फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   kanpur coronavirus cases covid 19 pandemic, blood report of patients

रोगियों की ब्लड रिपोर्ट में खुलासा: इम्यूनिटी कम होते ही बैक्टीरिया भी कर रहा हमला, सांस की नली में करता है वार

Mon, 10 May 2021 04:54 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 10 May 2021 04:54 PM IST
सार

फेफड़ों की नलियों में थक्के जमने के साथ खून में ऑक्सीजन मिलने वाले स्थान पर सूजन आ जाती है जिससे ऑक्सीजन लेवल गिर जाता है।

विज्ञापन
kanpur coronavirus cases covid 19 pandemic, blood report of patients
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना संक्रमण होने के बाद रोगी की शरीर की इम्यूनिटी डाउन होते ही सांस की नली और गले के बैक्टीरिया शरीर पर हमला बोल देते हैं। इससे रोगियों की स्थिति गंभीर हो जाती है। फेफड़ों की नलियों में थक्के जमने के साथ खून में ऑक्सीजन मिलने वाले स्थान पर सूजन आ जाती है जिससे ऑक्सीजन लेवल गिर जाता है।
विज्ञापन


यह बात गंभीर रोगियों की ब्लड रिपोर्ट में सामने आई है। इससे विशेषज्ञों ने इलाज के तरीके में थोड़ी तब्दीली के साथ आईसीयू में इन्फेक्शन कंट्रोल पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक तो शरीर के अंदर बैक्टीरिया रहते हैं जो इम्यूनिटी कम होने पर हमला बोले देते हैं।
विज्ञापन


सांस की नली में भी ऐसे बैक्टीरिया की भरमार होती है। इसके अलावा मुंह और गले में बैक्टीरिया होते हैं। वायरस एक निश्चित अवधि के बाद मर जाता है, उसके बाद ये बैक्टीरिया सक्रिय होते हैं। बैक्टीरिया निमोनिया भी करते हैं। इसके साथ ही फेफड़ों में सूजन पैदा कर देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गंभीर रोगियों की ब्लड रिपोर्ट की जांच में बैक्टीरिया संक्रमण बढ़ा हुआ मिला है। इसके साथ पॉलीमॉर्फ्स भी बढ़े हुए पाए गए हैं। इस स्थिति पर विशेषज्ञों ने खासतौर पर अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती होने वाले रोगियों के लिए चिंता जाहिर की है।

उनका कहना है कि आईसीयू का खासतौर पर नियमित इन्फेक्शन कंट्रोल की जांच की जाए। आईसीयू और वार्डों से सैंपल लेकर माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जांच कराई जाए। आईसीयू, ओटी और अस्पतालों में पाया जाने वाला सूडोमोनास बैक्टीरिया मल्टी ड्रग रिसेस्टेंट होता है।

इसका संक्रमण जानलेवा माना जाता है। रोगी का इसके संक्रमण से उबर पाना मुश्किल होता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि गंभीर रोगियों में बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ा हुआ आ रहा है। 

सांस की नली में होते हैं माइक्रो बैक्ट्रीयम
नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन इंडिया के सेंट्रल जोन चेयरमैन प्रोफेसर एसके कटियार का कहना है कि सांस की नली में माइक्रो बैक्ट्रीयम होते हैं। वायरल संक्रमण के बाद ये हमला बोल देते हैं। इससे फेफड़ों में सूजन आ जाती है। इसके अलावा आईसीयू और वार्डों में इन्फेक्शन कंट्रोल जरूरी है।

कोविड अस्पतालों में इन्फेक्शन कंट्रोल चेक नहीं हो रहा
नगर में जिन अस्पतालों में कोविड रोगियों का इलाज हो रहा है। उनके आईसीयू और वार्डों में इन्फेक्शन कंट्रोल की स्थिति क्या है? यह कोई चेक नहीं कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आईसीयू और वार्डों में इन्फेक्शन कंट्रोल नहीं होगा तो बाहर से अच्छा खासा रोगी आकर गंभीर हो जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इस संबंध में जानकारी से इनकार कर रहे हैं। हैलट के कोविड अस्पतालों के संबंध में डाक्टरों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने सैंपल कब लिए? जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल का कहना है कि फैमिगेशन और सैनिटाइजेशन रोज कराते हैं।

ऐसे होती हैं जांच
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ आईसीयू, ओटी और एचडीयू में आकर दीवारों, दरवाजों के किनारों, फर्श से धूल, पेंट की पपड़ियां आदि का सैंपल लेते हैं। इसके बाद लैब में बैक्टीरिया की जांच होती है। इससे बैक्टीरिया आदि और संक्रमण लेवल का पता चल जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed