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Kanpur: अधिवक्ता अखिलेश दुबे ने सिपाही के खेत व मकान पर किया कब्जा, पुलिस अधिकारी ने एसआईटी को सौंपी जांच
Tue, 09 Sep 2025 11:25 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 09 Sep 2025 11:25 PM IST
सार
Kanpur News: अखिलेश दुबे ने सिपाही के खेत व मकान पर कब्जा किया। मामला बिधनू के बाजपुर और रमईपुर का है।
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अधिवक्ता अखिलेश दुबे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लखनऊ के प्रशिक्षण निदेशालय पर तैनात सिपाही राजा पांडेय के खेत, मकान, कुआं और मंदिर पर अधिवक्ता अखिलेश दुबे ने कब्जा कर लिया। उन्होंने अखिलेश दुबे, निखलेश दुबे, शालिनी दुबे के खिलाफ आरोप लगाकर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से शिकायत की है। पुलिस अधिकारी ने एसआईटी को जांच सौंपी है।
गोविंदनगर निवासी राजा पांडेय के मुताबिक बिधनू के बाजपुर गांव में उनका पैतृक मकान, कुआं और मंदिर है। रमईपुर में 13 बीघा कृषि भूमि है। गांव के कल्लू व मनोज शुक्ला अखिलेश दुबे व उसके परिवार के लिए कार्य करते रहे हैं। अखिलेश दुबे ने उन्हें मई 2006 में अपने घर बुलवाया। उनसे जमीन बेचने के लिए कहा। मना करने पर दबाव बनाकर पौने तीन बीघा जमीन का सौदा 50 लाख रुपये में कर दिया। राजा पांडेय के मुताबिक वह 20 जून 2006 को घर गए थे। वहां कुछ लोग असलहों से लैस होकर आए और जबरन कचहरी ले गए। उनकी 0.343 हेक्टेयर जमीन का केवल एक लाख रुपये में सौदा कर दिया।
आरोप है कि उन्हें एक रुपये भी नहीं दिए गए। निखलेश दुबे ने दोबारा जमीन का बैनामा कराने पर पूरी रकम देने का वादा किया था। आरोपियों ने उन्हें रुपये ले जाने के लिए 23 मई 2008 को बुलाया। वह अखिलेश दुबे के घर पहुंचे तो वहां निखलेश दुबे, शालिनी दुबे, कल्लू और मनोज भी थे। सिपाही का आरोप है कि निखलेश दुबे ने उनसे कहा था कि तुम्हारे मकान पर परिवार वालों ने कब्जा कर रखा है। उसको खाली कराने के लिए मकान की लिखा पढ़ी उनके नाम कर दो। उन्होंने 15 अक्तूबर 2008 को उनके नाम लिखा पढ़ी कर दी। कोई रुपये नहीं दिए। आरोपियों से कई बार रुपये मांगे लेकिन उनसे टाल मटोल की गई। उनको धमकी दी गई।
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गोविंदनगर निवासी राजा पांडेय के मुताबिक बिधनू के बाजपुर गांव में उनका पैतृक मकान, कुआं और मंदिर है। रमईपुर में 13 बीघा कृषि भूमि है। गांव के कल्लू व मनोज शुक्ला अखिलेश दुबे व उसके परिवार के लिए कार्य करते रहे हैं। अखिलेश दुबे ने उन्हें मई 2006 में अपने घर बुलवाया। उनसे जमीन बेचने के लिए कहा। मना करने पर दबाव बनाकर पौने तीन बीघा जमीन का सौदा 50 लाख रुपये में कर दिया। राजा पांडेय के मुताबिक वह 20 जून 2006 को घर गए थे। वहां कुछ लोग असलहों से लैस होकर आए और जबरन कचहरी ले गए। उनकी 0.343 हेक्टेयर जमीन का केवल एक लाख रुपये में सौदा कर दिया।
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आरोप है कि उन्हें एक रुपये भी नहीं दिए गए। निखलेश दुबे ने दोबारा जमीन का बैनामा कराने पर पूरी रकम देने का वादा किया था। आरोपियों ने उन्हें रुपये ले जाने के लिए 23 मई 2008 को बुलाया। वह अखिलेश दुबे के घर पहुंचे तो वहां निखलेश दुबे, शालिनी दुबे, कल्लू और मनोज भी थे। सिपाही का आरोप है कि निखलेश दुबे ने उनसे कहा था कि तुम्हारे मकान पर परिवार वालों ने कब्जा कर रखा है। उसको खाली कराने के लिए मकान की लिखा पढ़ी उनके नाम कर दो। उन्होंने 15 अक्तूबर 2008 को उनके नाम लिखा पढ़ी कर दी। कोई रुपये नहीं दिए। आरोपियों से कई बार रुपये मांगे लेकिन उनसे टाल मटोल की गई। उनको धमकी दी गई।
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