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बिकरू कांड: प्रदेश सरकार का जवाब आने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट तय करेगा नाबालिग को जमानत मिलेगी या नहीं
Wed, 15 Sep 2021 06:14 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 15 Sep 2021 06:14 PM IST
सार
चौबेपुर के बिकरू गांव में 2 जुलाई 2020 की रात गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर बिल्हौर सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। इसी मामले में गांव में 3 दिन पहले ब्याह कर आई किशोरी पर भी हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है।
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कानपुर एनकाउंटर (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिकरू कांड मामले में नाबालिग की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पक्ष रखने को कहा है। हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद नाबालिग की ओर से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
याचिका पर दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुनवाई की। सरकार का जवाब आने के बाद ही तय हो सकेगा कि नाबालिग को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी या नहीं। चौबेपुर के बिकरू गांव में 2 जुलाई 2020 की रात गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर बिल्हौर सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी।
इसी मामले में गांव में 3 दिन पहले ब्याह कर आई किशोरी पर भी हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस का दावा था कि वह बालिग है लेकिन किशोर न्याय बोर्ड में वह नाबालिग साबित हो गई थी जिसके बाद उसे बाराबंकी के राजकीय संप्रेक्षण गृह में रखा गया था। गंभीर आरोप के चलते पहले सेशन कोर्ट और फिर हाईकोर्ट से नाबालिग की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। अब नाबालिग ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
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याचिका पर दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुनवाई की। सरकार का जवाब आने के बाद ही तय हो सकेगा कि नाबालिग को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी या नहीं। चौबेपुर के बिकरू गांव में 2 जुलाई 2020 की रात गैंगस्टर विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर बिल्हौर सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी।
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इसी मामले में गांव में 3 दिन पहले ब्याह कर आई किशोरी पर भी हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस का दावा था कि वह बालिग है लेकिन किशोर न्याय बोर्ड में वह नाबालिग साबित हो गई थी जिसके बाद उसे बाराबंकी के राजकीय संप्रेक्षण गृह में रखा गया था। गंभीर आरोप के चलते पहले सेशन कोर्ट और फिर हाईकोर्ट से नाबालिग की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। अब नाबालिग ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
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