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Kanpur News: 44 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा, पॉलिसी तुड़वाई, गहने पर लोन करवा ठगे 82 लाख

Sun, 06 Apr 2025 01:44 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Apr 2025 01:44 AM IST
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Kept under digital arrest for 44 days, policy cancelled, swindled Rs 82 lakh by taking loan against jewellery

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कानपुर। आयकर, पुलिस और सीबीआई का डर दिखा साइबर ठगों ने शताब्दीनगर निवासी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से रिटायर्ड कर्मचारी विनोद कुमार झा से 82 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने मनी लांडि्रग का आरोप लगा उन्हें 44 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। ठगों को पैसा देने के लिए विनोद को पॉलिसी तुड़वानी पड़ी, जेवर तक गिरवी रखने पड़े। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

शताब्दीनगर के हिमालय भवन निवासी विनोद कुमार झा ने बताया कि 12 फरवरी को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को आयकर अधिकारी बताया। कहा कि दिल्ली में उनकी ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी नाम की फर्म है। उसके नाम पर 8.62 लाख रुपये काॅरपोरेट टैक्स बकाया है। जब उन्होंने खुद की फर्म होने से इन्कार किया तो कॉल करने वाले शख्स ने इसकी शिकायत थाने में दर्ज कराने की बात कही।
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उसने झांसे में लेने के लिए उसी लाइन पर पुलिस काे काॅल ट्रांसफर कर दिया और विक्रम नाम के युवक ने खुद को दरोगा बता कहा कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और एफआईआर नंबर भी दिया। फिर फोन सीबीआई अधिकारी के नाम पर पायल ठाकुर के पास ट्रांसफर किया। पायल ने फोन पर कहा कि आपका नाम मनी लॉड्रिंग में आया है। ऐसे में खातों की जांच करनी होगी। आपको अपने खाते में जमा सारे रुपये ट्रांसफर करने होंगे। पायल ने आश्वासन दिया कि जांच पूरी हाेने के बाद उनके रुपये वापस कर दिए जाएंगे। कहा कि केस खत्म होने तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा जाएगा और केस खत्म होने पर बेल हो जाएगी। पीड़ित ने तीन बार में आरटीजीएस के जरिये 82 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
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उन्हें 24 मार्च तक डिजिटल अरेस्ट रखा। रुपये मिलने के बाद ठगों ने अपना मोबाइल बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। साइबर थाना प्रभारी सुनील वर्मा ने बताया कि पीड़ित ने मामले में तहरीर दी है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विनोद ने बताया कि ठगों ने जांच का हवाला देकर अकाउंट में जमा रिटायमेंट का पैसा 25 फरवरी 2025 को 49 लाख 50 हजार रुपये का आरटीजीएस अपने खाते में कराया। अकाउंट खाली होने पर ठगों ने पूछा कि आपके पास पॉलिसी के नाम पर क्या है, तो इन्होंने अपनी और पत्नी की एलआईसी पॉलिसी की जानकारी दी। इस पर ठगों ने मैच्योर हुए बगैर तुड़वा दी और इसका 26 लाख रुपये 15 मार्च को अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया। इसके बाद ठगों ने सीबीआई अफसर बनकर घर के जेवरों के बारे में जानकारी जुटाई। जेवरात को बैंक में बंधक बनवाकर 6.80 लाख रुपये का लोन कराया और इसकी रकम भी 24 मार्च को अपने खाते में ट्रांसफर कराई। इसके बाद ठगों ने प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दी। ठगों ने फ्लैट के दस्तावेज मंगाए और उसपर 50 लाख रुपये का लोन कराने की तैयारी में थे। इसी बीच दो अप्रैल को विनोद झा ने पीएफ कार्यालय और मुंबई में एसबीआई में तैनात भतीजे को इसकी जानकारी दी। मुंबई में बैठे भतीजे ने जब उनका अकाउंट चेक किया पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़िता का कहना था कि अगर समय रहते जानकारी नहीं होती तो उनका फ्लैट भी चला जाता। जीवन भर की कमाई जाने की साथ ही रहने का भी ठिकाना नहीं बचता।
विनोद झा ने बताया कि शातिर ठग व्हाट्सएप ऑडियो और वीडियो कॉल पर बात करते थे। वर्दी में रहते थे, उनकी कुर्सी के पीछे दीवार पर सीबीआई का लोगो लगा था। मेज पर फाइलों के गट्ठर और पुलिस अफसरों की आवाजाही देखकर उन्हें लगा कि यह सच में दिल्ली सीबीआई का दफ्तर है। इंट्रोगेशन करने का तरीका और उन्हें विभागों से जुड़ी तमाम जानकारी और आईटी व सीबीआई की जांच वाले लेटर भेजकर इस तरह से ब्रेनवॉश कर दिया कि उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया।

पीड़ित ने बताया कि उन्होंने पनकी थाना और साइबर थाने में मामले की शिकायत की। इसके बाद भी ठग अफसर बनकर लगातार उन्हें कॉल कर रहे थे। वह कह रहे थे कि जल्द ही आपकी जांच पूरी होने वाली है। बस प्रॉपर्टी के पेपर और इससे जुड़ी जांच बाकी है।

पनकी हिमालय भवन अपार्टमेंट में रहने वाले विनोद कुमार झा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सर्वोदयनगर में एसएसएसए के पद पर कार्यरत थे। पीएफ ऑफिस की विजिलेंस टीम में भी लंबे समय तक काम किया है। घर में पत्नी रेनू झा साथ में रहती हैं। बड़ा बेटा हेमंत झा बैंक कर्मचारी है, जो आजादनगर में पत्नी, बच्चों के साथ रहते हैं। दूसरा बेटा अवनीश झा सूरत में परिवार के साथ रहकर प्राइवेट जॉब करता है। गीतानगर क्रॉसिंग के पास रामलीला मैदान के सामने रहने वाले भतीजे पीएफ ऑफिस कर्मचारी राजीव झा दंपती की देखरेख करते हैं। ठगी की जानकारी मिलने के बाद वह भतीजे के घर में हैं।
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