फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur Health Year Ender 2023, Kanpur got its PGI, Ursala got the gift of cardiac unit, regretted not getting

Year Ender 2023: कानपुर को मिला अपना PGI, उर्सला को मिली कार्डियक यूनिट की सौगात, इनके न मिल पाने का रहा मलाल

Thu, 28 Dec 2023 01:40 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 28 Dec 2023 01:40 PM IST
सार

Kanpur News: यह साल स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से अच्छा रहा। शहरवासियों को जहां हैलट स्थित मल्टी सुपर स्पेशियलिटी के रूप में अपना पीजीआई मिला, वहीं उर्सला में कार्डियक यूनिट की शुरुआत हुई। इसके अलावा हैलट के सर्जरी विभाग में रिजनरेशन सर्जरी शुरू हुई। इससे खासतौर पर स्तन कैंसर के रोगियों को राहत मिली।

विज्ञापन
Kanpur Health Year Ender 2023, Kanpur got its PGI, Ursala got the gift of cardiac unit, regretted not getting
,kanpur health year ender 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हैलट स्थित मल्टी सुपर स्पेशियलिटी पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च इंस्टीट्यूट में रोगियों को चिकित्सीय सुविधाएं मिलनी शुरू हो गई हैं। सुपर स्पेशलिस्ट को दिखाने के लिए रोगियों को कहीं बाहर जाने या निजी क्षेत्र के अस्पतालों में दिखाने की जरूरत नहीं रही। इसके साथ ही सुपर स्पेशियलिटी की सर्जरी भी शुरू हो गई हैं। पीजीआई के आठ मॉड्यूलर ओटी चालू हैं। इंटेंसिव केयर यूनिट का भी लाभ मिलने लगा है।

विज्ञापन

इंस्टीट्यूट के आठ विभागों में विशेषज्ञ आ गए हैं। पीजीआई की ओपीडी जून में शुरू हुई थी। अभी तक जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में डायबिटीज के रोगियों को विशेषज्ञ का इलाज नहीं मिल पा रहा था। इसके साथ ही पहली बार पीएमआर विभाग शुरू कर दिया गया है। साथ ही अति अत्याधुनिक एमआरआई मशीन की जांच की सुविधा मिलने लगी है। इस मशीन के सॉफ्टवेयर से कैंसर रोगियों की बिना बायोप्सी के जांच हो जाती है।
विज्ञापन

लेजर न्यूरो सर्जरी की भी सुविधा रोगियों को मिलने लगी है। पीजीआई में पेन मेडिसिन विभाग नया शुरू हुआ है। इंस्टीट्यूट के नोडल और न्यूरो साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी इंस्टीट्यूट का पूरा भवन फंक्शनल हो गया है। सभी ओटी, आईसीयू वगैरह चालू हो गए हैं। इसके साथ ही न्यूरो से संबंधित उच्चीकृत जांचें भी शुरू हो गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

डायबिटीज और स्पाइनल कॉर्ड के रोगियों को मिलने लगी स्टेम सेल थेरेपी
प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज इकलौता है, जिसमें स्टेम सेल थेरेपी दी जा रही है। साल 2023 में रिजनरेशन मेडिसिन विभाग में स्टेम सेल थेरेपी के दो सौ केस पार हो गए हैं। इस साल से डायबिटीज रोगियों और स्पाइनल कॉर्ड के चोट के रोगियों को स्टेम सेल थेरेपी शुरू की गई। दिसंबर में पहली बार शासन की ओर से थेरेपी के लिए 25 लाख रुपये बजट मिला है।

रतौंधी के रोगियों में स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल
शासन को स्टेम सेल बैंक के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। संभव है कि अगले साल से प्रस्ताव पास हो और लोग अपने बच्चों की नाड़ इसमें सुरक्षित करा सकें। न्यूरो संबंधी रोगों के रोगियों को अभी सबसे अधिक स्टेम सेल थेरेपी दी गई है। इसके अलावा गठिया रोग में भी थेरेपी दी जा रही है। वहीं नेत्र रोग विभाग में पहली बार रतौंधी के रोगियों में स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज खान की ईजाद परवेज निडिल को पेटेंट मिला है।

उर्सला को कार्डियक यूनिट की सौगात भी मिली
उर्सला अस्पताल में पांच साल बाद वर्ष 2023 में कार्डियक यूनिट शुरू हो सकी। यूनिट में पांच स्टाफ नर्स और एक जनरल फिजीशियन और एक कार्डियोलॉजिस्ट तैनात है। दो स्टाफ नर्स सीएमओ ने अस्पताल को दी है। हालांकि अभी एक और स्टाफ की आवश्यकता है। साल 2018 में अस्पताल को चार बेड की कार्डियक यूनिट मिली थी। यूनिट के लिए 1.35 करोड़ रुपये उपकरण आए थे।

20 से 25 मरीज रोजना आते हैं ओपीडी में
15 लाख से सिविल कार्य हुआ था। यूनिट में बेड साइड मॉनीटर, सेंट्रल मॉनीटर, डिफ्लेबुलेटर, टीएमटी, ईको, एबीजी मशीन, वेंटिलेटर, फाउलर बेड, ईसीजी मशीन, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे व 12 इंफ्यूजन पंप आए थे। ओपीडी में 20 से 25 मरीज रोजना आते हैं। दो से तीन मरीजों को रोजाना भर्ती करना पड़ता है। प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि अभी दो नर्स मिलीं हैं, हालांकि यूनिट शुरू कर दी गई है। और स्टाफ की मांग की जा रही है।

हैलट में रिजनरेशन सर्जरी की हुई शुरुआत
इस साल से हैलट के सर्जरी विभाग में रिजनरेशन सर्जरी शुरू हुई है। खासतौर पर स्तन कैंसर के रोगियों को राहत मिली है। रोगियों का कैंसर ग्रस्त स्तन काटने के बजाए सर्जरी करके इसे दुरुस्त कर दिया जाता है। अगर पूरा अंग कैंसर ग्रस्त है तो उसका अंग काटकर शरीर के दूसरे हिस्से से मांस लेकर नया अंग बना दिया जाता है। इसके साथ ही बर्न रोगियों के जले अंगों को दुरुस्त कर दिया जाता है। सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम शंकर का कहना है कि नए उपकरण आने से सुविधाएं और भी बेहतर हो जाएंगीं।

सीएचसी में गर्भवतियों को अल्ट्रसाउंड सुविधा मिली
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलने लगी है। इस साल से अल्ट्रासाउंड सेंटरों को सीएचसी से संबद्ध कर दिया गया है। सीएचसी आने वाली गर्भवती महिलाओं को निजी सेंटरों में निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही आठ सीएचसी में डिजिटल एक्सरे उपलब्ध कराए गए हैं

इनके न मिल पाने का रहा मलाल

 कोरोना काल से अटका है हैलट में ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव
हैलट परिसर में बनने वाले ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव इस साल अटका रहा। अस्पताल परिसर में एपेक्स ट्रॉमा सेंटर को मंजूरी मिली है। कानपुर मंडल के अलावा आसपास के जिलों के घायलों और रोगियों को इसका लाभ मिलेगा। 10 हजार वर्ग मीटर भूमि पर ट्रॉमा सेंटर का भवन बनना है। भवन के लिए 372 करोड़ और उपकरणों के लिए 168 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। इसे नेशनल हेल्थ मिशन के तहत बनाया जाना है। यह पूरा साल ट्रॉमा सेंटर की प्रक्रिया में ही गुजर गया। पहले इसे मेडिसिन विभाग के बगल में बनना था। इसके बाद इसे कांशीराम अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। फिर इसे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को दिया गया। यह योजना कोरोना काल के पहले की है। ट्राॅमा सेंटर के प्रस्ताव में एयर एंबुलेंस का भी प्रावधान रखा गया है। इसकी छत पर एयर एम्बुलेंस उतरेगी।

खूब दौड़े कागजी घोड़, पर जेके कैंसर के दिन नहीं बहुरे
जेके कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थिति सुधारने के लिए पूरा साल कागजी घोड़े दौड़ते रहे। विधानसभा की याचिका समिति की उप समिति की विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस संबंध में तेजी लाने का निर्णय लिया गया। इंस्टीट्यूट प्रबंधन ने फिर प्रस्ताव भेजा लेकिन हर बार की तरह फिर मामला ठंडे बस्ते में है। यहां एक पैथोलॉजिस्ट तक नहीं है। इससे कैंसर पुष्टि की मूल जांच बायोप्सी भी नहीं हो पा रही है। ओपीडी में नए रोगी आते हैं और उन्हें सर्जरी के लिए हैलट भेज दिया जाता है। इसके अलावा दूसरे हायर सेंटर के लिए रोगी रेफर कर दिए जाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed