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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, भूखे ना रहे श्रमिक, यहां न भोजन मिला न पानी, भूखे-प्यासे स्पेशल ट्रेन से रवाना
Sat, 30 May 2020 01:17 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 30 May 2020 01:17 AM IST
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पीड़ा सुनाते श्रमिक
- फोटो : amar ujala
एक तरफ सर्वोच्च न्यायालय श्रमिकों को घर तक पहुंचाने और भोजन मुहैया कराने की बात कर रहा है वहीं, शुक्रवार को कन्याकुमारी से कानपुर सेंट्रल पहुंची श्रमिक ट्रेन के यात्रियों की हालत खराब रही। श्रमिकों को गुरुवार रात से खाना-पानी नहीं मिला था।
शुक्रवार दोपहर तकरीबन 12 बजे कानपुर सेंट्रल के प्लेटफार्म नंबर एक पर ट्रेन पहुंची। लेकिन, यहां भी व्यवस्थाएं अधूरी रहीं। अधिकारियों ने कोचों में नाम मात्र के लंच पैकेट और पानी की बोतलों का वितरण कराया। सभी को खाना नहीं मिल पाया।
उच्चाधिकारियों के सामने नंबर बढ़ाने के लिए अपनी फोटो जरूर खिंचवाई। यात्रियों ने बताया कि हर कोच में 20 से 25 लंच पैकेट दिए गए हैं। जबकि, प्रत्येक कोच में इससे दोगुने यात्री हैं। भूख और प्यास से तड़प रहे श्रमिकों को पानी भी नहीं मुहैया कराया गया। यात्रियों ने अधिकारियों से खाना और पानी देने की गुहार लगाई। किसी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अंत में भूखे-प्यासे ही श्रमिक ट्रेन में बैठकर रवाना हो गए।
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अधिकारी बोले थे, सबको सीट पर लंच पैकेट दिया जाएगा। आधे में ही लंच पैकेट खत्म हो गए। अब कोई नहीं सुन रहा।
विनोद कुमार, निवासी लखनऊ
प्यास से गला सूख रहा है। सुबह से कुछ खाया नहीं है। लंच पैकेट और पानी की बोतलें भी सबको नहीं मिलीं। भूखे ही घर जाना पड़ेगा।
अनिल कुमार, निवासी उन्नाव
कल रात खाना और पानी मिला था। कानपुर स्टेशन पर लंच पैकेट और पानी की बोतलें हमारे पास पहुंचने से पहले ही खत्म हो गईं।
मुन्ना तिवारी, निवासी बलिया
बुधवार रात कन्याकुमारी से गाड़ी चली थी। सुबह से भूखे-प्यासे हैं। यहां पर सभी को लंच पैकेट और पानी नहीं मिल पाया। -
गोविंद, निवासी सीतापुर
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शुक्रवार दोपहर तकरीबन 12 बजे कानपुर सेंट्रल के प्लेटफार्म नंबर एक पर ट्रेन पहुंची। लेकिन, यहां भी व्यवस्थाएं अधूरी रहीं। अधिकारियों ने कोचों में नाम मात्र के लंच पैकेट और पानी की बोतलों का वितरण कराया। सभी को खाना नहीं मिल पाया।
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उच्चाधिकारियों के सामने नंबर बढ़ाने के लिए अपनी फोटो जरूर खिंचवाई। यात्रियों ने बताया कि हर कोच में 20 से 25 लंच पैकेट दिए गए हैं। जबकि, प्रत्येक कोच में इससे दोगुने यात्री हैं। भूख और प्यास से तड़प रहे श्रमिकों को पानी भी नहीं मुहैया कराया गया। यात्रियों ने अधिकारियों से खाना और पानी देने की गुहार लगाई। किसी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अंत में भूखे-प्यासे ही श्रमिक ट्रेन में बैठकर रवाना हो गए।
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अधिकारी बोले थे, सबको सीट पर लंच पैकेट दिया जाएगा। आधे में ही लंच पैकेट खत्म हो गए। अब कोई नहीं सुन रहा।
विनोद कुमार, निवासी लखनऊ
प्यास से गला सूख रहा है। सुबह से कुछ खाया नहीं है। लंच पैकेट और पानी की बोतलें भी सबको नहीं मिलीं। भूखे ही घर जाना पड़ेगा।
अनिल कुमार, निवासी उन्नाव
कल रात खाना और पानी मिला था। कानपुर स्टेशन पर लंच पैकेट और पानी की बोतलें हमारे पास पहुंचने से पहले ही खत्म हो गईं।
मुन्ना तिवारी, निवासी बलिया
बुधवार रात कन्याकुमारी से गाड़ी चली थी। सुबह से भूखे-प्यासे हैं। यहां पर सभी को लंच पैकेट और पानी नहीं मिल पाया। -
गोविंद, निवासी सीतापुर