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Kanpur News: एलआईसी कर्मियों को करनी पड़ेगी जनगणना ड्यूटी, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
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कानपुर। जनगणना में एलआईसी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने के खिलाफ दायर याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि जनगणना अधिनियम के तहत एलआईसी समेत किसी भी वाणिज्यिक प्रतिष्ठान के कर्मचारियों को प्रगणक और पर्यवेक्षक बनाया जा सकता है। ऐसे कर्मचारियों को जनगणना कार्य करना होगा और इस दौरान उन्हें लोक सेवक माना जाएगा।
कानपुर मुख्यालय वाले नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इम्प्लॉइज संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एलआईसी कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी का विरोध किया था। संगठन का कहना था कि जनगणना अधिनियम में केवल स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को ही इस कार्य में लगाया जा सकता है इसलिए एलआईसी कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ है। एलआईसी एक वाणिज्यिक प्रतिष्ठान है इसलिए उसके कर्मचारियों की नियुक्ति पूरी तरह कानूनी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने कर्मचारियों के तर्क को अस्वीकार कर दिया और कहा कि कानून अधिकृत अधिकारियों को ऐसे कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार देता है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जनगणना कार्य के लिए नियुक्त कर्मचारी ड्यूटी के दौरान लोक सेवक माने जाएंगे। यदि कोई कर्मचारी आदेश की अवहेलना करता है या कार्य में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ जनगणना अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की 4 फरवरी 2026 की अधिसूचना का भी उल्लेख किया, जिसके तहत जनगणना-2027 का पहला चरण 22 मई से 20 जून 2026 तक चल रहा है। इस चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य कराया जा रहा है।
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कानपुर मुख्यालय वाले नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इम्प्लॉइज संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एलआईसी कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी का विरोध किया था। संगठन का कहना था कि जनगणना अधिनियम में केवल स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को ही इस कार्य में लगाया जा सकता है इसलिए एलआईसी कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ है। एलआईसी एक वाणिज्यिक प्रतिष्ठान है इसलिए उसके कर्मचारियों की नियुक्ति पूरी तरह कानूनी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने कर्मचारियों के तर्क को अस्वीकार कर दिया और कहा कि कानून अधिकृत अधिकारियों को ऐसे कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार देता है।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जनगणना कार्य के लिए नियुक्त कर्मचारी ड्यूटी के दौरान लोक सेवक माने जाएंगे। यदि कोई कर्मचारी आदेश की अवहेलना करता है या कार्य में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ जनगणना अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की 4 फरवरी 2026 की अधिसूचना का भी उल्लेख किया, जिसके तहत जनगणना-2027 का पहला चरण 22 मई से 20 जून 2026 तक चल रहा है। इस चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य कराया जा रहा है।
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