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बिल्डरों पर फोड़ा कुलीबाजार हादसे का ठीकरा, केडीए ने जांच रिपोर्ट कमिश्नर को भेजी, प्रवर्तन विभाग को दी क्लीन चिट

Tue, 08 Dec 2020 09:41 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 08 Dec 2020 09:41 AM IST
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Kulibazar accident broke out on builders, KDA sent inquiry report to commissioner, gave clean chit to enforcement department
कुलीबाजार हादसा - फोटो : अमर उजालाल
केडीए (कानपुर विकास प्राधिकरण) ने कुलीबाजार हादसे का ठीकरा बेसमेंट बना रहे बिल्डरों के सिर पर फोड़ा है। प्रवर्तन विभाग को क्लीन चिट दी गई है। रिपोर्ट कमिश्नर को भेज दी गई है। कुलीबाजार में 23 नवंबर को रात में 60 फीट गहरे बेसमेंट के निर्माण के दौरान जर्जर मकान ढहने से एक वृद्ध की मौत हो गई थी।
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निर्माण करा रहे तीन बिल्डरों के खिलाफ केस दर्ज कराकर जेल भेज दिया गया था। कमिश्नर डॉ. राजशेखर के निर्देश पर केडीए उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने सचिव एसपी सिंह की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की जांच रिपोर्ट में बिल्डरों की लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह बताया गया।
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कहा गया है कि बिल्डरों ने सुरक्षा संबंधी नियमों के पालन का आश्वासन दिया था पर निर्माण के दौरान मानकों का पालन नहीं किया। केडीए ने नियमानुसार ही व्यावसायिक नक्शा पास किया था। बता दें कि नगर निगम भी बेसमेंट के बगल के मकान को डेढ़ साल पहले जर्जर घोषित कर खानापूरी कर चुका है। क्षेत्रीय विधायक अमिताभ वाजपेयी और मकान ढहने से बेघर हुए लोग इस हादसे के लिए केडीए को दोषी ठहरा रहे हैं। दस दिन धरना भी दे चुके हैं।
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केडीए ने अपनों को बचाया
जांच रिपोर्ट में केडीए के किसी भी अफसर-कर्मचारी को दोषी नहीं ठहराया गया है। जबकि प्रवर्तन विभाग के प्रभारी, जोनल अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और सुपरवाइजर की ड्यूटी होती है वे नक्शे के अनुरूप निर्माण कराएं। नक्शे के विपरीत निर्माण होने पर केडीए इसे अवैध निर्माण मानते हुए सीलिंग करता है पर कुलीबाजार मामले में ऐसा नहीं हुआ।
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