Kesco Fraud: नए कनेक्शन में लगाए पुराने मीटर, गारंटी हो चुकी थी खत्म, खराब हुए...तो दोबारा वसूली पूरी कीमत
Kanpur News: केस्को में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना की वजह से केस्को ने इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की खरीद का ठेका नहीं किया। 2020 से अब तक दूसरे डिस्कॉम से मीटरों को उधार मांगकर या उखाड़े गए पुराने मीटरों को लगाकर काम चलाया गया।
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कानपुर में बिजली मीटरों की गारंटी में चल रहे गड़बड़झाले में एक और मामला सामने आया है। मीटरों की कमी के चलते केस्को ने पिछले दो सालों में नए कनेक्शन लेने या मीटर खराब होने पर छह हजार पुराने मीटर लगाए हैं। ये वे पुराने मीटर थे, जो कनेक्शन का स्थायी विच्छेदन कराने पर उखाड़ लिए जाते हैं। लगाए जाते समय मीटर तो सही थे, लेकिन गारंटी खत्म हो चुकी थी।
जब ये खराब हुए, तो उपभोक्ताओं से दोबारा पूरी कीमत वसूली गई। उधर, पांच साल की गारंटी पीरियड के भीतर मीटरों के खराब हो जाने पर केस्को की ओर से मीटरों की पूरी कीमत वसूलने का खुलासा होने पर एमडी ने जांच के निर्देश दिए हैं। जांच कमेटी में अधीक्षण अभियंता और एक्सईएन स्तर के तीन सदस्य हैं। इस बीच एक और मामला सामने आया है।
स्थायी विच्छेदन कराने पर मीटर ले लेता है केस्को
जब कोई उपभोक्ता अपने बिजली कनेक्शन का स्थायी विच्छेदन (पीडी) करा देता है, तो केस्को की टीम मीटर उखाड़ लेती है। नियमानुसार बिजली का मीटर केस्को की प्रॉपर्टी होता है। इसलिए मीटर लेते समय उसकी कीमत वापस नहीं करता है। उखाड़े हुए मीटरों की केस्को की टीम जांच करती है। नए मीटर न होने पर केस्को यही पुराने मीटर लगा देता है। इसके एवज में मीटर की पूरी कीमत वसूलता है। चूंकि ज्यादातर मीटर पांच साल की गारंटी पूरी कर चुके होते हैं। ऐसे में जब ये खराब होते हैं तो नया मीटर लगवाने पर दोबारा 1028 रुपये जमा कराए जाते हैं।
पिछले तीन साल पुराने मीटरों से चला काम
केस्को में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना की वजह से केस्को ने इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की खरीद का ठेका नहीं किया। 2020 से अब तक दूसरे डिस्कॉम से मीटरों को उधार मांगकर या उखाड़े गए पुराने मीटरों को लगाकर काम चलाया गया। शहर में करीब सात लाख उपभोक्ताओं में करीब एक लाख 40 हजार ही स्मार्ट मीटर धारक हैं। बाकी साढ़े पांच लाख कनेक्शन इलेक्ट्रॉनिक मीटरों से ही चल रहे हैं।
केस्को के टेस्ट डिवीजन की भूमिका में लापरवाही
मीटरों की गारंटी का लाभ उपभोक्ताओं को न मिल पाने में सबसे बड़ी लापरवाही केस्को के टेस्ट डिवीजन की रही है। शहर में केस्को के चार टेस्ट डिवीजन हैं। वितरण खंड (डिस्ट्रीब्यूशन डिवीजन) में उपभोक्ता मीटर की कीमत जमा करता है। इसके बाद मीटर उखाड़ने, उनकी जांच करने, नए या पुराने मीटर को उपभोक्ता के परिसर में लगाने की जिम्मेदारी टेस्ट डिवीजन की होती है।
न ही उन्हें वसूली गई कीमत लौटाई जाती है
वितरण खंड इसके लिए इंडेंट (ई-मेल या पत्र से भेजी गई डिमांड) टेस्ट को भेजता है। मीटर किसकी कमी से खराब हुआ, इसकी जांच कराए बिना पहले मीटर की कीमत जमा कराने की शर्त है। बिना इंडेंट मिले मीटर नहीं बदला जाता है। अगर मीटर में तकनीकी फॉल्ट हुआ तो उपभोक्ता को न तो बताया जाता है और न ही उन्हें वसूली गई कीमत लौटाई जाती है।
गारंटी पीरियड के मीटरों को बदलने की कीमत वसूलने की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। जांच में यह बिंदु भी शामिल किया जाएगा कि अवधि पूरी कर चुके पुराने मीटरों के पुन: खराब होने पर कितनों से मीटरों की कीमत ली गई। आंकड़े मिलने के बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ताओ को राहत दी जाएगी। -सैमुअल पॉल एन, एमडी, केस्को