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कानपुर देहात : परौंख में प्रशासन के बुलावे के इंतजार में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सहपाठी
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धौकलपुरवा में बुलावे के इंतजार में बैठे तोहर सिंह यादव। संवाद
- फोटो : AKBARPUR
संदलपुर। परौंख में राष्ट्रपति के एक बार फिर आने की जानकारी से उनके सहपाठी उत्सुक है। वह उनको देखने और उनसे मिलने के लिए बेताब हैं। अब वह प्रशासन के बुलावे का इंतजार कर रहे हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पैतृक गांव परौंख से जुड़ा मजरा धौकल पुरवा है। इसकी आबादी दो सौ के करीब है। गांव निवासी बुजुर्ग तोहर सिंह यादव (83) बताते हैं कि वह और रामनाथ कोविंद पांच किमी दूर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय खानपुर में पढ़ने के लिए पैदल जाते थे।
कोविंद के वह सबसे अच्छे सहपाठी थे। जब विद्यालय में भोजन अवकाश होता था तो दोनों लोग खानपुर के जमींदार राजेंद्र बहादुर सिंह की कोठी में बैठकर एक साथ खाना खाते थे। कक्षा आठ तक एक साथ पढ़ने के बाद कोविंद कानपुर में शिक्षा ग्रहण करने के लिए चले गए।
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उन्होंने बताया कि पिछले बार जब राष्ट्रपति पैतृक गांव आए थे, तो वह उनसे नहीं मिल पाए थे। इस बार उनकी इच्छा है कि वह आखिरी समय में अपने सहपाठी से मिलकर दो बातें कर लें।
उनका कहना है कि उम्र के हिसाब से चलने में बहुत दिक्कत होती है। इस वजह से राष्ट्रपति से मिलने के लिए प्रशासन के बुलावे का इंतजार कर रहे हैं।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पैतृक गांव परौंख से जुड़ा मजरा धौकल पुरवा है। इसकी आबादी दो सौ के करीब है। गांव निवासी बुजुर्ग तोहर सिंह यादव (83) बताते हैं कि वह और रामनाथ कोविंद पांच किमी दूर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय खानपुर में पढ़ने के लिए पैदल जाते थे।
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कोविंद के वह सबसे अच्छे सहपाठी थे। जब विद्यालय में भोजन अवकाश होता था तो दोनों लोग खानपुर के जमींदार राजेंद्र बहादुर सिंह की कोठी में बैठकर एक साथ खाना खाते थे। कक्षा आठ तक एक साथ पढ़ने के बाद कोविंद कानपुर में शिक्षा ग्रहण करने के लिए चले गए।
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उन्होंने बताया कि पिछले बार जब राष्ट्रपति पैतृक गांव आए थे, तो वह उनसे नहीं मिल पाए थे। इस बार उनकी इच्छा है कि वह आखिरी समय में अपने सहपाठी से मिलकर दो बातें कर लें।
उनका कहना है कि उम्र के हिसाब से चलने में बहुत दिक्कत होती है। इस वजह से राष्ट्रपति से मिलने के लिए प्रशासन के बुलावे का इंतजार कर रहे हैं।