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कानपुर: स्वच्छ वायु में सर्वेक्षण में तमगा, सड़कों की धूल से बदरंग वार्ड-78, कागजों में पैचहोल फ्री, पढ़ें डिटेल

Wed, 09 Sep 2026 11:42 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 09 Sep 2026 11:42 AM IST
सार

Kanpur News: स्वच्छ वायु में अव्वल आए सिविल लाइंस वार्ड-78 में नगर निगम के पैचहोल फ्री दावे की पोल खुल गई है। विभागों में तालमेल न होने से बार-बार खुदी सड़कों, सूखे वर्टिकल गार्डन और उड़ती धूल से जनता बेहाल है।

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Kanpur Accolade in clean air survey yet Ward 78 marred by road dust pothole free only on paper
वीआईपी रोड पर ग्वालटोली चौराहा के पास सड़क पर उड़ती धूल के बीच निकलते वाहन - फोटो : amar ujala

विस्तार

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रदेश में पहला स्थान पाने वाले वार्ड-78 सिविल लाइंस की जमीनी तस्वीर नगर निगम के दावे से बिल्कुल उलट है। नगर निगम ने वार्ड की 20.84 किमी सड़कों में 19 किलोमीटर को पूरी तरह पैचहोल फ्री बताया था, जबकि मौके पर पूरे वार्ड की सड़कों पर एक हजार से ज्यादा गड्ढे हैं। कई सड़कें लंबे समय से खुदी पड़ी हैं और इनमें पानी भी भरता है। यानी नगर निगम के दावे में सड़कें गड्ढामुक्त हैं, लेकिन मौके पर गड्ढों की भरमार है। कई जगह कूड़े के ढेर लगे हैं।

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परेड रोड से ग्रीनपार्क चौराहे तक पूरी सड़क सीएम ग्रिड योजना के काम के कारण खुदी पड़ी है। सड़क किनारे निर्माण सामग्री खुले में पड़ी है और जगह-जगह धूल उड़ रही है। म्योर मिल तिराहे से कचहरी रोड की ओर जाने पर फुटपाथ खुदे हुए हैं। कई स्थानों पर मिट्टी के ढेर लगे हैं। हडर्ड चौराहे से कचहरी की ओर पहुंचने पर पुलिस ऑफिस के बाहर सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। इसके आगे सड़क पर पार्किंग के कारण जाम की स्थिति रहती है। चेतना चौराहे के आगे सड़क पर भी बड़ा गड्ढा है।

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विभागों के तालमेल के अभाव में बार-बार खोदाई

काकादेव में सड़क बनी, फिर खोद दी
नीरक्षीर से डबल पुलिया जाने वाले मार्ग पर जलनिगम ने पाइप लाइन डालने के बाद सड़क बनाई। काम अधूरा रहने पर सड़क फिर खोद दी गई। मार्ग अब तक दुरुस्त नहीं हो सका है और वाहनों की आवाजाही के साथ धूल उड़ती है।

इंटरलॉकिंग बिछी, फिर उखाड़ दी
विजय से चेन फैक्टरी मार्ग पर नगर निगम ने इंटरलॉकिंग और नाला सफाई का काम कराया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने सड़क चौड़ीकरण के लिए इंटरलॉकिंग उखाड़ दी। सड़क बनने के बाद फिर खोदाई से मार्ग की स्थिति खराब हो गई।

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साकेतनगर-बर्रा में सड़क फिर खोदी
साकेतनगर के पराग डेयरी मार्ग और बर्रा में सचान गेस्ट हाउस वाली सड़क पर जलनिगम ने पाइप लाइन डाली और सड़क बनाई। इसके बाद जलकल ने अपना काम कराने के लिए फिर खोदाई की। फिर जलनिगम ने सड़क बनवाई। तीन साल के भीतर इन सड़कों को दो बार बनाया गया। बार-बार की खोदाई से इन मार्गों पर धूल उड़ती है।

शहर में एक साथ चल रहे कई निर्माण कार्य
शहर में इस समय सीएम ग्रिड के तहत नौ सड़कों का निर्माण चल रहा है। इसके साथ मेट्रो का काम भी जारी है। जलनिगम की ओर से पाइप लाइन बिछाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर खोदाई कराई जा रही है। इन निर्माण कार्यों के बीच विभागों में सामंजस्य की कमी से सड़कें बार-बार खोदी जा रही हैं। एक विभाग के सड़क बनाने के कुछ समय बाद दूसरे विभाग के काम के लिए उसी मार्ग पर फिर खोदाई हो जाती है।

ग्रीन बेल्ट खाली, वर्टिकल गार्डन में पौधे सूखे
शहर में वन विभाग और नगर निगम का उद्यान विभाग हर साल बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाने का दावा करता है, लेकिन कई जगह ग्रीन बेल्ट खाली हैं। कहीं लगाए गए पौधे मुरझाए हुए हैं। नगर निगम जोन-6 कार्यालय और लाल इमली के बाहर बनाए गए वर्टिकल गार्डन में भी पौधे सूख चुके हैं।

49 चालान के बावजूद कूड़ा जलाने की घटनाएं
नगर निगम कर्मियों के अलावा दुकानदार और कुछ लोग सड़क पर कूड़ा-कचरा जला देते हैं। इससे उठने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पिछले एक साल में कूड़ा जलाने पर 49 चालान किए गए, लेकिन घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा है। आए दिन कूड़ा जलाए जाने की सूचनाएं आती रहती हैं। कई बार नगर निगम कर्मियों के कूड़ा जलाने की बात भी सामने आती है।

माइक्रो सेंसर बताएंगे प्रदूषण की वजह
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के अनुसार, आईआईटी कानपुर और ऐरावत के साथ करार के तहत शहर में 125 माइक्रो सेंसर लगाए गए हैं। इनमें 55 सेंसर स्कूल-कॉलेजों और ऊंची इमारतों में लगाए गए हैं। ये क्षेत्र में उड़ने वाले धूल के कणों का आकलन करते हैं। इससे पता लगाने में मदद मिलेगी कि वायु प्रदूषण बढ़ाने वाले कण किस कारण बढ़ रहे हैं। पोर्टल आधारित प्रणाली के जरिये डेटा एकत्र किया जा रहा है। दूसरे चरण में रिपोर्ट का आकलन कर रूपरेखा तैयार की जाएगी और संबंधित विभाग को प्रदूषण कम करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यदि 15 दिन में संबंधित विभाग वायु प्रदूषण कम करने के लिए काम नहीं करता है तो उसके उच्च अधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

निर्माण कार्यों की वजह से चल रही खोदाई से रैंकिंग पर असर पड़ा है। सामांजस्य के लिए सभी विभागों को पत्र लिखे जा रहे हैं कि अगर कहीं कोई खोदाई करनी है तो सप्ताहभर में बता दें, उसके बाद दोबारा सड़क खोदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा सभी विभागों को सम्मलित कर एक समिति भी बनाई गई है।  -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त

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