसियत प्रमाणपत्र।
  • 10 फीसदी जमा होने वाली सिक्योरिटी मनी।
  • कंपनी से संबंधित जीएसटी के कागजात।
  • कंपनी का बैंक अकाउंट।
  • टेंडर लेने वाले ठेकेदार का अनुभव, उसने कितने तक के काम (धनराशि) किए हैं। इसमें एक प्रमाणपत्र बैंक और दूसरा नगर निगम अथवा दूसरा वह विभाग जिसका कभी काम किया हो, का लगता है।
  • कागजों में गड़बड़ी से चल रहा था 40-20-40 का खेल।

बाबुओं से लेकर अधिकारियों तक को कमीशन की चढ़ौती
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम में कई वर्षों से 40-20-40 का खेल चल रहा था। इसके तहत चहेते ठेकेदार कागजों में तमाम कमियों के बाद भी करोड़ों के टेंडर पाते हैं तो उन्हें इसके बदले में बाबुओं से लेकर अधिकारियों तक को कमीशन की चढ़ौती चढ़ानी पड़ती है। तब जाकर अगली टेंडर प्रक्रिया में भी शामिल होने का रास्ता बनता है। इसका खामियाजा खस्ताहाल सड़कों के रूप में आम जनता को भुगतना पड़ता है।

हैसियत और सिक्योरिटी मनी में होता था फर्जीवाड़ा
बताया जाता है कि ठेकेदारों के हैसियत प्रमाणपत्र और सिक्योरिटी मनी के कागजों में दो साल पहले तक खूब फर्जीवाड़ा होता था। अधिकतर ठेकेदार हैसियत प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराए बगैर ही टेंडर हासिल कर लेते थे। इसी तरह सिक्योरिटी मनी के नाम पर पूर्व में फर्जी एफडी लगाए जाने के मामले भी प्रकाश में आ चुके हैं। फिलहाल अब एफडी के स्थान पर कैश जमा कराया जाता है।

ये कंपनियां हुईं हैं ब्लैक लिस्टेड

  • मेसर्स दिलीप बाजपेई।
  • मेसर्स अजय इंटर प्राइजेज, मालिक अजय बाजपेई।
  • पारसनाथ बिल्डर, मालिक संदीप जैन।
  • कैला इंटरप्राइजेज, मालिक गोविंद शर्मा।
  • तिरुपति ट्रेडर्स, प्रार्थना शुक्ला पत्नी प्रोफेसर राजेश शुक्ला।
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