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समस्या: अमेरिकी टैरिफ के धमाके से शहर के उद्योगों को 1500 करोड़ की चोट, कारोबारी बोले- निर्यात ऑर्डर रोके

Wed, 27 Aug 2025 11:08 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 27 Aug 2025 11:08 AM IST
सार

Kanpur News: टैरिफ लगने से पूर्व अमेरिका में कानपुर समेत भारत से जाने वाले चमड़ा और चमड़ा से जुड़े उत्पादों पर अलग-अलग 6-11% तक का शुल्क लगता था। अब 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को जोड़ लंे] तो 28 अगस्त के बाद भेजे जाने वाले उत्पाद पर 56-61 प्रतिशत का शुल्क लगेगा।

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Kanpur US tariff blast hurts citys industries by Rs 1500 crore businessmen say stop export orders
जावेद इकबाल, असद इराकी और आलोक श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ बुधवार सुबह से प्रभावी हो जाएगा। साथ ही अब वहां उत्पादों के निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। पूर्व में 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा चुका है। टैरिफ का प्रभाव शहर के चमड़ा, टेक्सटाइल और मशीनरी उद्योग पर खासा पड़ा है। 40 दिन के भीतर ही 1500 करोड़ के निर्यात आर्डर रोक दिए गए हैं। निर्यात रुकने से उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है।

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इकाइयों में अब एक या दो शिफ्ट में ही काम किया जा रहा है। जहां दो शिफ्ट में काम होता था वहां पर एक और जहां पर तीन शिफ्ट में काम होता था वहां दो शिफ्ट में ही काम हो रहा है। केवल अमेरिकी खरीदारों पर निर्भर निर्यातकों के सामने चुनौती ज्यादा बड़ी हो गई है। ऐसे में दैनिक श्रमिकों पर आने वाले समय में असर दिख सकता है। टैरिफ लगने से पूर्व अमेरिका में कानपुर समेत भारत से जाने वाले चमड़ा और चमड़ा से जुड़े उत्पादों पर अलग-अलग 6-11% तक का शुल्क लगता था।

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टेक्सटाइल उद्योग पर खासा असर
अब 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को जोड़ लंे] तो 28 अगस्त के बाद भेजे जाने वाले उत्पाद पर 56-61 प्रतिशत का शुल्क लगेगा। हालांकि अब अमेरिकी खरीदारों से कारोबारी गतिविधियां वर्तमान में शून्य हो गई हैं। जो पुराने ऑर्डर भी थे उन्हें निरस्त कर दिया गया है। इसके अलावा टेक्सटाइल पर 63 प्रतिशत कुल शुल्क हो गया है। इससे टेक्सटाइल उद्योग पर खासा असर पड़ रहा है। अमेरिकी से टेक्सटाइल फैब्रिक्स आता था।

घरेलू बाजार में बनाएंगे और पैठ
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी का कहना है कि परिषद के पदाधिकारियों की बैठक मंगलवार को की गई। इसमें अमेरिकी टैरिफ संकट पर चर्चा की गई। तय हुआ कि घरेलू बाजार में उत्पादों की बिक्री पर जोर रहेगा। इसके अलासा रूस, वाना रीजन, अफ्रीकी देशों के साथ कारोबारी रिश्ते बढ़ाए जाएंगे ताकि टैरिफ प्रभाव को कम किया जा सके।

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आपूर्ति श्रृंखला होगी प्रभावित
उत्पादन में कमी आने से चमड़ा, टेक्सटाइल, मशीनरी उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा प्रभाव पड़ेगा। चमड़ा उद्योग में अलग-अलग प्रकार के केमिकलों का उपयोग होता है। इसका सालाना कारोबार 500-800 करोड़ का है। इसके अलावा फुटवियर के सोल, फीता, शू अपर, बक्क्ल और इससे जुड़े उत्पादों पर असर दिखेगा। शहर में मशीनरी उत्पादों के अलग-अलग टूल बनते हैं। अलग-अलग कंपनियों के लिए कपड़ा तैयार किया जाता है।

केवल अमेरिका से ही निर्यात करने वाले निर्यातकों के सामने ज्यादा स्थितियां गंभीर हो गई हैं। नए-नए बाजार तलाशने में वक्त लगेगा। अफ्रीका रीजन बहुत बड़ा बाजार है। हालांकि यहां पर चीन का ज्यादा दखल है लेकिन निर्यातक अपने उत्पादों की गुणवत्ता के दम पर बाजार में पैर जमाएंगे। ये समय चुनौतीपूर्ण है।  -जावेद इकबाल, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद

निर्यात ऑर्डर निरस्त होने से उत्पादन प्रक्रिया धीमी हो गई है। जहां पहले तीन शिफ्ट में काम होता था वहां पर दो शिफ्ट में काम हो रहा है। निर्यातक सरकार के साथ हैं। जल्द संकट से उबर जाएंगे। रूस, यूरोपीय यूनियन, यूएई से रिश्ते गहरे किए जाएंगे। इन देशों में प्रतिनिधिमंडल जाएगा।  -असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद

नया टैरिफ बुधवार सुबह से लागू हो जाएगा। बीते 40 दिन में टैरिफ का चमड़ा, टेक्सटाइल और मशीनरी उद्योग पर इसका गहरा असर पड़ा है। 1500 करोड़ के निर्यात पर ग्रहण लग गया है। 800-900 करोड़ का चमड़ा और चमड़ा उत्पादों का निर्यात रुक गया है।  -आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (फियो)

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