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Kanpur Violence Update: 80 के लगभग जमानत अर्जियां कोर्ट में दाखिल, 60 आरोपियों को पुलिस भेज चुकी है जेल 

Fri, 08 Jul 2022 02:06 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 08 Jul 2022 02:06 PM IST
सार

नई सड़क बवाल में पहली बार जमानत अर्जियां खारिज की गई हैं। अपर जिला जज की कोर्ट ने गंभीर अपराध मानते हुए आरोपियों को राहत नहीं दी है। 
 

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Kanpur Violence Update, Around 80 bail applications have been filed in the court, 60 people have been sent to jail by making them accused.
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर नई सड़क पर तीन जून को बवाल के मामले में पहली बार आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज की गई है। 80 के लगभग जमानत अर्जियों पर फैसला आना बाकी है। आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज होने के बाद अब उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। इससे यह भी साफ हो गया है कि आरोपियों को कम से कम एक महीना और जेल में रहना पड़ेगा।  गुरुवार को बवाल में शामिल रहे दो आरोपियों कर्नलगंज निवासी मो. आमिर और बजरिया के नगर निगम कालोनी निवासी मो. उमर की छह जमानत अर्जियां अपर जिला जज 16 जितेंद्र द्विवेदी ने खारिज कर दी। 

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दोनों को तीन मुकदमों में आरोपी बनाया गया था। एडीजीसी दिनेश अग्रवाल ने बताया कि दोनों नामजद आरोपी नहीं थे लेकिन एसआईटी की जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों को आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ सबूत मिले हैं। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जियां खारिज की हैं। इनके अलावा 21 और जमानत अर्जियां लगी थीं। इन पर सुनवाई के लिए तारीख लगा दी गई हैं। वहीं बवाल के मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी व सपा नेता निजाम कुरैशी समेत 37 जमानत अर्जियाें पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है।

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प्रिंटिंग प्रेस मालिक की जमानत को बना रहे थे आधार
पिछले दिनों अपर जिला जज 18 की अदालत से प्रिंटिंग प्रेस मालिक शंकर लाल रमानी को जमानत मिल गई थी। शंकर पर अपनी प्रिंटिंग प्रेस में बंदी से संबंधित पम्पलेट छापने का आरोप था। इसी आदेश को आधार बनाकर मामले में अन्य आरोपियों ने जमानत अर्जियां दाखिल करनी शुरू कर दी थीं। मो. आमिर और मो. उमर ने भी इसी आदेश का हवाला देते हुए जमानत की मांग की लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए तर्क खारिज कर दिया कि मामले में शंकर की भूमिका अन्य आरोपियों से अलग थी। वह बवाल में शामिल नहीं था। आमिर और उमर पर गंभीर आरोप हैं इसलिए इन्हें शंकर के जमानत आदेश का लाभ नहीं मिल सकता।

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बेकनगंज थाने में दर्ज हुई थीं तीन एफआईआर
3 जून को हुए बवाल के अगले दिन सबसे पहले 3:50 बजे बेकनगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक नवाब अहमद ने 36 नामजद व 450 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद शाम 5:36 बजे परेड निवासी मुकेश ने हजारों की भीड़ में अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। तीसरी रिपोर्ट बेकनगंज एसआई आरिफ रजा ने 19 नामजद व 350 अज्ञात लोगों के खिलाफ शाम 6:30 बजे दर्ज कराई थी। लगभग 80 जमानत अर्जियां कोर्ट में दाखिल की जा चुकी हैं। 

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वृद्ध को भी नहीं मिली गिरफ्तारी से राहत
नई सड़क पर बवाल के मामले में आरोपी 68 वर्षीय वृद्ध फहीमाबाद लेबर कालोनी निवासी सैयद अब्दुल हई हाशमी को गिरफ्तारी से राहत नहीं मिल सकी है। अपर जिला जज 16 जितेंद्र द्विवेदी ने बवाल से संबंधित तीनों मुकदमों में आरोपी अब्दुल की अग्रिम जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। अब्दुल की ओर से अधिवक्ता का तर्क था कि एफआईआर में अब्दुल नामजद नहीं है। वहीं, एडीजीसी दिनेश अग्रवाल व विशेष लोक अभियोजक पंकज त्रिपाठी ने तर्क रखा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अब्दुल की पहचान हुई है। अब्दुल ने सहअभियुक्तों के साथ मिलकर जनता व पुलिस बल पर पथराव, फायरिंग व पेट्रोल बमों से हमला किया। 

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