560 ग्राम कोयले से बन सकेगी एक यूनिट बिजली, आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक तैयारियों में जुटे
- अभी तक एक यूनिट बिजली बनाने में होती है 800 ग्राम कोयले की खपत
- आईआईटी में शुरू हुआ पांच दिवसीय शार्ट टर्म कोर्स
- देश भर से आए विशेषज्ञ 15 इंजीनियरिंग कॉलेजों केप्रोफेसर को सिखाएंगे तकनीक
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आईआईटी में बुधवार को सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी फॉर पॉवर जनरेशन इन इंडिया विषय पर पांच दिवसीय शॉर्ट टर्म कोर्स की शुरुआत की गई। देशभर के 15 इंजीनियरिंग कॉलेजों से आए प्रोफेसरों के साथ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अधिकारियों ने इसमें हिस्सा लिया है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अतुल कुमार ने बताया कि अभी तक भारत के ताप विद्युत गृहों में सब क्रिटिकल तकनीकी से बिजली का उत्पादन होता है। इसमें कोयले की ज्यादा खपत और प्रदूषण होता है।
आईआईटी के प्रो. डीपी मिश्रा ने बताया कि अब भारत में जो भी ताप विद्युत गृह बन रहे हैं, वे सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होंगे। इस तकनीक के प्रयोग से एक यूनिट बिजली बनाने में सिर्फ 560 ग्राम कोयला ही खर्च होगा। कोयले की कम से कम खपत में ज्यादा बिजली उत्पादन करना वैज्ञानिकों का उद्देश्य है। साथ ही इस तकनीक से बिजली की ट्रिपिंग समस्या से भी निजात मिल पाएगी।
प्रो. मिश्रा ने बताया कि इन पांच दिनों में यहां आने वाले सभी प्रोफेसरों को सुपर क्रिटिकल पावर तकनीक पर विद्युत उत्पादन हेतु प्रशिक्षण दिया जाएगा। जो देश में गुणवत्तापूर्ण विद्युत उत्पादन एवं वितरण के लिए कारगर साबित होगा।
सुपर क्रिटिकल तकनीक पर बनेगा पनकी ताप विद्युत गृह
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के सचिव और पनकी ताप विद्युत गृह के अधीक्षण अभियंता विवेक अस्थाना ने बताया कि पनकी थर्मल पावर प्लांट की 220 मेगावाट की यूनिट सब क्रिटिकल तकनीक पर आधारित थी। इससे प्रदूषण भी अधिक फैलता था। अब 660 मेगावाट की नई यूनिट सुपर क्रिटिकल पावर जनरेशन तकनीक पर तैयार की जाएगी।