Pollution Update: रात के 12 बजे बढ़ता है प्रदूषण...सुबह के छह बजे तक होती है समस्या, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
कानपुर में हवा पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्यादा खराब दर्ज की गई है। सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक 300 से 400 तक एक्यूआई पहुंच जाता है। इसके अनुसार, रात के 12 बजे प्रदूषण बढ़ता है और सुबह के छह बजे तक समस्या होती है।
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अगर आपको लगता है कि रात में वाहनों की संख्या कम होने से शहर की हवा साफ रहती है, तो ऐसा नहीं है। शहर रात 12 से सुबह छह बजे तक गैस चैंबर में तब्दील हो जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक रात 12 बजे से एक्यूआई बढ़ना शुरू होता है।
वहीं, सुबह छह बजे तक खतरनाक स्थिति में रहता है। इस बीच एक्यूआई 300 से 400 के बीच रहता है। दरअसल, रातें सर्द होने की वजह से वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं सतह से कुछ मीटर ऊपर जाकर रुक जाता है।
इस वजह से रात को हवा दमघोंटू हो जाती है। सुबह जैसे-जैसे मौसम खुलता है, वैसे-वैसे एक्यूआई गिरता है। सीपीसीबी के पिछले एक हफ्ते के आंकड़ों पर नजर डालें, तो नेहरूनगर में 18 नवंबर की रात 12 से सुबह चार बजे के बीच एक्यूआई 370 से 380 के बीच रहा।
14 नवंबर को किदवईनगर में रात साढ़े 12 बजे एक्यूआई 391 दर्ज किया गया। सोमवार रात 12 बजे किदवईनगर में एक्यूआई 368 और कल्याणपुर में 308 रहा। प्रदूषण की इस स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सभी विभागों को अलर्ट जारी किया गया है।
दोपहर में रहता है न्यूनतम एक्यूआई
रात बढ़ने के साथ ही बढ़ने वाला प्रदूषण दिन चढ़ने के साथ ही घटने लगता है। आंकड़ों के मुताबिक दोपहर 12 से शाम चार बजे के बीच शहर के तमाम हिस्सों में प्रदूषण का सतर न्यूनतम हो जाता है।
शाम ढलने के साथ ही फिर से बढ़ने लगता है। मंगलवार को दोपहर करीब दो बजे नेहरूनगर में एक्यूआई 68 था, जबकि किदवईनगर में 48 और कल्याणपुर में 43 रिकॉर्ड किया गया। बता दें किमहानगर में प्रदूषण पिछले तीन दिनों से सबसे ज्यादा (वेरी पुअर) श्रेणी में दर्ज किया गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी कहते हैं कि ठंड के मौसम में वाहनों व उद्योगों से निकलने वाली गैस व धुआं उड़ नहीं पाता। साथ ही रात के समय वाहनों की तेज रफ्तार की वजह से सड़क किनारे पड़ी धूल भी ज्यादा उड़ती है।
इसके अलावा लोग सड़क किनारे कूड़े व रबड़ के टायर भी जलाते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। चूंकि मौसम की वजह से प्रदूषण का स्तर कम करने में ज्यादा कुछ करने की गुंजाइश नहीं रहती। यही वजह है कि एक्यूआई का स्तर 300 का आंकड़ा पार करने पर ही सरकारी तंत्र हरकत में आता है।