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खेतीबाड़ी से कमाया मुनाफा, बेटे को भेजा आस्ट्रेलिया
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खेत पर स्टेटिक विधि से खड़ी फसल दिखाता किसान।
- फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। 22 साल तक पंजाब में खेती करने के बाद अकबरपुर के अब्दुल हमीद ने अपने घर में वैज्ञानिक विधि से खेती करने का मन बनाया। भाई चांद बाबू ने उनका साथ दिया। इसके बाद दोनों भाइयों ने अकबरपुर के जगजीवनपुर गांव में पड़ी सात बीघा जमीन में सब्जी की फसल पैदा करना शुरू किया। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर दोनों की आमदनी तीन गुना बढ़ गई। इसके बाद अब्दुल हमीद ने बेटे को नौकरी करने के लिए आस्ट्रेलिया भेज दिया।
अकबरपुर निवासी किसान चांद बाबू ने बताया कि वह पहले सात बीघा जमीन पर परंपरागत तरीके से खेती करके साल भर में डेढ़ से पौने दो लाख रुपये कमाते थे। उनके भाई अब्दुल हमीद पंजाब में 22 साल से वैज्ञानिक खेती कर रहे थे। पत्नी की मौत के बाद वह अकबरपुर आ गए। इसके बाद हमीद ने चांद बाबू के साथ मिलकर मिगांव में पड़ी उसी सात बीघा जमीन पर दो साल पहले वैज्ञानिक तरीके से सब्जी की खेती शुरू की। इससे आमदनी तीन गुना बढ़ गई।
यानी हर साल चार लाख रुपये से अधिक की आय खेती होने लगी। इसके बाद अब्दुल हमीद ने बेटे हक रहतर को अच्छी शिक्षा दिलाई। आज उनके बेटा आस्ट्रेलिया की बहु राष्ट्रीय कंपनी नौकरी कर रहा है। चांद बाबू और अब्दुल हमीद का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके स्रे खेती करने के लिए उद्यान विभाग की ओर से पूरा सहयोग किया जा रहा है। अब क्षेत्र के तमाम किसान भी उनके खेत पर पहुंचकर इस विधि को सीख रहे हैं।
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स्टेटिक विधि से कर रहे सब्जी
किसान चांद बाबू का कहना है कि वह टमाटर, बैगन व अन्य सब्जी की फसल वैज्ञानिक तरीके से पैदा कर रहे हैं। इससे मुनाफा पहले की अपेक्षा बढ़ा है। अब्दुल हमीद बताते है कि पंजाब में स्टेटिक विधि से वह सब्जियां पैदा करते थे। इसलिए यहां भी कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लेकर स्टेटिक विधि का इस्तेमाल किया, जो सफल हुआ।
केंचुए की खाद बनने की मंशा
उप कृषि निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि किसान चांद बाबू व अब्दुल हमीद सब्जी की खेती कर रहे हैं। फिलहाल वह बाजारों में मिलने वाली खाद का प्रयोग खेती में कर रहे हैं। किसान भाइयों की मंशा है कि वह जैविक खेती के साथ फसल में केंचुए की खाद का प्रयोग करें। इसके लिए शासन की तरफ से किसानों को मदद दी जाएगी।
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अकबरपुर निवासी किसान चांद बाबू ने बताया कि वह पहले सात बीघा जमीन पर परंपरागत तरीके से खेती करके साल भर में डेढ़ से पौने दो लाख रुपये कमाते थे। उनके भाई अब्दुल हमीद पंजाब में 22 साल से वैज्ञानिक खेती कर रहे थे। पत्नी की मौत के बाद वह अकबरपुर आ गए। इसके बाद हमीद ने चांद बाबू के साथ मिलकर मिगांव में पड़ी उसी सात बीघा जमीन पर दो साल पहले वैज्ञानिक तरीके से सब्जी की खेती शुरू की। इससे आमदनी तीन गुना बढ़ गई।
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यानी हर साल चार लाख रुपये से अधिक की आय खेती होने लगी। इसके बाद अब्दुल हमीद ने बेटे हक रहतर को अच्छी शिक्षा दिलाई। आज उनके बेटा आस्ट्रेलिया की बहु राष्ट्रीय कंपनी नौकरी कर रहा है। चांद बाबू और अब्दुल हमीद का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके स्रे खेती करने के लिए उद्यान विभाग की ओर से पूरा सहयोग किया जा रहा है। अब क्षेत्र के तमाम किसान भी उनके खेत पर पहुंचकर इस विधि को सीख रहे हैं।
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स्टेटिक विधि से कर रहे सब्जी
किसान चांद बाबू का कहना है कि वह टमाटर, बैगन व अन्य सब्जी की फसल वैज्ञानिक तरीके से पैदा कर रहे हैं। इससे मुनाफा पहले की अपेक्षा बढ़ा है। अब्दुल हमीद बताते है कि पंजाब में स्टेटिक विधि से वह सब्जियां पैदा करते थे। इसलिए यहां भी कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लेकर स्टेटिक विधि का इस्तेमाल किया, जो सफल हुआ।
केंचुए की खाद बनने की मंशा
उप कृषि निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि किसान चांद बाबू व अब्दुल हमीद सब्जी की खेती कर रहे हैं। फिलहाल वह बाजारों में मिलने वाली खाद का प्रयोग खेती में कर रहे हैं। किसान भाइयों की मंशा है कि वह जैविक खेती के साथ फसल में केंचुए की खाद का प्रयोग करें। इसके लिए शासन की तरफ से किसानों को मदद दी जाएगी।